एलॉन मस्क ने हाल ही में X (Twitter) पर भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए मुकेश अंबानी को ‘भारत के असली बॉस’ कहा था। इस पोस्ट पर राहुल गांधी ने जवाब दिया और मस्क ने फिर धन्यवाद कहकर अपनी नाराज़गी दोहराई।
इन विवादों के बीच भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मित्तल ने Bloomberg New Economy Forum 2026 के मंच से अपने बिंदु रखे। उन्होंने कहा, “एयरटेल ने सैटेलाइट‑इंटरनेट सर्विस के लिए पाँच साल पहले आवेदन किया था, और हमारा ग्राउंड नेटवर्क तीन साल से तैयार है। हम सभी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं और मुझे लगता है कि मैं कतार में एलॉन मस्क से काफी आगे हूँ।”
मित्तल ने आगे बताया कि उनकी कंपनी के सैटेलाइट पिछले पाँच साल से भारत के ऊपर मौजूद हैं, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण सेवा शुरू नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि यदि स्टारलिंक को कुछ दिन पहले मंजूरी मिलती, तो वह भी खुशी से स्वागत करता।
मस्क के आरोपों के विपरीत, मित्तल का बयान दर्शाता है कि भारत में सैटेलाइट‑इंटरनेट की शुरुआत के लिए केवल स्टारलिंक ही नहीं, बल्कि भारतीय कंपनियों जैसे एयरटेल, जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब भी लंबी अवधि से अनुमोदन की प्रतीक्षा में हैं। सरकार ने कहा है कि सभी आवेदकों को समान सुरक्षा जांच और स्पेक्ट्रम प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी लोकसभा में इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उपाध्यक्ष राम माधव ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी और भेदभाव‑रहित है, और जियो व एयरटेल दोनों ही स्टारलिंक के साथ समान इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने मस्क को देश और उसके नेतृत्व के प्रति सम्मान रखने की अपील की।
सैटेलाइट इंटरनेट का महत्व इस बात में है कि यह उन दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी लाता है जहाँ फाइबर या मोबाइल टावर बिछाना कठिन है। भारत में इस क्षेत्र में जियो सैटकॉम, यूटेलसैट वनवेब और भारती एयरटेल जैसी कंपनियाँ सक्रिय हैं।
एयरटेल ने टेलीकॉम के अलावा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी कदम बढ़ाए हैं। कंपनी अपनी डेटा‑सेंटर क्षमता को 300 MW से बढ़ाकर 1 GW करने की योजना बना रही है, जिसमें दक्षिण भारत, मुंबई और दिल्ली के आसपास विस्तार शामिल है। साथ ही वह सॉवरेन क्लाउड सर्विस पर भी फोकस कर रही है, जिससे भारतीय कंपनियों, सरकारी एजेंसियों और रक्षा बलों को डेटा‑सुरक्षा के साथ क्लाउड समाधान मिल सके।
सैटेलाइट इंटरनेट के साथ-साथ सुनील मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के लिए वैश्विक स्तर पर सुरक्षा नियम बनना चाहिए और सरकारों को बड़े हादसे का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। नियमों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा करना, नवाचार को रोकना नहीं है।
संक्षेप में, भारत में सैटेलाइट‑इंटरनेट की मंजूरी प्रक्रिया सभी कंपनियों के लिए समान रूप से चल रही है, और भारती एयरटेल जैसी घरेलू कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में स्टारलिंक के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।
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