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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाक़े में रविवार दोपहर एक इमारत ढह गई, जिसमें पीजी चल रहा था और बच्चे रह रहे थे.
हादसा मोती बाग़-2 स्थित शिव मंदिर के पास हुआ. इमारत के मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.
घटनास्थल पर पहुंचे बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया, "कुछ स्टूडेंट अंदर से फ़ोन भी कर रहे हैं और लगता है कि अभी भी कुछ और लोग अंदर फंसे हुए हैं."
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "यह बेहद दुखद घटना है. स्टूडेंट अलग-अलग जगहों से यहां पढ़ने आते हैं और इस इमारत में पीजी में रहते हैं. इमारत गिर गई है. यह बताना मुश्किल है कि अंदर पांच, दस या बीस स्टूडेंट हैं, लेकिन इतना तय है कि स्टूडेंट अंदर फंसे हुए हैं. बचाव अभियान जारी है."
अनिल शर्मा ने बताया कि 'अब तक दो स्टूडेंट को बचाया गया है.'
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, दिल्ली अग्निशमन विभाग को दोपहर करीब 1.30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली, सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया.
फ़िलहाल मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है.
हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए हैं, इसकी अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
़, दमकल विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि पांच दमकल गाड़ियों और पुलिस की टीमों को मौके पर भेजा गया है और बचाव अभियान जारी है.
घटना के बाद आपातकालीन कर्मचारी मौके पर पहुंचे और यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि कितने लोग फंसे हुए हैं और कितना नुकसान हुआ है.
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जिस समय इमारत ढही, इलाक़े में एक ज़ोर का धमाका सुनाई दिया.
पड़ोस की ही एक दुकान में बैठे एक चश्मदीद स्टूडेंट ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि धमाके की आवाज़ सुनते ही सारे लोग बाहर भागे.
उसने कहा, "अचानक भूकंप जैसी आवाज सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे. यहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर गई थी. कुछ शव बरामद किए गए हैं और चार बच्चों को भी बचाया गया है, जो सांस ले रहे थे."
"अभी भी मलबे के अंदर से आवाजें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं, "हमें बचाओ, हमें बचाओ!"... कम से कम 25-30 बच्चे हैं. यहां पास में लड़कों और लड़कियों के लिए पीजी था. 4-5 लोगों को बचाया गया है, उनका बचना मुश्किल है लेकिन सांसें चल रही हैं. 2-3 शव बरामद किए गए हैं और आगे भी शव मिलने की आशंका है."
उस स्टूडेंट ने बताया कि इस इमारत के बेसमेंट में रेनोवेशन का काम चल रहा था.
"इन इमारतों को 100 साल की लीज पर दिया गया है. अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए वे लोग नीचे बेसमेंट बना रहे थे. उन्होंने ऊपर की बिल्डिंग मजबूत कर दी, लेकिन नीचे के पिलर कमज़ोर थे. जिसकी वजह से वह बिल्डिंग गिरी है."
उस स्टूडेंट ने बताया, "बेसमेंट में कई मज़दूर काम कर रहे थे वो सभी दब गए हैं. साथ ही बिल्डिंग के सामने फल वगैरह बेचने वाले रेहड़ी पटरी वाले भी थे वो भी दब गए हैं."
एक अन्य चश्मदीद स्टूडेंट ने एएनआई को बताया, "ये 'हॉस्टल डेज़' नाम की बिल्डिंग है. इसके ठीक बगल में एक और पीजी की इमारत भी गिर गई है. 'हॉस्टल डेज' लड़कों के लिए बना पीजी है. यह पांच मंजिला इमारत थी. इसके बगल वाली इमारत भी गिर गई है. इसके बगल में दो और इमारतें हिल रही थीं. इनमें भी पीजी चलता है. मलबे से इनके एंट्रेस ब्लॉक हो गए हैं."
"जितने बच्चे अपने कमरों के अंदर थे, वे सभी मलबे में दब गए. मलबे में फंसे बच्चों की सही संख्या रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड देखने के बाद ही पता चलेगी. इमारत गिरने के बाद से करीब 15-20 मिनट से दमकल और बचाव दल मौके पर काम कर रहे हैं. कई बच्चों को जैसे तैसे खींच खींच कर वे बाहर निकाल रहे हैं."
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कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने आशंका ज़ाहिर की है कि इमारत के मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय के कई स्टूडेंट दबे हो सकते हैं.
एनएसयूआई ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में इमारत गिरने की ख़बर बेहद चिंताजनक है. ख़बरें आ रही हैं कि डीयू के स्टूडेंट मलबे में फंसे हुए हैं."
"स्टूडेंट और आम लोगों की सुरक्षा के साथ लापरवाही किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. डीयू प्रशासन और सरकार को तुरंत युद्ध स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू करना चाहिए, हर स्टूडेंट और व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना चाहिए और इस घटना की निष्पक्ष जांच कर ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना चाहिए."
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"स्टूडेंट की जान के साथ लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मोदी जी, आप स्टूडेंट की बात करने के लिए बड़े मंचों पर जाते हैं, लेकिन जब स्टूडेंट की सुरक्षा और उनकी जान का सवाल आता है, तो सरकार उन्हें भूल जाती है."
"केंद्र में बीजेपी की सरकार, दिल्ली में बीजेपी की सरकार, एमसीडी में बीजेपी का मेयर, जब सब कुछ आपका है, तो स्टूडेंट की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी कौन लेगा? आखिर कब तक स्टूडेंट को लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी?"
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