पंजाब में नशा‑विरोधी आवाज़ उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने इस राज्य में समान कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर फिर से चर्चा को भड़काया है। झोटा मानसा में नशा‑विक्रेताओं को चुनौती देते हुए सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बनाते थे। उनकी हत्या से पहले, इसी तरह के अभियान में शामिल चार लोगों की भी जान गई थी, जिनके मामलों में अक्सर नशा‑तस्करों के खिलाफ विरोध को कारण बताया गया।
राम गोपाल (जालंधर, जनवरी 2023) – लखनपाल गांव के नंबरदार और नशा‑विरोधी फ्रंट के सदस्य राम गोपाल पर 28 जनवरी को इनोवा गाड़ी से आए हमलावरों ने लकड़ी के पटरे से हमला किया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि यह हमला नशा तस्करी के विरोध के कारण हुआ।
हरभगवान सिंह (फरीदकोट, अगस्त 2023) – ढिलवां गांव के एंटी‑ड्रग एक्शन कमेटी के सदस्य हरभगवान सिंह को तब गोली मारी गई जब वे नशा बेचने वाले एक संदिग्ध के घर में हस्तक्षेप करने पहुंचे। उनकी पत्नी और बच्चों को गाँव छोड़ना पड़ा। पुलिस ने इस हत्या को नशा‑तस्करी के विरोध से जोड़ कर जांच शुरू की, लेकिन अंतिम निष्कर्ष अभी तक स्पष्ट नहीं है।
जसवीर सिंह (बठिंडा, सितंबर 2023) – सिधाना गांव में नशा‑विरोधी एक्शन कमेटी के सदस्य जसवीर सिंह को दो बाइक सवारों ने लोहे की रॉड से हमला किया, जब वह रात में गाँव की पहरेदारी कर रहे थे। पुलिस ने संदिग्धों की गिरफ्तारी की सूचना दी, पर यह मामला भी नशा‑तस्करों के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाता है।
मोहिंदर सिंह (जालंधर, मार्च 2026) – बुट्टे दीआ छन्ना गांव के सरपंच और किसान सभा के नेता मोहिंदर सिंह पर 28 फरवरी को हमला हुआ, जिससे सिर पर गंभीर चोटें लगीं और 6‑7 मार्च की रात उन्हें मौत का सामना करना पड़ा। उन्होंने हेरोइन की बिक्री के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया, पर मामले की पूरी सच्चाई अभी भी जांच के अधीन है।
परविंदर सिंह झोटा (मानसा, अक्टूबर 2026) – 13 अक्टूबर को नशा‑विरोधी कार्यकर्ता झोटा पर गोलीबारी हुई, जिसमें उनका एक सहयोगी भी गंभीर रूप से घायल हुआ। घटना से पहले झोटा ने एक मेडिकल स्टोर मालिक पर सिंथेटिक ड्रग्स बेचने का आरोप लगाया था। सीबीआई ने इस मुद्दे की जांच के लिए अपील की थी, पर आरोपी अभी तक पकड़ा नहीं गया।
इन पाँच मामलों के अलावा, गुलजार सिंह (संगरूर, सितंबर 2026) और सिमरनजीत सिंह (फगवाड़ा, मई 2026) की भी मौतें चर्चा में आईं, पर उनकी हत्या को नशा‑विरोधी कारणों से सीधे जोड़ना कठिन रहा।
सभी घटनाओं में एक सामान्य धारा यह है कि कई मृतक स्थानीय स्तर पर नशा‑विक्रय को रोकने, तस्करों का विरोध करने या नशा‑विरोधी समितियों में सक्रिय थे। हालांकि परिवार और ग्रामीणों ने अक्सर नशा‑तस्करी के खिलाफ आवाज़ उठाने को कारण बताया है, लेकिन हर मामले में हत्या के पीछे का वास्तविक मकसद तय करने के लिए ठोस साक्ष्य और न्यायिक निर्णय आवश्यक हैं।
परविंदर झोटा की हत्या के बाद अब कुल पाँच नशा‑विरोधी कार्यकर्ताओं की मौतें एक श्रृंखला में जुड़ गई हैं, जबकि पंजाब पुलिस पर आरोपियों को पकड़ने में तेज़ी लाने का दबाव बढ़ गया है।
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