दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित भारत गठबंधन की महारैली में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी नाराज़गी जाहिर की।
रैली में उमड़ी भारी भीड़ का धन्यवाद करते हुए राहुल ने कहा, "आप सब दूर‑दूर से आए हैं और नरेंद्र मोदी, अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक स्पष्ट संदेश दिया है। यह सिर्फ किसी एक पार्टी या नेता की आवाज़ नहीं, बल्कि भारत के युवाओं, किसानों और कामगारों की सामूहिक आवाज़ है।"
उन्होंने आगे कहा, "हम भारत में लोकतंत्र को खत्म नहीं होने देंगे और संविधान को नष्ट नहीं होने देंगे। चाहे आपके पास कितना भी पैसा या शक्ति क्यों न हो, आप संविधान से ऊपर नहीं उठ सकते।"
चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए राहुल ने दावा किया, "देश में सालों से वोट चोरी होती आ रही है। ममता बनर्जी ने बंगाल का उदाहरण दिया, पर मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी इसी तरह की गड़बड़ी हुई है। ईवीएम के साथ‑साथ वोटर लिस्ट से नाम हटाकर नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है।"
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "2024 के चुनावों के बाद 11.53 करोड़ (लगभग 130 मिलियन) वोटरों को लिस्ट से बाहर कर दिया गया। यानी हर सात में से एक वोटर, यानी लगभग 15 प्रतिशत, को हटा दिया गया। चुनाव में एनडीए और कांग्रेस के बीच केवल 3 प्रतिशत का अंतर था, फिर भी 15 प्रतिशत वोटरों को हटाया गया। इसका सीधा मतलब है कि चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।"
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लक्षित करते हुए राहुल ने कहा, "ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना होगा और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। यह कोई छोटी‑मोटी चोरी नहीं, बल्कि हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार की चोरी है। इसे रेरेस्ट ऑफ द रेयर अपराध और देशद्रोह माना जाना चाहिए। उनके बिना न तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन पाएंगे और न ही अमित शाह गृह मंत्री।"
राहुल ने यह भी कहा कि RSS ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सीबीआईक्रेसी और पुलिस सहित कई संवैधानिक संस्थाओं को अपने नियंत्रण में ले लिया है, जिससे देश के युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है।
आर्थिक असमानता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "अडानी, अंबानी जैसे दो‑तीन उद्योगपतियों के हाथों में देश की बड़ी संपत्ति और संसाधन समा गए हैं। उनके कर्ज एक सेकंड में माफ हो जाते हैं, जबकि किसान, मजदूर या छोटे व्यापारी के कर्ज का भुगतान न कर पाना उन्हें जेल तक ले जाता है।"
उन्होंने "शिव की बारात" की तुलना की, "हमें ऐसा भारत चाहिए जहाँ हर कोई नाच सके, जहाँ किसान को उसकी उपज का पूरा फल मिले और छात्र को 18 घंटे पढ़ाई के बाद रोजगार मिले। हमें ऐसा देश नहीं चाहिए जहाँ हर हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, बिजली और मोबाइल नेटवर्क किसी एक बड़े उद्यमी का हो।"
सत्ताधारी दल को चेतावनी देते हुए राहुल ने कहा, "अमित शाह कहते हैं कि नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे। मैं कहता हूँ कि वह कहीं भी नहीं जा सकते, और अगर जाना भी चाहें तो हम उन्हें रोकेंगे। ज्ञानेश कुमार के बाद हम आपके सामने खड़े होंगे। आपने जो वोट चोरी की है और देश को बेचा है, उसके लिए न्याय आपका इंतजार कर रहा है। आप भाग नहीं सकते, आपके और अमित शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।"
राहुल ने आगे कहा, "हमारा कोई दुश्मन नहीं है—ना नरेंद्र मोदी, ना अमित शाह, ना ज्ञानेश कुमार। हम हिंसा या नफरत नहीं फैलाते, हम महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। हमारा धर्म सिखाता है कि किसी से नफरत नहीं करनी और लाइन में खड़े आखिरी व्यक्ति की आवाज़ की रक्षा करनी, चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम, सिख, दलित, आदिवासी या महिला।"
अंत में उन्होंने कहा, "सरकारी नीतियों और नफरत से देश की आत्मा चिल्ला रही है। हर युवा और नागरिक शांति और मोहब्बत चाहता है। यह आंदोलन किसी एक दल का नहीं, बल्कि भारत के संविधान और लोकतंत्र को बचाने का सामूहिक संघर्ष है।"
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