नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा के घर में बेहोशी के बाद निधन हो गया। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने लगभग 45 मिनट तक CPR किया, पर सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल ने कार्डियक अरेस्ट की पुष्टि की।
उनका बचपन महाराष्ट्र के मुरुड‑जंजीरा में आर्थिक तंगी में बीता। 13 साल की उम्र में उन्होंने पोस्टर पेंटिंग शुरू की और बाद में सर जेजे इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट्स में पढ़ाई की। गरीबी, भूख और अपमान के अनुभवों ने उनके तेज़ स्वभाव और सच्ची बयानी को आकार दिया, जो केवल अभिनय नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा था।
रंगमंच में उन्होंने अपनी अभिनय कला निखारी और 1978 में फिल्म “गमन” से बड़े पर्दे पर कदम रखा। “परिंदा”, “क्रांतिवीर”, “अग्निसाक्षी”, “नटसम्राट” जैसी फिल्मों में उन्होंने विविध किरदारों से दर्शकों को जोड़ा।
नाना को तीन नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड मिले – “परिंदा” (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता), “क्रांतिवीर” (सर्वश्रेष्ठ अभिनेता) और “अग्निसाक्षी” (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता)। 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
मराठी अस्मिता उनके कार्य में गहराई से जुड़ी है। उन्होंने मराठी रंगमंच के कई प्रतिष्ठित नाटकों में काम किया और “नटसम्राट”, “डॉ. प्रकाश”, “देऊळ” जैसी मराठी फिल्मों में भाषा, संस्कृति और जड़ों के प्रति अपना लगाव दिखाया। उनका मराठी पहचान किसी राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि उनके काम और सामाजिक जुड़ाव से समझी जानी चाहिए।
राष्ट्रवादी पहचान का एक अहम हिस्सा उनका टेरिटोरियल आर्मी से जुड़ाव था। 1999 के कारगिल युद्ध में उन्होंने लगभग 60 दिन क्विक रिएक्शन टीम के साथ सेवा की और “प्रहार: द फाइनल अटैक” के लिए सैन्य प्रशिक्षण भी लिया।
2016 में उरी आतंकवादी हमले के बाद उन्होंने देश और सैनिकों को प्राथमिकता देने का स्पष्ट बयान दिया, जिससे बॉलीवुड में बहस छिड़ी। उनका बयान राष्ट्रवाद और सैनिकों के सम्मान की भावना के रूप में सराहा गया, जबकि कुछ ने इसे कलाकारों के अधिकारों के खिलाफ माना।
समाज के प्रति उनका योगदान भी उल्लेखनीय है। 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर NAAM फाउंडेशन की सह‑स्थापना की, जिसका फोकस सूखे, जल‑संकट और किसान सहायता पर था। 2024 में इस फाउंडेशन ने महाराष्ट्र सरकार और टाटा मोटर्स के सहयोग से 356 जलस्रोतों का पुनर्जीवन किया, जिससे 10 जिलों में लगभग 7,000 किसानों को लाभ पहुंचा और 7,000 मिलियन लीटर पानी का भंडारण संभव हुआ।
उनका करियर विवादों से मुक्त नहीं रहा। 2018 में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने Horn Ok Pleassss सेट पर नाना के अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया, लेकिन मुंबई पुलिस ने बी‑समरी रिपोर्ट जारी की और आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं पाए।
नाना पाटेकर की स्क्रीन इमेज गुस्सा, तीखी आवाज़ और कठोर संवादों से बनी थी, पर उनका वास्तविक व्यक्तित्व कई आयामों से युक्त था। गरीबी, मराठी रंगमंच, सेना, राष्ट्रवाद, किसान‑समस्या और विवाद—इन सबके बीच उन्होंने अपने विचारों को शब्दों से नहीं, काम से भी सिद्ध किया।
उनकी विरासत सिर्फ फिल्मों की सूची नहीं, बल्कि मराठी संस्कृति के प्रति लगाव, सैनिकों के सम्मान, जल‑संकट समाधान और सामाजिक कार्यों में निहित है, जो उन्हें भारतीय सिनेमा के एक अनूठे आइकन के रूप में स्थापित करता है।
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