खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुछ शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बच्चों के मन में सवाल पैदा करते हैं। वे विद्यार्थियों को किताबों से आगे सोचने, प्रयोग करने और अपने सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं। बेगूसराय की शिक्षिका प्रभा कुमारी भी ऐसी ही शिक्षिका हैं। विज्ञान की पढ़ाई को प्रयोग और जिज्ञासा से जोड़कर विद्यार्थियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने वाली प्रभा कुमारी अब राज्य स्तर पर सम्मानित होने जा रही हैं।
राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चयन
प्रभा कुमारी का चयन राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें सम्मानित करेंगे। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी चयन सूची में बिहार के 38 शिक्षक-शिक्षिकाओं को इस सम्मान के लिए चुना गया है। इस सूची में 37वें स्थान पर बेगूसराय के डंडारी प्रखंड स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय कटहरमाला की शिक्षिका प्रभा कुमारी का नाम शामिल है। उनके चयन से जिले के शिक्षा जगत में भी खुशी का माहौल है।
खुद पढ़ीं, फिर बच्चों को पढ़ने का हौसला दिया
प्रभा कुमारी की कहानी सिर्फ एक शिक्षक के पुरस्कार तक सीमित नहीं है। उनकी अपनी शैक्षणिक यात्रा भी काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने एमएससी, बीएड, एमएड और पीएचडी की उपाधियां हासिल की हैं। इसके अलावा उन्होंने नेट, यूजीसी, एसटीईटी, सीटीईटी, दक्षता और बीपीएससी जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की हैं। एसएम महिला कॉलेज और केंद्रीय विद्यालय आईओसीपीएल समेत कई शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक कार्य करने के बाद वर्तमान में वह कटहरमाला उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय में विज्ञान शिक्षिका के रूप में विद्यार्थियों को पढ़ा रही हैं।
कक्षा में सिर्फ ब्लैकबोर्ड नहीं, सवाल भी पैदा करती हैं
प्रभा कुमारी की शिक्षण शैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह बच्चों को केवल किताबों के तथ्यों को याद कराने पर भरोसा नहीं करतीं। उनकी कोशिश रहती है कि विद्यार्थी हर विषय को समझें और क्यों, कैसे और क्या होगा जैसे सवाल पूछें।
विज्ञान की शिक्षिका, साहित्य से भी गहरा लगाव
प्रभा कुमारी की रुचि केवल विज्ञान तक सीमित नहीं है। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय रुचि रही है और उनकी कई रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका मानना है कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब उनमें वैज्ञानिक सोच के साथ कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता और अपनी बात कहने की क्षमता भी विकसित हो। इसी सोच के साथ वह विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों में भी हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करती हैं।
सम्मान सिर्फ प्रभा का नहीं, बच्चों की मेहनत का भी
राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रभा कुमारी के चयन की खबर से बेगूसराय के शिक्षा जगत में खुशी है। इस सम्मान को उनकी वर्षों की मेहनत, सीखने की ललक और विद्यार्थियों के साथ किए गए कार्यों की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। शिक्षक दिवस पर जब राज्यस्तरीय मंच पर मुख्यमंत्री के हाथों उन्हें सम्मान मिलेगा, तो यह उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बढ़कर होगा। यह उन तमाम विद्यार्थियों की मेहनत और सपनों का भी सम्मान होगा, जिन्हें प्रभा कुमारी ने किताबों से आगे देखने और सवाल पूछकर सीखने का हौसला दिया है। बेगूसराय की इस विज्ञान शिक्षिका की उपलब्धि जिले के हजारों बच्चों के लिए भी एक संदेश है कि सीखने की कोई सीमा नहीं होती। एक अच्छा शिक्षक सिर्फ पढ़ाता नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर आगे बढ़ने की इच्छा और कुछ नया करने का जज्बा भी पैदा करता है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!