चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचे हैं, BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए, और आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। इस मुलाकात को विश्व का ध्यान मिल रहा है, विशेषकर अमेरिका, भारत और चीन के नेताओं के बीच के संवाद पर।
यह सिर्फ राजनयिक मिलन नहीं, बल्कि कई आर्थिक मुद्दे भी agenda में हैं। रेयर अर्थ मिनरल्स, व्यापार घाटा, उर्वरक और भारतीय कंपनियों के निर्यात‑आयात से जुड़े सवालों पर चर्चा होने की संभावना है। चीन के विदेश मंत्रालय ने पहले ही संवाद और सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है।
रेयर अर्थ मिनरल्स – चीन रेयर अर्थ मिनरल्स का प्रमुख आयातक है, जो भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, EV, बैटरी, रक्षा और हाई‑टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए आवश्यक है। भारत इन सेक्टरों में उत्पादन तेज़ कर रहा है और सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहा है। पिछले टैरिफ के बाद चीन ने इन मिनरल्स की आपूर्ति रोक दी थी, जिससे भारतीय उद्योग को नुकसान हुआ था। इस बैठक में भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सप्लाई निर्बाध रहे।
चीन‑भारत व्यापार घाटा – भारत चीन से अधिक आयात करता है, जिससे वार्षिक ट्रेड डेफिसिट लगभग $115 बिलियन है। 2025 में दो देशों का द्विपक्षीय व्यापार $155.6 बिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल्स, APIs, सोलर उपकरण आदि चीन से खरीदता है। मोदी‑जिनपिंग वार्ता में भारत चाहता है कि चीन भारतीय निर्यात को और आसान करे, जैसा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार खोलने की पहल पर उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था।
ट्रेड इकोसिस्टम – वर्तमान जियो‑पॉलिटिकल तनाव में अमेरिका ने दोनों देशों पर टैरिफ की चेतावनी दी है, जबकि रूसी तेल की खरीद पर भी दबाव है। इस माहौल में दोनों पक्ष आपसी सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने, नियामक छूट देने और एक सहयोगी ट्रेड इकोसिस्टम बनाने पर चर्चा कर सकते हैं। इससे EV, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उत्पादन संभव हो सकेगा।
शिपमेंट और उर्वरक – भारत अभी भी विशेष उर्वरक मुख्य रूप से घरेलू स्रोतों से प्राप्त करता है, लेकिन सोलर, क्रिटिकल मिनरल्स आदि के लिए चीन पर निर्भर है। पिछले साल उर्वरक आपूर्ति में बाधा ने किसानों को कठिनाई में डाला था। इस कारण भारत चीन से निरंतर शिपमेंट की स्पष्ट गारंटी चाहता है।
मुलाकात की विशेषता – 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत‑चीन संबंधों में तनाव बढ़ा था, पर अब संवाद और व्यापारिक संपर्क धीरे‑धीरे सुधर रहे हैं। यह जिनपिंग का सात साल बाद भारत दौरा है, और BRICS शिखर में दोनों नेताओं की मुलाकात और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समूह अब 11 देशों का बना है, जिसमें मध्य‑पूर्व के कई देश भी शामिल हैं। इन देशों के साथ मिलकर डॉलर पर निर्भरता कम करना, निवेश‑व्यापार बढ़ाना और सप्लाई चेन को मजबूत करना प्राथमिक लक्ष्य रहेगा।
अंत में, दोनों देशों के बीच आर्थिक समझौते न केवल द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करेंगे, बल्कि वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत‑चीन सहयोग को नई दिशा देंगे।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!