दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित जूता फैक्टरी में शुक्रवार रात लगी आग ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। मृतक अपने-अपने परिवार की खातिर कुछ और पैसा के लिए ओवरटाइम के लिए रूक गए थे। ओवरटाइम में काम करने करने के दौरान फैक्टरी में आग लग गई। सभी पिछले कई वर्षों से फैक्ट्ररी में काम कर रहे थे। किसी ने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए अतिरिक्त काम करने का फैसला किया था तो कोई पत्नी के इलाज के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि शुक्रवार की रात उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी। .metering_wall_container {min-height:58px;max-height:58px;position:relative;transition:max-height 0.5s ease-in-out;}
मृतक-दो- प्रेमचंद्र कैंसर से पीड़ित पत्नी को छोड़ दुनिया से चले गए प्रेम चंद्र मृतक प्रेम चंद्र के बेटे रमेश ने बताया कि उनके पिता ही परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनकी मां पिछले एक साल से कैंसर से पीड़ित हैं। मां की देखभाल और इलाज के लिए रमेश को अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद से प्रेम चंद्र ही परिवार का खर्च उठाने के साथ पत्नी के इलाज के लिए पैसे जुटा रहे थे। रमेश के मना करने के बावजूद प्रेम चंद्र पत्नी के इलाज के लिए लगातार काम कर रहे थे। अधिक पैसे कमाने की उम्मीद में वह शुक्रवार रात डबल शिफ्ट में काम कर रहे थे। इसी दौरान फैक्टरी में लगी आग ने उनकी जिंदगी छीन ली। पिता की मौत के बाद अब रमेश के सामने बीमार मां की देखभाल के साथ पूरे परिवार को संभालने की जिम्मेदारी आ गई है।
मृतक-तीन- अशोक बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए आए थे दिल्ली बिहार के नालंदा निवासी अशोक कुमार बचपन से ही दिल्ली में रहकर काम कर रहे थे। करीब पांच साल पहले उनकी शादी हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें एक चार साल और दूसरी दो साल की है। अभी उनकी पत्नी गर्भवती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य देने के लिए वह दिल्ली की जूता फैक्ट्ररी में मेहनत कर रहे थे। अशोक की मौत से उनकी दोनों बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि हादसे के समय अशोक अपने परिवार से फोन पर बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पत्नी को फैक्टरी में आग लगने की जानकारी दी और फोन काट दिया। इसके बाद जब परिवार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो उनका फोन बंद आने लगा। कुछ देर बाद परिवार को उनकी मौत की खबर मिली।
मृतक-चार - लाल बाबू दो बच्चों और पत्नी को छोड़ गए अकेला मृतक लाल बाबू चौहान उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले थे। वह पिछले करीब 15 वर्षों से जूता फैक्टरी में काम कर रहे थे। परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं। शनिवार सुबह परिवार को उनकी मौत की सूचना मिली। परिजनों के रविवार सुबह तक दिल्ली पहुंचने की संभावना है। लाल बाबू की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी और दो बच्चों के सामने अब जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाने की चुनौती है।
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