रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोट‑चोरी के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल ने अपने बयान में वोट‑चोरी को ‘हाइड्रोजन बम’ कहा, लेकिन असल में वह दावा न तो साबित हुआ और न ही दिवाली के पटाखे जितना प्रभावी रहा।
सिंह ने बताया कि राहुल ने कभी 70‑साल की महिला को दो‑स्थानीय मतदाता बताया, तो कभी 35‑साल की महिला को 124‑साल का मतदाता बना दिया। यह दिखाता है कि फर्जी मतदाता बनाकर आम जनता को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि हर मामला झूठा और राजनीतिक नाटक ही निकला।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी राजनीतिक टकराव को साधन बना रहे हैं और देश के युवा वर्ग को हिंसा की ओर उकसा रहे हैं। सत्ता परिवर्तन, विरोध और ‘सड़क से रास्ता निकालने’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की रणनीति को दर्शाता है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश है।
रक्षा मंत्री ने कहा, “राहुल गांधी को संवाद का रास्ता चुनना चाहिए, न कि रुकावट की राजनीति।” उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इस बात को स्पष्ट करती है कि अराजकता फैलाने को कोई लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।
सिंह ने कांग्रेस के समय की इमरजेंसी, 1984 के सिख नरसंहार और कार सेवकों पर गोलीबारी का उल्लेख किया, यह आरोप लगाते हुए कि आज संवैधानिक संस्थाओं को चोट पहुँचाने की कोशिश की जा रही है और राहुल गांधी संविधान को जेब में रखकर अराजकता फैला रहे हैं।
चुनाव आयोग को लेकर भी राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि 1990 में रातों‑रात दो चुनाव आयुक्तों को नियुक्त किया गया, जिनमें नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया और बाद में गंभीर आरोपों के बावजूद कांग्रेस ने उनका बचाव किया। इसी तरह, एमएस गिल को भी कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया और बाद में वह दो बार केंद्र सरकार में मंत्री बने।
सिंह ने कहा, “पहले मतदाता पहचान पत्र के बिना चुनाव होते थे। जब से पहचान पत्र आया, कांग्रेस के लिए बहुमत की दूरी बहुत बड़ी हो गई है और वह अकेले सत्ता नहीं पकड़ पाई।” उन्होंने यह भी पूछताछ की कि यह ‘वोट‑चोरी’ थी या ‘काम‑चोरी’। भाजपा ने हमेशा संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया है और उन पर कभी शक नहीं किया।
राष्ट्रपति राजीव गांधी की मृत्यु के बाद हुए चुनाव रद्दीकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा, “एक उम्मीदवार की मृत्यु पर पूरे चुनाव रद्द क्यों नहीं होते, फिर राजीव गांधी की मृत्यु पर ऐसा क्यों किया गया?” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हिंसा और सत्ता परिवर्तन जैसे हथियारों से अपनी हार का बदला लेना चाहती है और बांग्लादेश जैसे माहौल को उत्पन्न करना चाहती है।
अंत में, राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से पूछा कि क्या वह समाजवादी पार्टी के बिना अमेठी जीत सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस के अंदर की अराजकता को देखने की सलाह दी और कहा, “वोट‑चोरी का दावा नाकाम रहा, आपका ‘हाइड्रोजन बम’ फुस्स साबित हुआ।”
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