लखनऊ के रवींद्रपल्ली में साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट में फंसी बुजुर्ग महिला कमरे में बंद रहीं और चोर घर से लाखों के जेवर व नकदी चोरी कर ले गए। ठगी का पता चलने पर जब वह दूसरे कमरे में पहुंची तो चोरी की जानकारी हुई। रत्ना कौल अकेले रहती हैं। 13 अगस्त से 17 तक वह साइबर जालसाजों की गिरफ्त में रहीं इसी दौरान 14 अगस्त की दोपहर चोर बाउंड्री फांदकर घर में घुस गए। रत्ना ने चोरों की आहट सुनी, लेकिन डिजिटल अरेस्ट के डर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं।
चोरों ने दूसरे कमरे में अलमारी का लॉकर तोड़कर दो लाख रुपये नकद और लाखों रुपये के जेवर चोरी कर लिए। 20 अगस्त को जब साइबर ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने कॉल काटी, तब जाकर दूसरे कमरे में गईं। वहां अलमारी टूटी देख चोरी का पता चला। पीड़िता ने 21 अगस्त को गाजीपुर थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राजधानी में साइबर जालसाजों ने मर्चेंट नेवी के रिटायर कैप्टन और एक बुजुर्ग महिला को वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर करीब 1.30 करोड़ रुपये ठग लिए। जालसाजों ने खुद को एटीएस, CBI, ईडी और दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर पीड़ितों को मानव तस्करी और मनी लांड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी। पांच दिन तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखकर बुढ़ापा जेल में कटने का डर दिखाया। घबराए पीड़ितों ने एफडी और बैंक से रकम निकाल जालसाजों के खातों में ट्रांसफर कर दी। बाद में ठगी का एहसास होने पर साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
पहला मामला इंदिरानगर के रवींद्रपल्ली हरिनगर का है। 75 वर्षीय रत्ना कौल के पति अजय कौल का 26 फरवरी 2009 में निधन हो चुका है। रत्ना ने बताया कि 13 अगस्त की दोपहर करीब 3 बजे व्हाट्सऐप पर कॉल आई। कॉलर ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर कहा कि आप अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और मनी लांड्रिंग गिरोह के लिए काम कर रही हैं। आपके आधार कार्ड से केनरा बैंक मुंबई में खाता संचालित हो रहा है। रत्ना ने इनकार किया तो जालसाज ने CBI अधिकारी बनकर मुंबई जेल भेजने की धमकी दी। रत्ना ने उम्र का हवाला देकर माफी मांगी। इस पर जालसाज ने कहा कि उम्र का लिहाज कर जांच कर रहे हैं। आपके बैंक और डाकघर खातों की जांच होगी। क्लीन चिट मिली तो पूरी रकम वापस हो जाएगी, नहीं तो बुढ़ापा जेल में कटेगा।
आरोपियों ने जांच पूरी होने तक किसी से बात न करने की चेतावनी दी, धमकाया कि किसी को बताया तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा। रत्ना ने पीएनबी और एसबीआई की तीन एफडी तुड़वाकर रकम बचत खाते में ट्रांसफर की। इसके बाद वीडियो कॉल पर निगरानी रखते हुए 78.50 लाख रुपये जालसाजों ने बताए खातों पर ट्रांसफर करा लिए। जालसाजों ने भरोसा जीतने के लिए सुप्रीम कोर्ट और पुलिस विभाग की मोहर लगे फर्जी वारंट और दस्तावेज भी भेजे। डिमांड बढ़ने पर 18 अगस्त को रत्ना ने कॉल काट दी और साइबर क्राइम थाने में तहरीर दी।
दूसरा मामला गोमतीनगर के विश्वासखंड-3 का है। यहां 69 वर्षीय रिटायर मर्चेंट नेवी कैप्टन मोहन लाल आहूजा सिक्किम के मरीन नेवी कॉलेज में प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत हैं। 16 अगस्त को उनके पास कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर जितेंद्र त्रिपाठी बताते हुए कहा कि आपके आधार पर नया सिम और डेबिट कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल गैर कानूनी गतिविधियों में हुआ है। आपके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी है।
मोहन लाल ने खुद को रिटायर कैप्टन बताते हुए इनकार किया तोे जेल भेजने की धमकी दी। गिड़गिड़ाने पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट से कार्रवाई रुकवाने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। इसके बाद एटीएस पुणे और ईडी का अधिकारी बनकर धमकाया। पांच दिन तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा। वे किसी तरह 19 अगस्त की रात सिक्किम से लखनऊ लौटे।
इसी दौरान जांच के नाम पर 20 अगस्त को दो अलग-अलग खातों में 52 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। अंत में परेशान होकर साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। साइबर क्राइम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर खातों की जांच और कॉल डिटेल निकलवाना शुरू कर दिया है।
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने बताया कि कोई भी एजेंसी अथवा पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है न कर सकती है। ऐसे मामलों में सजगता ही बचाव है। इस लिए हम अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करते हैं। डिजिटल अरेस्ट का कहीं कोई प्रावधान ही नहीं है।
- इंस्पेक्टर साइबर क्राइम सेल अमर सिंह ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार हो जाने पर तुरन्त हेल्पलाइन नम्बर 1930 पर फोन करें। हेल्पलाइन से जो भी सवाल पूछे जाये, सही बताना चाहिये। cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है।
- ऐसी काल आती है तो घबराये नही CBI, ईडी, कस्टम या पुलिस आपको वीडियो काल पर गिरफ्तार नहीं करते हैं।
- घबराएं नहीं स्थिति का आकलन करने के लिए कुछ समय लें और अपने परिजनों से जानकारी जरूर साझा करें।
एयरपोर्ट के पूर्व निदेशक और उनकी पत्नी को जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट कर 70 लाख ठगे।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय बहादुर यादव की एडिटेड फोटो लगाकर जालसाजों ने फोन कर 40 दिन तक फोन कर डिजिटल अरेस्ट की कोशिश।
सेवानिवृत्त एफसीआई अफसर और उनकी पत्नी को 18 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 42.09 लाख रुपये ठग लिए।
साइबर हैकर्स ने यूपी विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) की आधिकारिक वेबसाइट upssf.in को हैक कर लिया। जानकारी पर साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यूपीएसएसएफ मुख्यालय के मीडिया सेल प्रभारी उपनिरीक्षक राहुल यादव ने बताया कि वेबसाइट पर संदिग्ध गतिविधियां और अनधिकृत परिवर्तन पाए गए। उन्होंने एडीसीपी क्राइम किरन यादव से शिकायत की। साइबर थाना पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
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