टाटा संस ने गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में दो मुख्य निर्णय लिए: चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को अगले पाँच साल के लिए फिर से नियुक्त करना और RBI के सख्त नियामक नियमों के कारण कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट करने की सहमति देना।
यह चंद्रशेखरन का तीसरा कार्यकाल होगा; उनका दूसरा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था, पर उन्होंने पहले ही कहा था कि वह उस समय पद से हटना चाहते थे।
बोर्ड में अधिकांश सदस्य ने एकमत से चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया, केवल नोएल टाटा ने विरोध किया। हालांकि, चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को शेयरधारकों की वार्षिक आम बैठक में अभी मंजूरी मिलनी बाकी है, जहाँ टाटा ट्रस्ट की 66 % हिस्सेदारी है।
IPO का प्रस्ताव बोर्ड की सहमति से आया है, क्योंकि RBI ने टाटा संस के NBFC पंजीकरण को रद्द कर दिया, जिससे लिस्टिंग अब नियामक बाध्यता बन गई।
चंद्रशेखरन का टाटा ग्रुप में लगभग 40 वर्षों का सफर है; उन्होंने करियर की शुरुआत TCS से की, बाद में CEO बने, और 2017 में पहली बार टाटा संस के चेयरमैन नियुक्त हुए। उनके नेतृत्व में एअर इंडिया का अधिग्रहण, टाटा डिजिटल का विस्तार और ग्रुप के मार्केट कैप में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप का राजस्व FY 2020 में 7.89 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY 2026 में 16.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 में लगभग 9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में 24 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच गया।
RBI ने 2022 में टाटा संस को अपर‑लेयर NBFC के रूप में पंजीकृत किया, जिससे कंपनी को तीन साल के भीतर लिस्टिंग करनी थी (सितंबर 2025)। कंपनी ने मार्च 2024 में लिस्टिंग से बचने की अर्जी दी, पर RBI ने 11 सितंबर 2026 को उसे खारिज कर दिया, जिससे IPO अब अनिवार्य हो गया।
टाटा संस की कुल संपत्ति मार्च 2026 तक लगभग 2.01 लाख करोड़ रुपये है, जो RBI के 1 लाख करोड़ थ्रेशोल्ड से काफी ऊपर है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि IPO की वैल्यू 7 लाख से 11 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकती है, जो भारत के इतिहास में सबसे बड़ा IPO बन सकता है।
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी लगभग 66 % है, शापूरजी पालोनजी ग्रुप 18.37 % और टाटा ग्रुप की कंपनियों (TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील) लगभग 13 % रखती हैं। लिस्टिंग से इन शेयरधारकों को कर्ज घटाने और नई निवेश योजनाओं के लिए पूँजी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बोर्ड में कुल छह सदस्य हैं; नोएल टाटा को छोड़कर सभी ने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया। सदस्य सूची इस प्रकार है:
- एन. चंद्रशेखरन – एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (चेयरमैन)
- नोएल टाटा – गैर‑कार्यकारी निदेशक और टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष
- वेणु श्रीनिवासन – गैर‑कार्यकारी निदेशक
- सौरभ अग्रवाल – कार्यकारी निदेशक और समूह CFO
- हरीश मनवानी – स्वतंत्र निदेशक
- अनीता मारंगोली जॉर्ज – स्वतंत्र निदेशक
नोएल टाटा का विरोध इस बात पर आधारित है कि चंद्रशेखरन ने पहले पद त्यागने की घोषणा की थी, इसलिए बोर्ड को नया उत्तराधिकारी खोजना चाहिए था, न कि मौजूदा निर्णय को बदलना चाहिए। उनके अनुसार, टाटा समूह के नियम के तहत एग्जीक्यूटिव 65 वर्ष की आयु में रिटायर होते हैं; 5 साल का विस्तार चंद्रशेखरन को 70 वर्ष तक पद पर रखेगा।
पिछले कुछ महीनों में दोनों के बीच रणनीतिक और वित्तीय मतभेद भी स्पष्ट हुए। नोएल टाटा ने ग्रुप के नए सेक्टर (एयर इंडिया, डिजिटल) के वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज और खर्चों पर सवाल उठाए और सख्त निगरानी की मांग की।
नोएल टाटा के परिवार के सदस्य भी टाटा ग्रुप में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर हैं: बड़ी बेटी लीया टाटा IHCL के तहत Gateway Hotels & Resorts की वाइस प्रेसिडेंट और ब्रांड लीडर हैं, साथ ही टाटा एजुकेशनल ट्रस्ट और टाटा सोशल वेलफेयर में ट्रस्टी हैं; छोटी बेटी माया टाटा ट्रेंट लिमिटेड के ई‑कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग ऑपरेशन्स से जुड़ी हैं और कई ट्रस्ट में ट्रस्टी हैं; बेटे नेविल टाटा ट्रेंट की सुपरमार्केट श्रृंखला Star Bazaar और फैशन ब्रांड Zudio में प्रमुख हैं, और दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स तीन अलग‑अलग संस्थाएँ हैं:
- टाटा ग्रुप – सभी टाटा‑ब्रांडेड कंपनियों का एक व्यापक एम्ब्रेला, जिसमें TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, टाइटन, एअर इंडिया, ट्रेंट आदि शामिल हैं। यह कोई एकल कानूनी मालिक नहीं रखता, बल्कि स्वतंत्र कंपनियों का एक गठबंधन है।
- टाटा संस – टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर, जो ग्रुप की बड़ी कंपनियों में प्रमुख शेयरहोल्डिंग रखती है, रणनीतिक दिशा तय करती है, बड़े व्यावसायिक फैसले लेती है और ‘टाटा’ ब्रांड के उपयोग को नियंत्रित करती है। वर्तमान में यह अनलिस्टेड है और अधिकांश हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है।
- टाटा ट्रस्ट्स – सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट का संयुक्त निकाय, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण जैसे चैरिटी कार्यों में संलग्न है। इनके पास टाटा संस की लगभग 66 % हिस्सेदारी है, जिससे कंपनी के डिविडेंड का बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगाया जाता है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!