3 नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने जा रहे हैं, जो राष्ट्रपति ट्रम्प की शक्ति और कांग्रेस में पार्टी के बहुमत को तय करेंगे।
इस चुनाव में लगभग 21 करोड़ पंजीकृत मतदाता मतदान करेंगे, और उनका निर्णय यह तय करेगा कि ट्रम्प की पार्टी संसद में अपना बहुमत बनाए रखेगी या डेमोक्रेटिक पार्टी को अधिक शक्ति मिलेगी।
मिडटर्म चुनाव हर दो वर्ष में राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच आयोजित होते हैं, जबकि राष्ट्रपति का चुनाव हर चार वर्ष में होता है। यह चुनाव न केवल निचले सदन के 435 सीटों को प्रभावित करता है, बल्कि सीनेट, गवर्नर पदों और राज्य विधायिकाओं पर भी असर डालता है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में सभी 435 सांसदों का कार्यकाल केवल दो वर्ष का होता है, इसलिए हर मिडटर्म चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव होता है।
सीनेट के 100 सीटों में सांसदों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है, पर चुनाव चरणबद्ध होते हैं—हर दो वर्ष में लगभग एक तिहाई (35) सीटों पर चुनाव होता है, जिससे राष्ट्रपति चुनाव के साथ कुछ सीटों पर एक साथ चुनाव होते हैं।
इसके अलावा, 36 राज्यों में गवर्नर, राज्य विधायिकाओं और स्थानीय पदों के चुनाव भी मिडटर्म का हिस्सा हैं, जिससे राज्य स्तर पर भी राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।
कांग्रेस का नियंत्रण राष्ट्रपति की नीतियों, बजट और विधायी एजेंडे को सीधे प्रभावित करता है। यदि विपक्षी दल किसी भी सदन में बहुमत हासिल कर लेता है, तो वे राष्ट्रपति के कार्यक्रम को बाधित कर सकते हैं और जांच शुरू कर सकते हैं।
रिपब्लिकन पार्टी ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत के साथ-साथ हाउस और सीनेट दोनों में मामूली बहुमत भी हासिल किया था। इस बहुमत ने ट्रम्प के निर्णयों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अगर रिपब्लिकन किसी भी सदन में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प की घरेलू नीति, आर्थिक योजनाएँ और बजट प्रस्तावों पर रोक लग सकती है। साथ ही, सीनेट में बहुमत से वे संघीय जज, सुप्रीम कोर्ट के जज, कैबिनेट मंत्रियों और राजदूतों की नियुक्ति आसानी से कर सकते हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी को निचले सदन में कम से कम तीन सीटें और सीनेट में चार सीटों की बढ़त की आवश्यकता है। एक बार बहुमत मिलने पर, वे ट्रम्प के कानूनों और बजट को रोकने, महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने और प्रशासन पर गहन जांच करने की शक्ति प्राप्त करेंगे।
वित्तीय रूप से, 2026 के मिडटर्म में कुल 2.77 अरब डॉलर के योगदान में से 1.67 अरब डॉलर रिपब्लिकन पक्ष को मिले, जो लगभग 60% है। डेमोक्रेटिक पक्ष को 83.2 करोड़ डॉलर मिले, जो कुल का 30% है। शेष 10% दोनों पक्षों और विशेष हितों के दाताओं से आया।
अमेरिकी राजनीति में बुजुर्ग नेताओं का दबदबा एक प्रमुख चर्चा विषय है। 88 वर्षीय रिपब्लिकन सांसद हैल रोजर्स और 93 वर्षीय सीनेटर चक ग्रासली अभी भी सक्रिय हैं, जबकि ट्रम्प 80 वर्ष के हैं और पूर्व राष्ट्रपति बाइडन 82 वर्ष के थे।
आर्थिक मुद्दे भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। महंगाई और बेरोजगारी के बावजूद, लोग ट्रम्प की टैरिफ नीतियों और विदेशी नीति को अपनी आर्थिक समस्याओं का मुख्य कारण मानते हैं। 2025 से 2026 तक वस्तुओं की कीमतें 5.5% बढ़ी हैं, जबकि मजदूरी भी इसी दर से बढ़ी है।
निर्दलीय मतदाता चुनाव के समीकरण को बदल सकते हैं। लगभग 44% वयस्क खुद को किसी पार्टी से नहीं जोड़ते, और उनमें से 52% डेमोक्रेट्स और 39% रिपब्लिकन्स का समर्थन करते हैं। 28% बदलाव के लिए वोट देने का इरादा रखते हैं।
इतिहास दर्शाता है कि मिडटर्म चुनावों में अक्सर राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान होता है। 2010 में ओबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी हार गई थी, जबकि 2018 में ट्रम्प की पार्टी ने हाउस में बहुमत हासिल किया।
वर्तमान में 50 में से 36 राज्यों में गवर्नर चुनाव चल रहे हैं, और राज्य विधानसभाओं में रिपब्लिकन 55% और डेमोक्रेटिक 43.8% सीटों पर नियंत्रण रखते हैं।
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