नाम सुनते ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का चेहरा जेहन में उभरना स्वाभाविक है। लेकिन छपरा में एक ऐसे लालू प्रसाद यादव भी हैं, जिनका चुनावी सफर किसी राजनीतिक दल या बड़े नेताओं के सहारे नहीं, बल्कि अपनी जिद और लगातार कोशिश के भरोसे आगे बढ़ रहा है। वार्ड पार्षद से लेकर लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद और राष्ट्रपति पद तक के चुनाव में किस्मत आजमा चुके मढ़ौरा के लालू प्रसाद यादव ने अब सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र-03 से फिर नामांकन दाखिल किया है।
नामांकन की खबर मिलते ही उन्हें देखने और उनके चुनावी सफर के बारे में जानने वालों की भीड़ जुट गई। लालू प्रसाद यादव का कहना है, “जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक चुनाव लड़ते रहेंगे। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है।” यही जिद पिछले करीब ढाई दशक से उन्हें बार-बार चुनावी मैदान में ला रही है।
इसके बाद उन्होंने अलग-अलग समय पर विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के चुनावों में भी किस्मत आजमाई। राष्ट्रपति चुनाव भी उनके चुनावी सफर का हिस्सा रहा। वर्ष 2017 और 2022 में उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, आवश्यक प्रस्तावकों की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण दोनों बार उनका नामांकन आगे नहीं बढ़ सका। वर्ष 2022 में प्रस्तावकों की कमी के कारण उनका नामांकन रद्द हो गया था। वर्ष 2025 में भी उन्होंने मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया था। उनका कहना है कि वर्ष 2001 से उनका चुनावी सफर अलग-अलग चुनावों के साथ लगातार आगे बढ़ता रहा है।
करीब ढाई दशक लंबे उनके चुनावी सफर और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि की चर्चा चुनावी माहौल में अक्सर होती रही है। लगातार चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें अब तक जीत नहीं मिली, लेकिन उनका कहना है कि इससे उनका उत्साह कम नहीं हुआ है। एमएलसी बना तो पहले चीनी मिल चालू करवाऊंगा इस बार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे लालू प्रसाद यादव विकास और रोजगार को अपना प्रमुख मुद्दा बता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि वह एमएलसी निर्वाचित होते हैं तो मढ़ौरा चीनी मिल को शुरू कराने और क्षेत्र में कारखाने स्थापित कर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि पद मिलने के छह महीने के भीतर वह रोजगार के लिए कुछ ठोस नहीं कर पाए तो इस्तीफा देने पर भी विचार करेंगे। नाम की समानता से कई बार बने चर्चा का विषय लालू प्रसाद यादव के चुनावी सफर का सबसे दिलचस्प पहलू उनका नाम भी है। जब भी उनका नामांकन सामने आता है तो कुछ लोगों को पहले यह भ्रम होता है कि शायद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
वर्ष 2025 में मढ़ौरा से उनके नामांकन के दौरान भी नाम की समानता के कारण वह चर्चा में आए थे और सोशल मीडिया पर उनके नामांकन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी थी। हालांकि, मढ़ौरा के लालू प्रसाद यादव की अपनी अलग चुनावी पहचान है।
चुनाव दर चुनाव हार का सामना करने के बावजूद उन्होंने चुनावी मैदान नहीं छोड़ा। इस बार सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र-03 से नामांकन दाखिल कर उन्होंने एक बार फिर कहा है कि जब तक जीत नहीं मिलती, वह चुनाव लड़ते रहेंगे।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!