भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष पर चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव चुनाव हारने पर ईवीएम और चुनाव आयोग को बदनाम करने लगते हैं। चुनाव जीतने पर अपनी योग्यता का दावा करते हैं और हारने पर व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र देश के नागरिक चलाएंगे, घुसपैठिए नहीं। घुसपैठियों के पक्ष में खड़े होने वालों को जनता नकार देगी। वह मंगलवार को बरेली में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे।
इमरजेंसी का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा कांग्रेस पर हमला बोलते हुए नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन उनकी दादी इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान करीब 1.30 लाख लोगों को जेल में डाल दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भी आपातकाल के दौरान दो बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कांग्रेस पर चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त करने और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। सरदार पटेल के बजाय जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के घटनाक्रम को भी उन्होंने वोट चोरी से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। ईवीएम पर चुनौती का भी किया जिक्र नड्डा ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को हैक करने की चुनौती दी थी, लेकिन कांग्रेस और सपा के नेता इसे स्वीकार करने नहीं पहुंचे। उन्होंने राहुल गांधी के कर्नाटक के महादेवपुरा में एक लाख वोट कटने के आरोप का जिक्र करते हुए कहा कि 450 दिन बीतने के बाद भी चुनाव आयोग को शपथपत्र नहीं दिया गया। हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में धांधली के आरोपों पर भी उन्होंने विपक्ष से प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि 2023 में बनाए गए कानून के तहत चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया। इससे पहले के चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों के बाद उन्हें अन्य सरकारी पद दिए जाने के उदाहरण गिनाते हुए उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। विपक्षी नेताओं पर भ्रष्टाचार और हिंसा के आरोपों का जिक्र नड्डा ने इंडी गठबंधन के नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामलों और जमानत पर होने को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला का नाम लेते हुए उन्हें जमानत पर बताया। इसके अलावा कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ चल रहे मामलों का उल्लेख किया। इन आरोपों को उन्होंने विपक्ष की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे नेता लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं।
उन्होंने अखिलेश यादव पर मुजफ्फरनगर दंगों और प्रदेश के कई शहरों में हुई हिंसा को लेकर आरोप लगाए। ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव का नाम भी हिंसा के संदर्भ में लिया। साथ ही ममता बनर्जी और महबूबा मुफ्ती के चुनावी हार का जिक्र करते हुए विपक्षी नेताओं पर कटाक्ष किया। विकसित भारत के लिए एनडीए को मजबूत करने का आह्वान नड्डा ने कहा कि विपक्ष को चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाने के बजाय जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के तमिलनाडु में 58 साल, पश्चिम बंगाल में 48 साल, उत्तर प्रदेश और गुजरात में 35 साल से सत्ता से बाहर रहने का जिक्र किया। इसके विपरीत उन्होंने हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनने तथा उत्तर प्रदेश में दो बार लगातार सरकार बनने का उल्लेख किया।
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