यूपी के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने यूपीतक के पॉडकास्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत पर खुली बात की। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता संगीत सोम से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपने बनते‑बिगड़ते रिश्तों को बेबाकी से बताया।
बालियान ने कहा कि 2014‑2017 के दौरान उनके और योगी जी के बीच बहुत अच्छे संबंध थे, जब दोनों संसद में साथ‑साथ होते थे। फिर 2017 में योगी जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद दूरी बढ़ गई, पर उन्होंने कहा, "यूं ही कोई बेवफा नहीं होता, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी।"
2015 में जब बालियान केंद्र में मंत्री थे, तब योगी जी ने उन्हें गोरखपुर में एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया था। बालियान ने बताया कि वह गोरखनाथ मठ के एक कॉलेज में छात्रों के कार्यक्रम में भाग लेने गये थे। 2017 में योगी जी के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें बहुत खुशी हुई, क्योंकि वे दोनों सांसद के रूप में अक्सर मिलते और चर्चा करते थे।
मुख्यमंत्री बनने के बाद रिश्ते बिगड़ने के कारणों पर बालियान ने कहा कि योगी जी अब उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े नेता हैं और उनका साथ‑साथ काम करना पहले जैसा नहीं रहा। "हां, पहले जैसा आना‑जाना नहीं रहा, लेकिन कुछ तो मजबूरियां रही होंगी," उन्होंने जोड़ दिया।
उत्तर प्रदेश के बुलडोजर मॉडल पर बालियान ने अपनी सरकार की आधिकारिक लाइन से अलग राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें बुलडोजर का महिमामंडन कभी पसंद नहीं आया। कानून अपना काम करे, यह ठीक है, पर बुलडोजर को शक्ति का प्रदर्शन और ब्रांड बनाना उन्हें सही नहीं लगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग भी बालियान ने जोरदार उठाई। उन्होंने बताया कि उनके गांव से इलाहाबाद हाईकोर्ट लगभग 750 किलोमीटर दूर है, जबकि लाहौर हाईकोर्ट दूरी के हिसाब से नजदीक पड़ेगा। 25 करोड़ की आबादी वाले यूपी में पश्चिम के लोगों को एम्स, हाईकोर्ट बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अभी भी तरसना पड़ रहा है।
2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से 24,000 वोटों के अंतर से हारने के बाद बालियान ने स्वीकार किया कि बसपा प्रत्याशी, राजपूत पंचायतों और अपनी कमियों ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि अगर सही समय पर राजनीतिक प्रबंधन किया जाता तो नतीजे अलग हो सकते थे।
पूर्व विधायक संगीत सोम के साथ रिश्ते पर बालियान ने कहा कि अब किसी की गलती का विश्लेषण करने वाले बहुत लोग हैं, "कारवां गुजर गया, बस गुबार देखते रहो"। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जन्मजात भाजपा कार्यकर्ता हैं और पार्टी के खिलाफ कभी नहीं गए। मतभेद हो सकते हैं, पर पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बालियान ने बताया कि उनका लखनऊ की राजनीति में कोई इरादा नहीं है और वे केंद्र की राजनीति में ही सहज हैं। उन्होंने कहा कि अमित शाह और सुनील बंसल की जातिगत समीकरणों की समझ से अगर बीजेपी चुनाव की कमान संभाल ले, तो पार्टी का रास्ता आसान हो जाएगा।
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