रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 नवम्बर को पश्चिम बंगाल के सुकना में त्रिशक्ति कोर की सैन्य तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमता की जांच‑परख की।
इस दौरे में उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट बुनियादी ढांचा विकास और नवीनतम सैन्य उपकरणों की तैनाती की जानकारी दी गई, तथा उभरती तकनीकों के उपयोग से सैनिकों की युद्ध क्षमता बढ़ाने के प्रयासों पर उनका सकारात्मक मूल्यांकन रहा।
राजनाथ सिंह ने सीमा‑सन्निकट क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा निर्माण और स्थानीय जनसंख्या के कल्याण हेतु सेना द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की, कहा कि इससे सीमावर्ती समुदायों के साथ सेना के संबंध मजबूत होते हैं और राष्ट्रीय निर्माण में योगदान मिलता है।
इस दौरान थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, पूर्वी कमान के जनरल‑ऑफ़िसर‑इन‑कमांड लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन, 33 कोर के जनरल‑ऑफ़िसर‑इन‑कमांड लेफ्टिनेंट जनरल मन राज सिंह मान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समीक्षा के बाद रक्षा मंत्री ने दिवाली की पूर्व संध्या में सैनिकों के साथ बाराखाना कार्यक्रम में भाग लिया, उनके साहस, पेशेवर दक्षता और समर्पण की प्रशंसा की तथा कहा कि सतर्कता और तत्परता देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि सुकना और उसके आसपास का क्षेत्र सैन्य रसद के लिहाज से अत्यंत रणनीतिक है; यहाँ से अग्रिम मोर्चों तक सामान, हथियार, भोजन, चिकित्सा सुविधाएँ और कर्मियों की आवाज़ाही होती है, इसलिए 24×7 ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर काम कर रही है, ताकि अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों को आवश्यक सामग्री समय पर मिल सके। भविष्य में सप्लाई चेन को और अधिक मजबूत करने का भरोसा भी दिया।
सड़कों, सुरंगों, सीमा‑बुनियादी ढांचे और आधुनिक सैन्य उपकरणों के लिए बजट आवंटन बढ़ाया गया है, जिससे भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय स्टार्ट‑अप और उद्योग अब ड्रोन, ड्रोन‑रोधी प्रणाली और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें सैनिकों के लिये तैयार कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने बताया कि भारतीय रक्षा बल नई तकनीकों को तेज़ी से अपना रहे हैं; सैनिक ड्रोन संचालन सीख रहे हैं, साइबर सुरक्षा की समझ बढ़ा रहे हैं और हाइब्रिड वॉरफेयर, प्रॉक्सी वॉर, साइबर हमले, ड्रोन घुसपैठ और सूचना युद्ध जैसे आधुनिक खतरेयों के लिये प्रशिक्षण ले रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि दुश्मन सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर, ड्रोन से संवेदनशील स्थलों की निगरानी करके और साइबर हमलों से सैन्य प्रणालियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है, इसलिए हर मोर्चे पर सतर्क रहना आवश्यक है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार सैनिकों के मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिये हर संभव कदम उठाने को तैयार है; अधिकारीयों को सलाह दी कि वे जब भी संभव हो, जवानों के साथ समय बिताएँ, ताकि उन्हें अपनापन और देश‑के‑साथ‑खड़े‑होनے‑का‑विश्वास मिले।
उन्होंने बताया कि परिवार से दूर रहने और कठिन जिम्मेदारियों के कारण सैनिक तनाव का सामना कर सकते हैं; ऐसे में उन्हें अपनी भावनाएँ दबाने की बजाय साथियों से खुलकर बात करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर मदद लेनी चाहिए।
रक्षा मंत्री ने पूर्वोत्तर भारत को देश का “पहला छोर” कहा, कहा कि यह क्षेत्र भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक शुरुआत है, जहाँ सुबह की पहली किरण पहुँचती है, और इसकी जैव विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक परम्पराएँ राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
अंत में राजनाथ सिंह ने सभी सैनिकों और उनके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएँ दीं, भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी सुरक्षा, सम्मान और कल्याण के लिये प्रतिबद्ध है, और बाराखाना को एकता और समानता का प्रतीक बताया, जिससे विभिन्न रैंक और पृष्ठभूमि के जवान एक परिवार की तरह जुड़ते हैं।
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