ड्रग तस्करी से निपटने के लिए देशभर में 22 और 23 सितंबर को नई दिल्ली में एएनटीएफ का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रमुख एकत्र होंगे।
एनसीबी की 2025 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत दो प्रमुख अवैध ड्रग उत्पादन क्षेत्रों के बीच स्थित है। एक तरफ गोल्डन क्रिसेंट—अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान—और दूसरी तरफ गोल्डन ट्राएंगल—म्यांमार, लाओस और थाईलैंड।
भारत दोनों दिशाओं से अवैध ड्रग प्रवाह से प्रभावित है। 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबी भूमि सीमा और 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री सीमा निगरानी को और जटिल बनाती है।
म्यांमार, नेपाल और बांग्लादेश से लगी सीमाओं के कई हिस्सों में कठिन भूभाग—घने जंगल, पहाड़ी क्षेत्र, रेगिस्तान और नदी‑वाले इलाके—निगरानी को मुश्किल बनाते हैं।
चुनौती सिर्फ तस्करी के रास्तों तक सीमित नहीं है। भारत अब केवल पारगमन वाला देश नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा घरेलू बाजार भी है। इसके अलावा देश में विशाल फार्मास्युटिकल विनिर्माण आधार और प्रीकर्सर केमिकल का उत्पादन होता है, जिनके गलत इस्तेमाल से सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध उत्पादन संभव है।
पंजाब के अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर जैसे जिले ड्रोन तस्करी के प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं। 305 मामलों में से 298 मामले अकेले पंजाब में दर्ज हुए।
इन ड्रोन से मुख्य रूप से हाई‑प्योरिटी हेरोइन और मेथामफेटामाइन की खेप भेजी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत‑पाकिस्तान सीमा अब इस हवाई तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है।
ड्रग तस्करी के तरीके भी बदल रहे हैं। 26 जून 2026 को जारी विजन डॉक्यूमेंट में ड्रोन से ड्रग्स गिराने, समुद्री रास्ते से कंटेनर कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो भुगतान, ऑनलाइन ऑर्डर‑टू‑डिलीवरी मॉडल और पार्सल जैसे तरीकों का जिक्र किया गया है।
तस्करी का नेटवर्क अब सिर्फ जमीन या सीमा तक सीमित नहीं है। तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी ड्रग्स की खरीद, भुगतान और सप्लाई का नेटवर्क बनाया जा रहा है।
एनसीबी ने 2025 में 30 अवैध सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़ किया, जो पिछले तीन वर्षों के कुल मामलों से भी अधिक है। इन लैब में मुख्य रूप से मेफेड्रोन, एफेड्रिन और अवैध साइकोट्रॉपिक टैबलेट बनाई जा रही थीं। महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश ऐसे नेटवर्क के प्रमुख केंद्र रहे।
एनसीबी ने 2025 में 77,773 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए, जिनकी कीमत करीब 3,889 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा 26 जून को शुरू किए गए ऑनलाइन ड्रग्स विनष्टीकरण पखवाड़े के तहत 2,09,500 किलोग्राम मादक पदार्थ, जिनकी कीमत 6,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई, नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया था।
गृह मंत्रालय के अनुसार, 2004‑2014 के बीच 26 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए, जिनका मूल्य 40,000 करोड़ रुपये था। 2014‑2026 के बीच यह आंकड़ा 1.18 करोड़ किलोग्राम और 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा।
मादक पदार्थों को नष्ट करने के मामले में 2004‑2014 के बीच 3,26,000 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए, जिनका मूल्य 8,000 करोड़ रुपये था। 2014‑2026 के बीच यह आंकड़ा 42,47,000 किलोग्राम और 89,896 करोड़ रुपये रहा।
अवैध अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई में 2020 में 10,000 एकड़ और 2025 में 42,282 एकड़ अवैध अफीम की फसल नष्ट की गई।
इसी अवधि में 2004‑2014 के बीच 1,73,000 मामले दर्ज हुए और 1,95,000 गिरफ्तारियां हुईं। 2014‑2026 के बीच 8,75,000 मामले दर्ज हुए और 10,97,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
नारकोटिक्स नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026‑2029 में ड्रग तस्करी से निपटने के लिए अगले तीन साल का रोडमैप तैयार किया गया है। इसका फोकस सिर्फ तस्करों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर केमिकल पर नियंत्रण, नशे की मांग कम करने और एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने पर है।
4 अगस्त को लोकसभा में गृह मंत्रालय ने बताया कि एनसीबी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड संचार और डार्कनेट के जरिए होने वाली ड्रग तस्करी की पहचान के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ले रहा है।
अधिकारियों को डिजिटल फॉरेंसिक, डार्कनेट निगरानी और क्रिप्टोकरेंसी जांच की ट्रेनिंग दी गई है। 2026‑29 के विजन डॉक्यूमेंट में सभी एएनटीएफ में डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी सेल बनाने व आधुनिक तकनीक और एआई आधारित विश्लेषण के इस्तेमाल की योजना बताई गई है।
विजन डॉक्यूमेंट में नशे की मांग कम करने के लिए ड्रग‑फ्री जोन, जागरूकता अभियान और माता‑पिता, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों तथा युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया गया है।
लोकसभा में दिए जवाब के मुताबिक शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर तक ड्रग‑फ्री कैंपस बनाने और केंद्रीय वित्त पोषित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र कल्याण कार्यक्रम के तहत सहमति आधारित स्क्रीनिंग की प्रस्तावित व्यवस्था भी विजन डॉक्यूमेंट में शामिल है।
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