तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' आज चेन्नई के पनैयार स्थित अपने मुख्यालय में गठबंधन के कामकाज और संगठनात्मक ढांचे को औपचारिक रूप देने के लिए दूसरी अहम बैठक करेगी। बैठक की अध्यक्षता टीवीके के संस्थापक और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय करेंगे। इस बैठक में गठबंधन की आगे की रणनीति और उसके औपचारिक स्वरूप को लेकर अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। बैठक में कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके के शामिल होने की पुष्टि है, जबकि सीपीएम ने बैठक से दूरी बना ली है और भाकपा के भी शामिल न होने की संभावना है।
चुनाव बाद गठबंधन को औपचारिक रूप देने की तैयारी इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें चुनाव के बाद गठबंधन को औपचारिक रूप देना, 'साझा न्यूनतम कार्यक्रम' का मसौदा तैयार करना, गठबंधन के संचालन के लिए एक समिति का गठन और गठबंधन का आधिकारिक नाम तय करना शामिल है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सहमति बनने के बाद गठबंधन के कामकाज को एक स्पष्ट ढांचा मिल सकता है।
सभी सहयोगियों को भेजा गया न्योता सूत्रों के मुताबिक, टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल सभी सहयोगी दलों को बैठक में शामिल होने का न्योता भेजा गया है। इस गठबंधन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पांच विधायक, विदुथलाई चिरुथाइगल काची, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कझगम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा शामिल हैं।
कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके की मौजूदगी तय कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके जैसे प्रमुख सहयोगियों ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। हालांकि, गठबंधन के वामपंथी सहयोगियों के बैठक से दूरी बनाए रखने की संभावना है। इससे गठबंधन के भीतर अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर सामने आ सकती है।
माकपा ने साफ किया रुख, बैठक से रहेगी दूर माकपा ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वह बैठक में शामिल नहीं होगी। माकपा के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने स्पष्ट किया है कि टीवीके सरकार को पार्टी का समर्थन सरकार को स्थिर बनाए रखने के लिए दिया गया मुद्दा-आधारित बाहरी समर्थन है। उनका कहना है कि पार्टी मंत्रिमंडल में जगह मिले बिना गठबंधन के किसी औपचारिक ढांचे का हिस्सा नहीं बनना चाहती।
भाकपा के भी शामिल न होने की संभावना भाकपा के भी बैठक में शामिल नहीं होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो यह लगातार दूसरी बार होगा, जब वामपंथी दल गठबंधन को औपचारिक रूप देने से जुड़ी बातचीत से दूरी बनाएंगे। वाम दलों का रुख इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे सरकार को समर्थन देने के बावजूद अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और नीतिगत रुख बरकरार रखना चाहते हैं।
गठबंधन के भीतर मतभेदों के बीच हो रही बैठक टीवीके के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब उसके भीतर राजनीतिक मतभेद भी उभरकर सामने आए हैं। कांग्रेस और टीवीके के बीच प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर तनाव की स्थिति है। वहीं, वामपंथी दल राज्य सरकार की नीतियों पर अपनी स्वतंत्र राय रखने के लिए गठबंधन के औपचारिक ढांचे से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
विजय के प्रधानमंत्री पद को लेकर भी उठी चर्चा टीवीके के लोक निर्माण विभाग के मंत्री आधव अर्जुन पहले ही कह चुके हैं कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर तमिलनाडु के किसी नेता को होना चाहिए। इसके बाद प्रधानमंत्री पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई थीं। 2029 में प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बाद विजय का नाम भी चर्चा में आया था।
राहुल गांधी के समर्थन पर कांग्रेस का दबाव तमिलनाडु के पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार ने कहा है कि अगर टीवीके 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर राहुल गांधी का समर्थन नहीं करती है, तो कांग्रेस के मंत्री इस्तीफा दे देंगे। उनके इस बयान ने गठबंधन के भीतर प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर चल रही खींचतान को और हवा दे दी।
'स्नेहवश' दिए बयान पर मंत्री ने दी सफाई तमिलनाडु के मंत्री राजमोहन ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा है कि यह कोई आधिकारिक घोषणा नहीं थी, बल्कि 'स्नेहवश' दिया गया एक बयान था। ऐसे में अब सभी की नजरें टीवीके की आज होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां गठबंधन के स्वरूप, साझा कार्यक्रम और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर तस्वीर कुछ हद तक साफ हो सकती है।
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