अजय कुमार पांडेय, संवाददाता, मुजफ्फरपुर। नेपाल में आए जल प्रलय के बाद उत्तर बिहार पर इसके असर पर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार जल प्रलय का असर उत्तर बिहार की सिंचाई, विकास तथा महत्वाकांक्षी सड़क और रेल परियोजनाओं पर पड़ने की आशंका है। पनबिजली परियोजनाओं के लिए जल प्रलय खतरा बन सकता है। इसके अलावा, गंडक, राप्ती और घाघरा नदी में गाद भरने से इन इलाकों में हर साल बाढ़ की विभीषिका और अधिक गहराने की आशंका है।
जाने-माने जल प्रबंधन विशेषज्ञ दिनेश कुमार मिश्र कहते हैं कि नेपाल में कई शताब्दियों से जल प्रलय सामान्य बात है। लेकिन, इस बार जो दृश्य दिख रहा, वह अभूतपूर्व है। गाद मिश्रित पानी के बहाव का नेपाल के निचले हिस्सों के अलावा गंडक के दोनों किनारों की बसावट पर निश्चित तौर पर असर पड़ेगा। इससे बिहार के साथ ही यूपी का भी बड़ा भूभाग प्रभावित होगा। मैदानों तक गाद पहुंचने से गंडक का तल काफी ऊपर हो जाएगा। इससे पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले की लाखों हेक्टेयर जमीन हर साल बाढ़ झेलने को मजबूर होगी। इसका कारण वाल्मीकिनगर और बगहा के पास नदी का उत्तर दिशा में मुड़ना है। नदी के दक्षिण की तरफ के जिलों गोपालगंज और सारण पर थोड़ा कम असर पड़ेगा।
गोपालगंज। नेपाल के रसुआ जिले में आई बाढ़ के कारण बराज के पानी में गाद बढ़ गया। इससे वाल्मीकिनगर बराज से सारण मुख्य नहर में पानी का बहाव पूर्ण रूप से रोक दिया गया। इसका असर खेतों की सिंचाई पर पड़ेगा। जानकारी के अनुसार नेपाल के रसुआ जिले से गंडक नदी में अचानक आई बाढ़ के चलते पानी में तीन पीपीएम तक गाद बढ़ गया था। इस पानी का बहाव सारण मुख्य नहर में होने से एक सप्ताह में तलहट्टी में पांच से छह फीट तक गाद भर जाता।
जिससे हमेशा के लिए नहर में पानी का बहाव बंद होने का खतरा मंडरा रहा था। जिसके बाद जल संसाधन विभाग ने सारण मुख्य नहर सहित सभी नहरों में गाद भरने तक पानी का बहाव बंद करने का निर्णय लिया। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ का प्रकोप कम होने व गाद बैठ जाने के बाद एक-एक कर सभी नहरों में एक बार फिर पानी का बहाव शुरू करने की तैयारी है।
दिनेश मिश्र का कहना है कि नदी में गाद का असर इससे निकलने वाली तीन प्रमुख नहरों तिरहुत, त्रिवेणी और दोन कैनाल पर भी पड़ेगा। त्रिवेणी नहर पर बने कोतराहा पनबिजली की तीन यूनिटों को पानी मिलना बंद हो सकता है। इससे बिजली उत्पादन ठप होने की स्थिति बन सकती है। ऐसी ही स्थिति पश्चिमी गंडक नहर पर बने सूर्यपुरा पनबिजली घर को लेकर पैदा हो सकती है। नहरों में गाद भरने से उनके अंतिम सिरे तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
नेपाल और उत्तर बिहार की नदियों पर हाल ही में शोध कर चुके आईआईटी के पूर्व छात्र अमन तेजस्वी कहते हैं कि गंडक नदी में गाद भरने से उसकी धारा की दिशा बदलेगी। इसका सीधा असर गोरखपुर-सिलीगुड़ी सिक्सलेन पर पड़ सकता है। नदी की धारा में बदलाव के अनुसार सड़क का अलाइनमेंट बदलना पड़ सकता है। इससे परियोजना में देरी के साथ ही उसकी लागत भी बढ़ेगी।
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