10 अक्तूबर 1964 को जापान की राजधानी टोक्यो में ओलिंपिक खेलों का आगाज हुआ था। ये पहली बार था, जब एशिया में ओलिंपिक का आयोजन किया गया। करीब दो सप्ताह तक चले इन खेलों का समापन 24 अक्तूबर 1964 को हुआ।
15 दिनों तक चले इन खेलों में 93 देशों के 5,151 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कुल 20 खेलों में 163 इवेंट आयोजित किए गए। इन खेलों में पहली बार जूडो और वॉलीबॉल को शामिल किया गया था। इन ओलिंपिक खेलों में सोवियत संघ 96 पदक जीतकर शीर्ष पर रहा। अमेरिका 90 पदकों के साथ दूसरे और जर्मनी 50 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत को केवल हॉकी में एक पदक मिला। हॉकी के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर 1960 के रोम ओलिंपिक में मिली हार का बदला लिया।
10 अक्तूबर 2014 को भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा हुई थी। उन्हें यह पुरस्कार पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। सत्यार्थी को यह सम्मान बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल मजदूरी के खिलाफ उनके लंबे संघर्ष के लिए मिला। इस उपलब्धि ने उनके काम को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई और बाल शोषण के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने में मदद की। कैलाश सत्यार्थी का जन्म 11 जनवरी 1954 को मध्य प्रदेश के विदिशा में हुआ था। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन करीब 26 साल की उम्र में अपना पेशा छोड़कर बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने का फैसला किया। उन्होंने बाल मजदूरी और बच्चों के शोषण के खिलाफ अभियान चलाए। उनके प्रयासों से हजारों बच्चों को शोषण और बंधुआ मजदूरी से बाहर निकालने में मदद मिली। वह बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित बचपन दिलाने के लिए लगातार सक्रिय रहे। सत्यार्थी ने बाल मजदूरी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अभियान चलाया और ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर के अध्यक्ष के रूप में काम किया। बच्चों को शोषण से बचाने के लिए चलाए गए अभियानों के दौरान उन्हें कई बार हमलों का सामना करना पड़ा। साल 2004 में ग्रेट रोमन सर्कस से बाल कलाकारों को छुड़ाने के अभियान और 2011 में दिल्ली की एक कपड़ा फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान भी उन पर हमले हुए। इसके बावजूद उन्होंने बाल अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखा। नोबेल शांति पुरस्कार मिलने से पहले भी कैलाश सत्यार्थी को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके थे। इनमें 1994 का जर्मनी का द एयकनर इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड, 1995 का अमेरिका का रॉबर्ट एफ. कैनेडी ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड, 2007 का मेडल ऑफ इटेलियन सीनेट और 2009 का डिफेंडर्स ऑफ डेमोक्रेसी अवॉर्ड शामिल हैं। इन सम्मानों ने बच्चों के अधिकारों और बाल मजदूरी के खिलाफ उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी।
10 अक्तूबर 1967 को बाह्य अंतरिक्ष संधि यानी आउटर स्पेस ट्रीटी प्रभावी हुई थी। इस संधि पर 27 जनवरी 1967 को अमेरिका, सोवियत संघ और ब्रिटेन ने हस्ताक्षर किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य बाहरी अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती पर रोक लगाना और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करना था। इस समझौते को अंतरिक्ष के सैन्य इस्तेमाल को सीमित करने और विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जाता है। इससे पहले दिसंबर 1966 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस संधि को मंजूरी दी थी। इसके नियमों के मुताबिक, कोई भी देश बाहरी अंतरिक्ष, चंद्रमा या अन्य खगोलीय पिंडों पर अपना राष्ट्रीय स्वामित्व नहीं जता सकता। सभी देशों को अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान करने की स्वतंत्रता दी गई है। संधि में चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों पर सैन्य ठिकाने बनाने तथा सैन्य गतिविधियां संचालित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष को सभी देशों के हित में शांतिपूर्ण क्षेत्र बनाए रखना है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!