एआई बूम के कारण मेमोरी चिप्स की भारी कमी हो गई है। ऐसे में चीनी कंपनियां कबाड़ हो चुके पुराने स्मार्टफोन्स की मेमोरी चिप (DRAM) निकालकर नए फोन्स में लगा रही हैं। हालांकि इससे फोन सस्ते जरूर हो जाएंगे, लेकिन इनके हैंग या खराब होने का बड़ा खतरा हमेशा बना रहेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते चलन ने टेक जगत में एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। एआई डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण दुनिया भर में मेमोरी चिप्स (Memory Chips) की भारी किल्लत हो गई है। इस संकट से निपटने के लिए चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं ने एक ऐसा जुगाड़ निकाला है, जो ग्राहकों के लिए सिरदर्द बन सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी कंपनियां अब अपने नए स्मार्टफोन्स में कबाड़ हो चुके फोन्स और कंप्यूटरों से निकाली गई पुरानी मेमोरी चिप (DRAM) का इस्तेमाल कर रही हैं।
बाजार अनुसंधान फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, चीनी स्मार्टफोन निर्माता मुख्य रूप से अपने एंट्री-लेवल मॉडल्स में रिसाइकल्ड DRAM का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। यहां तक कि कुछ कंपनियां अपने सस्ते फोन्स के लिए पूरी तरह से सेकंड-हैंड सप्लाई पर निर्भर होने पर विचार कर रही हैं। कंपनियां 5-6 साल पुरानी चिप्स को नष्ट करने के बजाय उन्हें रिसायकल कर नए फोन्स में लगा रही हैं। कंपनियां ऐसे चिप्स को अगले 5-6 साल तक और चलने की कोशिश कर रही हैं।
कबाड़ हो चुके फोन और कंप्यूटर के मदरबोर्ड से मेमोरी चिप्स को बड़ी सावधानी से निकाला जाता है। चीन के शेन्जेन स्थित देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार, हुआकियांगबेई में इन पुरानी चिप्स का एक बड़ा ट्रेडिंग मार्केट पनप गया है। इन निकाली गई चिप्स को साफ किया जाता है, सोल्डर के अवशेष हटाए जाते हैं और फिर से तैयार करके नए पुर्जों की कीमत के 40% से 60% दामों पर बेच दिया जाता है। यह चिप्स सस्ते स्मार्टफोन के अलावा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कार के उपकरणों में भी लगाई जा रही हैं।
इस जुगाड़ का सबसे बड़ा खतरा डिवाइस की विश्वसनीयता पर है। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के शोधकर्ताओं ने पाया है कि चिप जितनी पुरानी होती है, उसमें डेटा सुरक्षित रखने की क्षमता उतनी ही कम हो जाती है। इसके अलावा, एक सर्किट बोर्ड से चिप को निकालने और दूसरे पर लगाने की प्रक्रिया में जो गर्मी पैदा होती है, वह भी चिप के पुर्जों को कमजोर कर देती है। अगर किसी स्मार्टफोन में ऐसी खराब चिप लगी है, तो वह फोन हैंग हो सकता है, बिना किसी चेतावनी के अचानक चलते-चलते बंद हो सकता है या पूरी तरह डेड हो सकता है।
सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी प्रमुख चिप निर्माता कंपनियां इस समय अपना पूरा फोकस एआई डेटा सेंटर्स के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) बनाने पर लगा रही हैं। इसके चलते स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल होने वाली LPDDR4 और LPDDR5 जैसी लो-पावर DRAM की भारी कमी हो गई है और इनकी कीमतें पिछले साल के मुकाबले तीन गुना तक बढ़ गई हैं।
सस्ते फोन्स पर निर्भर रहने वाली शाओमी, ओप्पो और वीवो जैसी चीनी कंपनियों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, तीसरी तिमाही में शाओमी की ग्लोबल मार्केट हिस्सेदारी गिरकर 12% रह गई है, जबकि ओप्पो और वीवो की शिपमेंट में 20% से ज्यादा की गिरावट आई है। बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर न डालना पड़े, इसलिए ये कंपनियां अब पुरानी और सस्ती चिप्स की ओर बढ़ रही हैं।
चिप का यह संकट अगले साल तक जारी रहने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है, तो रीसाइकिल की गई RAM की मांग और बढ़ सकती है। लेकिन पुरानी चिप कितने समय तक और किस तरह इस्तेमाल हुई है, इसकी पूरी जानकारी मिलना मुश्किल है। ऐसे में उसकी गुणवत्ता और लंबे समय तक चलने की क्षमता की गारंटी देना भी आसान नहीं है।
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