अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को मिडटर्म चुनावों में भारी हार का सामना करना पड़ा, जिससे कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को स्पष्ट बहुमत मिल गया।
प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में डेमोक्रेट्स ने 228 सीटें जीतीं, जबकि रिपब्लिकन केवल 139 सीटों पर टिके रहे। यह परिणाम पिछले कार्यकाल की तुलना में रिपब्लिकन की सीटों में 81 की गिरावट दर्शाता है।
सीनेट में भी स्थिति समान रही। डेमोक्रेट्स की सीटें 54 तक बढ़ गईं, जबकि रिपब्लिकन की संख्या 44 रह गई। दोनों सदनों में बहुमत डेमोक्रेट्स के हाथों में होने से ट्रम्प के लिए विधायी प्रक्रिया अधिक कठिन हो जाएगी।
रिपब्लिकन बहुमत के अभाव में ट्रम्प को हर बिल पर डेमोक्रेट्स की कड़ी जाँच का सामना करना पड़ेगा। बजट, टैक्स और प्रमुख नीति प्रस्तावों को पारित कराने में अब गंभीर रुकावटें आने की संभावना है।
ट्रम्प के पास राष्ट्रपति वीटो का अधिकार है, पर डेमोक्रेट्स के पास सीनेट में दो‑तीहाई बहुमत है। इसका मतलब है कि उनका वीटो आसानी से उलटा जा सकता है, जिससे राष्ट्रपति की शक्ति सीमित हो जाएगी।
मिडटर्म परिणाम के बाद कई प्रमुख कमेटियों की अध्यक्षता डेमोक्रेट्स को मिल जाएगी। इससे ट्रम्प के करीबी अधिकारियों और उनके व्यापारिक हितों पर जांचें चलने की संभावना बढ़ गई है, विशेषकर वित्तीय खुलासे, क्रिप्टो वेंचर और स्टॉक ट्रेडिंग के मामलों में।
डेमोक्रेट्स के पास प्रतिनिधि सभा में बहुमत होने के कारण तीसरी बार महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की दहलीज पर हैं। यदि ऐसा होता है, तो ट्रम्प को अपने शेष दो साल के कार्यकाल में केवल प्रतीकात्मक भूमिका निभानी पड़ेगी।
ट्रम्प के व्यापारिक पोर्टफ़ोलियो पर भी दबाव बढ़ेगा। 2025 में उनके व्यवसाय से 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक आय दर्ज की गई थी, और डेमोक्रेट्स इस पर वित्तीय दस्तावेज़ों के आधार पर जांच का प्रस्ताव रख रहे हैं। साथ ही, ट्रम्प‑परिवार के क्रिप्टो वेंचर और स्टॉक डील्स को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
इन राजनीतिक बदलावों का भारत पर भी असर पड़ेगा। अमेरिकी टैरिफ नीति में संभावित बदलाव भारतीय निर्यातकों के लिए नई चुनौतियां या अवसर लाएगा। ट्रेड समझौते की बातचीत में अब ट्रम्प के एकतरफा दबाव की संभावना कम होगी, जिससे भारत को अधिक संतुलित शर्तों पर बातचीत करने का मौका मिल सकता है। इसके अलावा, डेमोक्रेट्स की बहुमत वाली कांग्रेस वीज़ा और इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव का समर्थन कर सकती है, जिससे H‑1B वीजा धारकों को लाभ मिल सकता है।
सारांश में, ट्रम्प अब “Lame Duck” राष्ट्रपति के रूप में देखे जा रहे हैं। उनके शेष दो साल में सीमित विधायी शक्ति, बढ़ती जांच और संभावित महाभियोग उन्हें पिछले दो सालों की तुलना में बहुत कम प्रभावी बनाएंगे।
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