अमेरिकी सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 को आठ बड़ी टेक कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित कर दिया, जिससे ग्रीन कार्ड के लिए प्रायोजन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
कंपनियों में भारत की TCS, Infosys, Wipro, HCLTech के साथ-साथ Microsoft, Adobe, Cognizant और Capgemini शामिल हैं।
इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करना है।
PERM प्रक्रिया में नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कार्य स्थितियों पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2009 से अब तक इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए PERM दाखिल किए हैं, जिनमें 2.30 लाख से अधिक H-1B वीजा और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन प्राप्त हुए हैं।
हालांकि, PERM पर निलंबन का मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों के सभी H-1B वीजा रद्द हो गए हैं। H-1B और ग्रीन कार्ड प्रक्रियाएँ अलग-अलग हैं।
Microsoft ने जवाब में कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उनके H-1B आवेदनों में 80% मौजूदा कर्मचारियों के वीजा विस्तार या स्टेटस परिवर्तन से संबंधित थे, न कि नए कर्मचारियों की भर्ती से।
Microsoft ने जुलाई 2026 में लगभग 4,800 पदों में कटौती की घोषणा की, जो उसके वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1% था।
अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है; 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में 11,77,766 अंतरराष्ट्रीय छात्र पंजीकृत थे, जिनमें 3,63,019 भारतीय छात्र शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भी वीजा जांच और काम करने के नियमों का पालन करना होता है; दिसंबर 2025 से कुछ छात्र और एक्सचेंज वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया की जाँच के निर्देश बढ़ाए गए हैं।
पढ़ाई के बाद, पात्र विदेशी छात्र वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) के तहत 12 महीने तक काम कर सकते हैं, और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों के छात्रों को 24 महीने का अतिरिक्त विस्तार मिलता है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि कुछ कंपनियाँ H-1B वीजा का उपयोग कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह रखने के लिए कर रही हैं, जिससे अमेरिकी नौकरियों और वेतन पर असर पड़ता है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, FY 2025-26 में भारत के सॉफ्टवेयर और आईटी-सक्षम सेवाओं के निर्यात का 54.1% हिस्सा 221.4 अरब डॉलर में से 119.7 अरब डॉलर था।
पूर्व Infosys CFO टी.वी. मोहनदास पई ने कहा कि ग्रीन कार्ड प्रायोजन पर इस निर्णय का तत्काल प्रभाव सीमित हो सकता है क्योंकि पहले से ही लंबी प्रतीक्षा सूची मौजूद है।
जोहो के संस्थापक श्रीधर वेंबू ने भारतीय तकनीकी पेशेवरों से भारत लौटकर देश के टेक सेक्टर को मजबूत करने का आह्वान किया।
NASSCOM ने बताया कि अमेरिकी कंपनियों में भारतीय IT पेशेवरों की H-1B पर निर्भरता घट गई है और ग्रीन कार्ड प्रायोजन कम हो गया है।
GTRI ने भारतीय कंपनियों को अन्य बाजारों में कारोबार बढ़ाने, भारत से सेवाएं देने की क्षमता मजबूत करने और AI जैसी उच्च मूल्य वाली तकनीकी सेवाओं पर ध्यान देने की सलाह दी।
इन सभी परिवर्तनों के बीच, अमेरिकी वीजा नीति अभी भी अस्थायी वीजा और स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के बीच विभाजित है, और ग्रीन कार्ड के लिए अलग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।
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