UP Electricity Smart Meter News : उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटर की जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) से शनिवार को शिकायत की है। उपभोक्ता परिषद ने सीईए से जांच मानक के अनुरूप नहीं होने का दावा करते हुए यूपी में लग रहे स्मार्ट मीटरों की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है।
सरकार को रिपोर्ट सौंपने के बाद शुक्रवार देर रात पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटर जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी थी। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद स्मार्ट मीटरों की जांच पर ही सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ता परिषद ने सीईए को भेजे प्रस्ताव में स्मार्ट मीटर की जांच रिपोर्ट तो सवाल खड़े किए हैं, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की हाईटेक प्रयोगशाला के मान्यता प्राप्त कार्यक्षेत्र की भी जानकारी भेजी है। रिपोर्ट में इसी प्रयोगशाला में स्मार्ट मीटरों की जांच करवाने की बात कही है।
उपभोक्ता परिषद ने सीईए से कहा है कि वह जांचे कि स्मार्ट मीटरों का परीक्षण उस प्रयोगशाला के मान्यता प्राप्त दायरे में था या नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अलग-अलग कंपनियों के 24 स्मार्ट मीटरों की जांच इसी प्रयोगशाला में करवाने की बात कही गई है, जिसमें मीटरों को मानक के अनुसार सही पाया गया है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मध्यांचल की प्रयोगशाला के मान्यता प्राप्त दायरे में स्मार्ट मीटर (भारतीय मानक 16444) के भाग-1 और भाग-2 की जांच शामिल नहीं है। ऐेसे में उसी प्रयोगशाला में इन मीटरों का परीक्षण करके 24 स्मार्ट मीटरों को इस मानक के अनुसार सही कैसे घोषित किया गया? उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर ही एनएबीएल ने 10 जून 2026 को लिखित जवाब दिया था कि मध्यांचल की हाईटेक प्रयोगशाला के मान्यता प्राप्त दायरे में स्मार्ट मीटर के भाग-1 और भाग-2 के अनुसार परीक्षण शामिल नहीं है।
यूपी और मध्य प्रदेश मिलकर अधिकतम बिजली मांग पूरी करने के लिए 2000 मेगावॉट बिजली की संयुक्त खरीद करेंगे। इसके अलावा मध्यम अवधि की पावर बैंकिंग व्यवस्था विकसित करने पर सहमति बनी है। शनिवार को पावर कॉरपोरेशन लि. और मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लि. के बीच समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए गए। लगभग 10,000 करोड़ के निवेश की संभावनाएं पैदा होंगी। एमओयू मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लि. के मुख्य महाप्रबंधक (गैर-पारंपरिक ऊर्जा) जीएस खनूजा और यूपीपीसीएल की तरफ से मुख्य अभियंता मनीष द्विवेदी ने दस्तखत किए।
पावर कॉरपारेशन ने कहा कि इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण आधार दोनों राज्यों की पूरक मौसमी बिजली मांग है। मध्य प्रदेश में अक्तूबर से मार्च तक रबी सीजन में बिजली की मांग ज्यादा रहती है, जबकि उत्तर प्रदेश में अप्रैल से सितंबर तक के महीनों में मांग का दबाव रहता है। एमओयू के तहत दोनों राज्य प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से 2,000 मेगावॉट पीक पावर क्षमता की खरीद की प्रक्रिया शुरू करेंगे। प्रस्तावित व्यवस्था से विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बनेंगी। इससे विद्युत बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार के नए अवसरों के सृजन और स्वच्छ ऊर्जा के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। मध्यम अवधि की पावर बैंकिंग व्यवस्था विकसित होने से एक राज्य में उपलब्ध अतिरिक्त बिजली का दूसरे राज्य की जरूरत के समय बेहतर उपयोग हो सकेगा।
समझौते के वक्त ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपारेशन अध्यक्ष डा. आशीष गोयल, पावर कॉरपोरेशन एमडी नितीश कुमार, मध्य प्रदेश के सचिव विशेष गरपाले और यूपीपीसीएल के निदेशक (कॉरपोरेट प्लानिंग) दीपक रायजादा आदि उपस्थित रहे।
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