पटना में फार्मासिस्ट भर्ती में बीफार्मा योग्यताधारी अभ्यर्थियों को शामिल करने की मांग तेज हो गई है। इसी मांग को लेकर शुक्रवार को फार्मा अभ्यर्थी गांधी मैदान के पास जुटने लगे और मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च करने की तैयारी की। गांधी मैदान में पहले से तैनात पटना पुलिस ने अभ्यर्थियों को रोकने की कोशिश की। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और आरएएफ के जवानों की तैनाती की गई है। अभ्यर्थी छह अक्तूबर से पटना के गर्दनीबाग में अनशन और धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन की ओर से मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखने के लिए मार्च निकालने का निर्णय लिया। इससे पहले अभ्यर्थियों ने धरनास्थल पर कैंडल मार्च निकालकर भी सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की थी।
25 हजार बीफार्म अभ्यर्थी 2473 पदों पर निकली बहाली में शामिल नहीं हो पाए अर्जेश राज ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने 2024 में फार्मासिस्ट भर्ती नियमावली में संशोधन कर बीफार्म योग्यताधारी अभ्यर्थियों को भर्ती से बाहर कर दिया था। इसके कारण बिहार के करीब 25 हजार बीफार्म अभ्यर्थी 2,473 पदों पर निकली बहाली में शामिल नहीं हो सके और 1,600 पद खाली रह गए। उन्होंने कहा कि फार्मेसी अधिनियम, 1948 की धारा 42 के तहत राज्य फार्मेसी काउंसिल में निबंधित फार्मासिस्टों की भूमिका निर्धारित है। बीफार्म और डीफार्म दोनों योग्यताधारी अभ्यर्थी यदि काउंसिल में निबंधित हैं, तो उन्हें भी अवसर मिलना चाहिए। अभ्यर्थियों का दावा है कि 1999 और 2006 की नियमित तथा 2013 और 2016 की संविदा बहालियों में बीफार्म योग्यताधारियों को मौका मिला था और वे अब भी कार्यरत हैं। छात्र नेता दिव्यांशु राज और विमल कुमार ने भी भर्ती नियमों में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि रेलवे, एम्स, ईएसआईसी, सेना और अन्य राज्यों में फार्मासिस्ट भर्ती के मानकों की तुलना में बिहार के नियमों पर पुनर्विचार होना चाहिए।
फार्मेसी ऑफिसर के पद भी सृजित करने की मांग कर रहे अभ्यर्थी रवि रंजन कुमार ने मांग की कि भारत के राजपत्र में 10 जून 2026 को प्रकाशित फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति और सेवा विनियम, 2025 को बिहार में जल्द लागू किया जाए। उनके अनुसार, इस विनियम का उद्देश्य फार्मासिस्टों की भर्ती, शैक्षणिक योग्यता, वेतन स्तर, पदोन्नति और कार्य-दायित्वों में देशभर में एकरूपता लाना है। जयकरण कुमार ने कहा कि बिहार सरकार को इसके अनुरूप भर्ती नियमावली और पदोन्नति संवर्ग तैयार करना चाहिए। फार्मासिस्ट अभिमन्यु कश्यप ने बताया कि विनियम लागू होने से फार्मासिस्ट निदेशालय और स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त निदेशक जैसे पदों के सृजन का रास्ता खुल सकता है। अभ्यर्थियों की मांग है कि बीफार्म योग्यताधारियों को फार्मासिस्ट भर्ती में शामिल करने के साथ उनके लिए फार्मेसी ऑफिसर के पद भी सृजित किए जाएं।
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