नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. नुवाकोट के कई गांव और घर बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गए हैं. एक तरफ रास्ता खोलने की कोशिश की जा रही है. तो दूसरी तरफ बचावकर्मी घर-घर जाकर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं.
मलबे में दबे घरों से लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है. मलबे में लोगों का बचा हुआ सामान भी दिख रहा है. कहीं बच्चों के खिलौने मलबे में दबे हैं, तो कहीं भगवान की तस्वीरें और परिवार की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं.
कई घरों की दूसरी मंजिल तक पांच से छह फीट तक कीचड़ और मलबा जमा है. घरों के अंदर किताबें, खिलौने और परिवार की तस्वीरें बिखरी नजर आ रही हैं. इसी मलबे के बीच वॉलंटियर्स लोगों की जिंदगी और उनकी जरूरी चीजें बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं.
इन घरों के पीछे त्रिशूली नदी की तेज धारा अब भी भयावह है. बाढ़ का पानी अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर और मलबा लेकर आया और रास्ते में जिनके भी घर आए उसे बहा ले गया. अब लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने घर और जिंदगी को फिर से बसाने की है. तबाही का मंजर देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेपाल के लोगों के लिए इस आपदा से उबरना कितना मुश्किल होने वाला है.
26 अगस्त को आई बाढ़ में नेपाल के कई घर, सड़कें, गाड़ियां, पुल सब बह गए. वहीं, चीनी मीडिया के मुताबिक चीन की तरफ 16 लोगों की मौत हुई है. जबकि तिब्बत में लगभग 550 लोग लापता बताए जा रहे हैं.
नेपाल में बाढ़ के छठे दिन बचाव अभियान अब भी जारी है. अब तक सभी आठ प्रभावित जिलों से शव बरामद किए जा चुके हैं. चितवन से 272, नवलपरासी ईस्ट से 207, नवलपरासी वेस्ट से 151, गोरखा से 62, नुवाकोट से 95, धादिंग से 55, तनहूं से 37 तथा रसुवा से 24 शव मिले हैं. शुरुआती जांच में तबाही की वजह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने को माना जा रहा है.
इसी बीच मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी का पानी फिर उफान पर आया. करीब तीन घंटे तेज बहाव में घ्यालचोक-चारौदी पुल बह गया. करीब 130 मीटर लंबा यह पुल गोरखा जिले के घ्यालचोक इलाके को पृथ्वी हाईवे से जोड़ता था. पुल टूटने से आसपास के करीब 400 परिवारों का मुख्य रास्ता बंद हो गया है.
यह पुल सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं था. आसपास के किसान इसी रास्ते से दूध और सब्जियां चारौदी की कृषि सहकारी संस्था तक पहुंचाते थे. अब पुल बहने से उनकी उपज को बाजार तक पहुंचाना मुश्किल होगा. इससे पहले 26 अगस्त की बाढ़ में धवादिघाट का पुल भी बह चुका था. ऐसे में स्थानीय लोग जिस दूसरे रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे, वह भी अब बंद हो गया है.
फिलहाल नेपाल में सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश करना है. कहीं मलबा रास्ता रोक रहा है, तो कहीं नदी का बढ़ता जलस्तर बचाव अभियान में बाधा बन रहा है. ऐसे में राहत दल एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहे हैं. उनकी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया जा सके.
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