यूपी के बदायूं में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर बवाल हो गया। ग्राम समाज की जमीन पर प्रतिमा लगाने से रोकने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासनिक टीम पर पथराव कर दिया। पुलिस ने भी लाठीचार्ज कर लोगों को खदेड़ा। इस दौरान एसडीएम की गाड़ी समेत पुलिस के कई वाहन, बाइक और एंबुलेंस सहित 12 गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। एक अधिवक्ता और 15 से अधिक पुलिसकर्मी चोटिल हुए, जबकि एसडीएम बाल-बाल बचीं। पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में लिया है।तनाव को देखते हुए सात थानों की पुलिस और पीएसी की एक प्लाटून तैनात की गई है।
मामला फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र के राजा की सीकरी गांव का है। मंगलवार तड़के शाहबाद रोड स्थित ग्राम समाज की करीब सात बीघा जमीन, जो राजस्व अभिलेखों में खलिहान दर्ज है, पर प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास किया गया। सूचना पर चौकी प्रभारी जगमेंद्र बालियान पुलिस बल के साथ पहुंचे और प्रतिमा स्थापना रुकवा दी। इसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
ग्रामीणों का आरोप था कि गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों ने पहले से लगी बाबा साहेब की प्रतिमा गिरा दी। इसके विरोध में ग्रामीण और भीम आर्मी से जुड़े लोग जुट गए। उन्होंने प्रतिमा उसी स्थान पर दोबारा स्थापित करने और बाबा साहेब के नाम पर पार्क विकसित करने की मांग को लेकर आसफपुर-शाहबाद मार्ग पर जाम लगा दिया।
एसडीएम प्रियंका गोयल और सीओ अंशुमान श्रीवास्तव ने ग्रामीणों से कई दौर की वार्ता की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। शाम को एडीएम प्रशासन अरुण कुमार और एसपी देहात हृदेश कठेरिया भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की अपील के बावजूद प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पथराव शुरू कर दिया। पथराव में अधिवक्ता प्रदीप उपाध्याय, एसडीएम बिसौली अर्लदी हरविलास, हेड कांस्टेबल हिटलर खान समेत 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
मामले में समाधान के लिए एसपी देहात हृदेश कठेरिया के नेतृत्व में दलित अफसरों को लगाया गया। इनमें इंस्पेक्टर मनोज कुमार, इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह, इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार, इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र को लगाया गया है। हालांकि 14 घंटे से अधिक के प्रयास के बाद भी प्रदर्शनकारी जिद पर अड़े रहे।
प्रतिमा स्थापना की तैयारी एक सप्ताह से चलने के बावजूद पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। मामला सामने आने के बाद कई थानों की पुलिस और पीएसी तैनात करनी पड़ी। डीएम अवनीश राय व एसएसपी अंकिता शर्मा देर रात गांव पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार, आंबेडकर अनुयायियों ने आपस में धन एकत्र कर करीब एक सप्ताह पहले प्रतिमा मंगाई थी। इसके बाद प्रतिमा स्थापना की तैयारी के लिए आसपास के ईंट-भट्टों से ईंट, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री भी जुटाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी तैयारियों के बावजूद स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी भनक नहीं लगी। मंगलवार तड़के प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास शुरू होने पर पुलिस-प्रशासन को इसकी जानकारी हुई। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थापना रुकवा दी, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई और विरोध शुरू हो गया।
विवाद बढ़ने पर प्रशासन को गांव में कई थानों की पुलिस के साथ पीएसी तैनात करनी पड़ी। दिनभर अधिकारी ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास करते रहे। हालांकि, प्रतिमा स्थापना की तैयारी लंबे समय से चलने के बावजूद पुलिस को इसकी जानकारी न होने को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि एक सप्ताह से चल रही तैयारियों की जानकारी स्थानीय पुलिस और एलआईयू को क्यों नहीं हो सकी।
एसएसपी अंकिता शर्मा के अनुसार ग्राम समाज की समीप पर बाबा साहेब की मूर्ति लगाने का प्रयास किया। पुलिस और प्रशासन 14 घंटे से समझाने का प्रयास कर रहा था। शाम के समय लोगों ने पथराव किया। गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किया। मामले में सात उप्रदवियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के साथ पीएसी को भी तैनात किया गया है। हल्का बल प्रयोग कर बाबा साहेब की प्रतिमा को सुरक्षित रखवाया गया है। मूर्ति तोड़ने अथवा खंडित किए जाने संबंधी सूचना असत्य एवं निराधार है।
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