तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपना पाँच महीना कार्यकाल दो अलग‑अलग राजनीतिक रिश्तों को संतुलित करने के प्रयासों में बिता दिया है। राज्य में कांग्रेस‑टीवीके गठबंधन से सरकार चलाते हुए वह केंद्र की भाजपा‑नेतृत्व वाली सरकार के साथ भी संवाद बनाए रखना चाहते हैं।
इस सप्ताहांत के दो कार्यक्रम इस संतुलन को स्पष्ट करते हैं। शनिवार को चेन्नई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात हुई, जहाँ लंच और कॉफी के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेट्रो के दूसरे चरण का उद्घाटन और सवारी की गई।
राहुल गांधी के साथ बातचीत में दोनों नेताओं ने राज्य‑स्तर की समस्याओं, शिक्षा‑नीति और आर्थिक सहयोग पर विचार‑विमर्श किया। कांग्रेस‑टीवीके गठबंधन को स्थिर रखने के लिए विजय ने राहुल को “भाई” कहा, जिससे यह संकेत मिला कि गठबंधन के भीतर संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि सक्रिय सहयोग पर आधारित हैं।
पीएम मोदी के साथ मेट्रो कार्यक्रम में विजय ने सार्वजनिक रूप से तमिलनाडु की प्रमुख मांगें रखीं—वित्तीय सहायता, केंद्र‑राज्य सहयोग और विकास परियोजनाओं की त्वरित शुरूआत। यह दिखाता है कि वह केंद्र सरकार के साथ केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि मुद्दा‑आधारित संवाद चाहते हैं।
मई 2024 के विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से 10 सीटों की कमी रही। इस कारण वह कांग्रेस और छोटे दलों के साथ गठबंधन में सरकार बना रहे हैं, जिससे केंद्र से संसाधन प्राप्त करने की आवश्यकता और भी बढ़ गई।
विजय ने पिछले महीनों में दिल्ली में कई बार केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की है, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री के साथ भी चर्चा हुई। इन मुलाकातों में राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET), वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण बजाने और त्रिभाषी नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद सामने आए, लेकिन संवाद का मार्ग खुला रखा गया।
राज्य‑केंद्र संबंधों को “सहकारी संघवाद” की रूपरेखा में देखते हुए विजय ने कहा है कि भारत का विकास तभी संभव है जब राज्य सशक्त हों और विकास समावेशी हो। यह रुख तमिलनाडु को कई विपक्ष‑शासित राज्यों से अलग करता है, जहाँ अक्सर केंद्र‑राज्य टकराव निरंतर रहता है।
कांग्रेस के साथ गठबंधन को बनाए रखने और केंद्र के साथ कामकाजी संबंध स्थापित करने के बीच विजय का मुख्य चुनौती यही है कि वह दोनों पक्षों को संतुलित करते हुए राज्य के विकास को प्राथमिकता दें। यह संतुलन तभी सफल होगा जब वास्तविक नीतिगत फैसले और वित्तीय सहायता समय पर मिलें।
आगामी महीनों में तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति, शिक्षा‑नीति और बुनियादी ढाँचे के बड़े प्रोजेक्ट्स पर निर्णय लेना विजय की असली परीक्षा होगी। यदि वह दोनों पक्षों से समर्थन सुरक्षित कर पाते हैं, तो उनकी सरकार को स्थिरता और विकास दोनों मिलेंगे।
संक्षेप में, राहुल गांधी के साथ कॉफी और मोदी के साथ मेट्रो सवारी केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के दोहरे राजनयिक कदम हैं, जो तमिलनाडु के हितों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र‑राज्य संवाद को खुला रखने की उनकी रणनीति को दर्शाते हैं।
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