मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में सक्रिय है। जम्मू‑कश्मीर से उत्तराखंड तक पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानों में तेज़ बारिश जारी है, जिससे तापमान 10 °C तक गिर गया है।
केदारनाथ मार्ग में लगातार दूसरे दिन भूस्खलन हुआ। एक बच्ची की मृत्यु हुई और 1,500 से अधिक श्रद्धालु मलबे में फँस गए; उन्हें मुश्किल से निकाल कर गौरीकुंड तक पहुँचाया गया।
विभाग ने बताया कि उत्तरी अंडमान‑सागर और म्यांमार तट के बीच बना गहरा निम्न दबाव पिछले 6 घंटों में 13 km/h की गति से उत्तर‑उत्तर‑पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। 28 सितंबर को रात 19:30‑21:30 के बीच यह क्षेत्र क्यैकटो के पूर्व में म्यांमार तट को पार कर गया, जहाँ हवा की गति 50‑60 km/h रही।
अगले दो दिनों में यह निम्न दबाव तटीय म्यांमार, पूर्वी बंगाल की खाड़ी और दक्षिण‑पूर्वी बांग्लादेश में भी उत्तर‑उत्तर‑पश्चिम की ओर बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश में दबाव कमजोर हो गया है, पर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है; एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है।
इन परिस्थितियों के कारण आज (सोमवार) उत्तराखंड, जम्मू‑कश्मीर, हिमाचल, राजस्थान, बिहार और अंडमान‑निकोबार में गरज के साथ बौछारें पड़ीं। मराठवाड़ा, ओडिशा, पूर्वी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी हल्की बारिश दर्ज हुई।
मौसम विभाग ने कहा कि उत्तर‑पश्चिम सहित पूर्वी भारत के नौ से अधिक राज्यों में मंगलवार को आंधी‑तूफान के साथ बारिश होगी, जबकि बुधवार से मौसम में राहत की उम्मीद है, लेकिन उमस बढ़ सकती है।
हिमाचल प्रदेश में किन्नौर, लाहौल‑स्पीति और चंबा के ऊँचे क्षेत्रों में लगातार तीसरे दिन बर्फबारी जारी है, जबकि शिमला, धर्मशाला सहित कई जिलों में बादल बरसे। अधिकतम तापमान में 8‑10 °C की गिरावट के कारण ठंडक बढ़ी है, 61 सड़कों पर आवाजाही बंद, 49 बिजली ट्रांसफॉर्मर भी बंद रहे।
उत्तराखंड की व्यास घाटी में आदि कैलाश‑नाभीढांग‑कुटी में दो‑पाँच फ़ीट बर्फ की सफ़ेद चादर बिछ गई, जिससे यात्रा मार्ग बंद हो गया। बर्फ की चादर से पर्यटकों का उत्साह बढ़ा, पर फसलों को संभावित नुकसान की चिंता ग्रामीणों में बढ़ी।
बिहार में गंडक, कोसी और बागमती नदियों का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर पहुंच गया है। सुपौल और पश्चिम चंपारण में लगभग 82 हज़ार लोग प्रभावित हुए हैं, कई नदियों का उफान जारी है।
नेपाल में लगातार बारिश के कारण बांगलुंग में नगरपालिका भवन ढह गया; नदी के कटाव से इमारत जल में समा गई। नारायणी नदी में एक क्रूज शिप की रस्सी टूट गई, शिप लगभग 100 m तक बहकर पुल के पिलर से टकरा गई। बाढ़ की स्थिति फिर से विकराल हो गई है।
आईएमडी के अनुसार, जम्मू के आसपास बना पश्चिमी विक्षोभ अगले 36 घंटों में पहाड़ों से आगे निकल जाएगा। उसके बाद मंगलवार से निचले स्तरों पर तेज उत्तर‑पश्चिमी हवाएँ चलेंगी, जिससे मौसम साफ़ हो जाएगा।
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