रियलिटी टेलीविजन की दुनिया में प्यार की शुरुआत और अंत दोनों ही तेज़ी से होते हैं। कैमरे के सामने की गई वादे, ‘तुम मेरे लिए खास हो’ जैसे डायलॉग और बढ़ती नज़दीकियाँ दर्शकों को बाँध लेती हैं, पर शो के समाप्त होते ही वही रिश्ता सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सिमट जाता है। सवाल यह नहीं कि ये रिश्ते सच्चे हैं या नकली, बल्कि यह है कि क्या रियलिटी का माहौल किसी रिश्ते को वास्तविक जीवन की तरह जीने देता है।
वर्तमान में ‘बिग बॉस 20’ में कनिका मान और गुल्लू के बीच की नज़दीकी पर चर्चा चल रही है। घर के अन्य सदस्य दोनों को छेड़ते दिख रहे हैं, पर कनिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी रोमांटिक एंगल का हिस्सा नहीं बनना चाहती और अपना खेल अकेले खेलना चाहती हैं। फिर भी दर्शक कैमरे के फ्रेम में दो लोगों की बातचीत को प्रेम कहानी की शुरुआत मानने लगते हैं। यही रियलिटी शो का सबसे बड़ा खेल है। यहाँ भावनाएँ न सिर्फ महसूस की जाती हैं, उन्हें एडिट, म्यूजिक और कहानी के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है।
रियलिटी में प्यार सिर्फ निजी भावना नहीं रह जाता; वह शो का कंटेंट बन जाता है। दो लोग साथ बैठे—लव एंगल। झगड़े के बाद एक-दूसरे को मनाया—इमोशनल एंगल। किसी तीसरे ने सवाल पूछ लिया—लव ट्राएंगल। दर्शकों को कहानी चाहिए और शो को TRP। इस प्रकार रिश्ते धीरे-धीरे भावनाओं से ज्यादा कथानक का हिस्सा बन जाते हैं।
कभी-कभी यह कहानी प्रतियोगी स्वयं आगे बढ़ाते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि प्यार, तकरार और ब्रेकअप दर्शकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। कभी साथी खिलाड़ी मजाक में दो लोगों को जोड़ देते हैं। कभी सोशल मीडिया उस रिश्ते को नाम दे देता है और कभी शो की जरूरत किसी सामान्य दोस्ती को रोमांस में बदल देती है।
कनिका और गुल्लू के मामले में सबसे ज़रूरी बात यह है कि कनिका ने खुद रोमांटिक रिश्ते से इनकार किया है, फिर भी चर्चा जारी है। यह दर्शाता है कि दर्शक व्यक्ति की कही बात से ज्यादा उस कहानी पर भरोसा करते हैं जो उन्हें स्क्रीन पर दिखाई देती है।
‘स्प्लिट्सविला’ जैसे डेटिंग रियलिटी शो में प्रेम कहानी पूरे फॉर्मेट का केंद्र होती है। वहाँ रिश्ते बनते हैं, कनेक्शन चुने जाते हैं, वफादारी की परीक्षा होती है और अंत में कोई जोड़ी विजेता बनकर सामने आती है। दर्शक मान लेते हैं कि कैमरा बंद होने के बाद भी वैसा ही चलता रहेगा।
निहारिका तिवारी और सोराब बेदी का ब्रेकअप इस भ्रम को तोड़ता है। निहारिका ने बताया कि दोनों अब साथ नहीं हैं, पर उन्होंने यह भी कहा कि उनके बीच जो कुछ था, वह नकली नहीं था; अलग होना निजी विकास और मानसिक शांति के लिए आवश्यक था। किसी रिश्ते का खत्म होना यह साबित नहीं करता कि वह शुरू से ही झूठा था। कैमरे के सामने साथ रहना और कैमरे से दूर जीवन साथ बिताना दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
रियलिटी शो के रिश्तों पर चर्चा करते हुए हम अक्सर एक गलती करते हैं: जोड़ी बनते ही उन्हें ‘परफेक्ट कपल’ घोषित कर देते हैं और ब्रेकअप होने पर किसी को विलेन बना देते हैं। सोशल मीडिया पर फैंस पक्ष लेने लगते हैं, पुराने वीडियो निकाले जाते हैं, हर मुस्कान, हर कमेंट और हर अनफॉलो को सबूत की तरह पेश किया जाता है।
रियलिटी शो का सिस्टम भावनाओं को बेचता है। आँसू, ईर्ष्या, झगड़े और प्यार सबसे ज्यादा बिकते हैं। लेकिन इस पूरे कारोबार में अक्सर यह भूल जाता है कि स्क्रीन पर दिख रहे लोग भी इंसान हैं। उनके लिए किसी रिश्ते की शुरुआत सिर्फ एक एपिसोड नहीं, और उसका अंत सिर्फ वायरल कंटेंट नहीं होता।
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