रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। पहले रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की ओर से बिना मानचित्र निर्मित 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाई को लेकर संकट की आशंका गहराई थी, अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से इन भवनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा से एक बार फिर छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
छात्रों ने धरना देकर उठाया था भविष्य का सवाल जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आरडीए के आदेश के बाद छात्रों ने यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। छात्रों का कहना था कि भवनों पर कार्रवाई से उनकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो सकता है। छात्रों ने सरकार से ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की मांग की थी। इस दौरान सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी विरोध जताया था।
विधानसभा से सड़क तक सपा ने जताया था विरोध जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों पर ध्वस्तीकरण के आदेश का मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया था। समाजवादी पार्टी के नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई के विरोध में आवाज उठाई थी। सपा ने इसे अनुचित कार्रवाई बताते हुए सरकार पर यूनिवर्सिटी को निशाना बनाने के आरोप लगाए थे। अब ईडी की कार्रवाई की चर्चा के बीच इस मुद्दे पर सियासी हलचल फिर बढ़ने की आशंका है।
कमिश्नर कोर्ट में विचाराधीन है मामला जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का मामला कमिश्नर कोर्ट में विचाराधीन है। रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से जारी ध्वस्तीकरण आदेश को यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने चुनौती दी है। ऐसे में मामले का निस्तारण होने तक भवनों पर कार्रवाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। अब ईडी की ओर से भवनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा से मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।
ध्वस्तीकरण के आदेश पर फिलहाल लगी है रोक जौहर यूनिवर्सिटी के 40 भवनों में से 38 को अवैध मानते हुए आरडीए ने 15 जुलाई 2026 को ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए थे। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने मंडलायुक्त न्यायालय में इसे चुनौती दी है। 22 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी की ओर से 17 भवनों के मानचित्र पेश किए गए। शेष दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक माह का समय दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित है। फिलहाल ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक है।
ईडी ने जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों की कीमतों का आकलन गलत तरीके से किया है। यह सभी भवन 2006 से 14 के बीच बने हैं। उस वक्त भवनों के निर्माण पर खर्चा अलग हुआ था,जबकि ईडी निर्माण की लागत का आंकलन 2026 के अनुसार कर रही है जो कि पूरी तरह गलत है। इसका आंकलन उस वक्त के अनुसार करना चाहिए। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में इसमें क्या आदेश करता है यह अलग विषय है।-सतनाम सिंह मट्टू, पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन
ईडी की कार्रवाई और आरडीए की कार्रवाई दो अलग अलग विषय हैं। ईडी मनी लांड्रिंग के मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है,जबकि आरडीए ने 38 भवनों के मानचित्र पास न कराए जाने के मुद्दे पर नोटिस दिया था। यह मामला फिलहाल कमिश्नर कोर्ट में विचाराधीन है।-सर्वजीत सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन
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