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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के कारण अगस्त महीने में मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
गांधी जयंती के मौक़े पर दो अक्तूबर को मुंबई में सीजेपी के नेतृत्व में एक बार फिर से लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर एकजुट हुए.
वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
ख़ास कर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद, जिसमें कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कई फ़ैसलों से असहमति जताई थी.
प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.
मुंबई के शिवाजी पार्क के बाहर हजारों लोगों की भीड़ के बावजूद किसी को हिरासत में नहीं लिया गया.
मुंबई के प्रदर्शन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता कर रहे थे. पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी दादर में शिवाजी पार्क के गेट के बाहर तिरंगा लेकर पहुँचे थे.
मुंबई के प्रदर्शन के दौरान फ़िल्म अभिनेता नासिरुद्दीन शाह, अभिनेत्री शबाना आज़मी, विशाल डडलानी समेत बॉलीवुड के कुछ कलाकार भी शामिल हुए.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफ़ा नहीं दिया तो कॉकरोच 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे.
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मुंबई में जुटे लोगों को अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और पार्टी की क़ानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया.
प्रदर्शन के दौरान 'इंक़लाब ज़िंदाबाद', 'एक जीरा, दो अजवाइन, ज्ञानेश करो रिजाइन' और 'ज्ञानू काका... राजीनामा देया' जैसे नारे लगाए गए.
संगीतकार विशाल डडलानी 'रंग दे बसंती' गाना गाते हुए दिखे.
अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के दौरान 'ज्ञानू, इट्स डन ब्रो' के नारे लगाए.
उन्होंने कहा, ''अगर ज्ञानू चले गए, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चले जाएंगे."
आशुतोष रांका ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुकान ईसीआई की वजह से चल रही है. ज्ञानेश कुमार कौन होते हैं, बाबासाहेब के संविधान को छीनने वाले?"
उन्होंने कहा, "यह सिर्फ़ ट्रेलर है, पूरी तस्वीर दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिखाई जाएगी."
दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचकर आंदोलन करने का रास्ता खुला है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "अगर दिल्ली पुलिस हमें रोकने की कोशिश करती है, तो जहाँ भी हमें रोका जाएगा, वही हमारा जंतर-मंतर होगा. हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण होगा. हम महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चलेंगे."
दीपके ने कहा, ''सरकार इतनी अक्षम है कि नीट परीक्षा के पेपर लीक के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दो महीने से कुछ ही अधिक समय बाद सीजेपी को दूसरी बार प्रदर्शन करना पड़ा. इस प्रदर्शन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दिया था''
"हम तीन दिन नहीं तीन महीने तक प्रदर्शन करेंगे."
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दीपके ने कहा, "आज हम महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. आज संघ के लोग हमें उतना ही परेशान कर रहे हैं, जितना अंग्रेजों ने गांधीजी को किया था. मैं गोडसे की विचारधारा के लोगों से यह कहना चाहता हूं कि आप गांधी, नेहरू और आंबेडकर से बड़े होने के लायक नहीं हैं. अगर गांधी इस देश की आत्मा हैं, तो आंबेडकर इस देश की रीढ़ हैं. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और नेहरू ने हमें वोट देने का अधिकार दिया."
अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भी कड़ी आलोचना की.
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सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा, "इस मंच से हम दिल्ली पुलिस को एक बार फिर चेतावनी दे रहे हैं. जंतर-मंतर पर न्याय है. लोगों को उस जगह पर आस्था है. युवाओं के कई सपने वहाँ जुड़े हैं, इसलिए मोदी और शाह ने उस जगह को बंद कर दिया है. ज्ञानेश कुमार, हम इसे अब बर्दाश्त नहीं करेंगे. जब तक आप इस्तीफ़ा नहीं देते, हम घर नहीं लौटेंगे. हमसे दो साल से वोट देने का अधिकार छीना गया है."
गायक विशाल डडलानी ने कहा, "चुनाव आयोग ने मेरा आवेदन भी ख़ारिज कर दिया है. क्योंकि मैं उन्हें वोट नहीं दूंगा. आपको पता होना चाहिए कि यह सब हो रहा है. हमें ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े तक अपनी आवाज़ बुलंद रखनी चाहिए."
महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने कहा, "मुंबई ने यह साबित कर दिया है कि हम जंतर-मंतर से कम नहीं हैं. मुंबई कभी पीछे नहीं हटती. मुंबई ने इतिहास में यह दिखाया है कि हर बदलाव की शुरुआत मुंबई से होती है.''
दीपके और डडलानी ने "सहयोग के लिए" पुलिस का शुक्रिया अदा किया.
मुंबई पुलिस ने 'इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और अन्य अतिरिक्त बलों के 300 जवानों को तैनात किया गया था.
पुलिस ने कहा, "एहतियात के तौर पर किसी को हिरासत में नहीं लिया गया. शिवाजी पार्क की ओर जाने वाली सभी सड़कों को बंद कर दिया गया था. शाम को प्रदर्शन ख़त्म होने के बाद सड़कों को खोल दिया गया. हालात अब शांतिपूर्ण है."
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प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि उन्हें पुलिस कार्रवाई से डरना नहीं चाहिए.
उन्होंने कहा, "हमें हिरासत में लिए जाने से डरना नहीं चाहिए. हमें गिरफ़्तार किए जाने से डरना नहीं चाहिए. वे हमें डराने और धमकाने की कोशिश करेंगे, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं."
प्रदर्शन में शामिल शबाना आज़मी ने कहा, "बचपन से हम सुनते आए हैं कि वोट देना हमारा अधिकार है, लेकिन अगर यही अधिकार छीन लिया जाए तो हम क्या करेंगे? हम विरोध करेंगे."
उन्होंने कहा, "हमें इसे बर्दाश्त करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह हमारा देश है और इस देश का संविधान हमें यह अधिकार देता है."
कॉमेडियन राजीव निगम ने कहा, "भारत माता की आत्मा लोकतंत्र है. लोकतंत्र हमारे वोट देने के अधिकार से मज़बूत होता है. जब हमारा वोट देने का अधिकार छीन लिया जाएगा, तो हम सभी को मिलकर अपनी आवाज़ उठानी होगी."
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सीजेपी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है. पार्टी ने उनके ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एसआईआर जैसी प्रक्रिया के आदेश किसने दिए.
पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने की मांग की है.
सीजेपी का कहना है कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नागरिक समाज की भागीदारी वाला नया और पारदर्शी तंत्र बनाया जाना चाहिए.
'द हिंदू' के मुताबिक़ प्रदर्शन में शामिल एनसीपी नेता अनिश गावंडे ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से हाशिए पर रहने वाले समूह प्रभावित हुए हैं.
उन्होंने दावा किया कि "बाढ़ के कारण जिन लोगों के पास दस्तावेज़ नहीं थे वे लोग प्रभावित हुए हैं. असम में बाढ़ आई थी और हज़ारों लोगों के दस्तावेज़ पानी में बह गए. ऐसे लोग अब कहां से अपना दस्तावेज लाएंगे. ऐसे लोगों के वोट का अधिकार छिनने का ख़तरा पैदा हो गया है. इसके साथ ही बिना पहचान पत्र वाले ट्रांसजेंडर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए.''
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