उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने पहले ही प्रोफेसर रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। दोनों ने बुधवार को अपना नामांकन दाखिल किया, पर तीसरे उम्मीदवार पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है।
सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने पहले ही वादा किया था कि पार्टी के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे सलीम शेरवानी को राज्यसभा भेजा जाएगा। लेकिन बुधवार को धनराज नथवानी के नाम को पेश करने से यह आशंका बढ़ गई कि अखिलेश यादव का निर्णय बदल गया है।
सलीम शेरवानी ने मंगलवार सुबह अखिलेश यादव से मुलाकात की और मीडिया को संकेत दिया कि उन्हें प्रत्याशी बनाने का आश्वासन मिला है। फिर भी, धनराज नथवानी के अचानक फाइनल होने के कारण सलीम शेरवानी का नामांकन अभी टल गया है।
सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव ने कहा है कि 2 अक्टूबर के बाद, यानी 3 अक्टूबर को तीसरे उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बुधवार को स्पष्ट किया कि वे तीसरे प्रत्याशी का नाम तभी घोषित करेंगे जब सभी नंबर (संख्या बल) पूरे हो जाएँ।
सपा में यह स्पष्ट हो चुका है कि पूर्व नौकरशाह आलोक रंजन अब इस रेस में नहीं हैं। इसलिए माना जा रहा है कि तीसरे उम्मीदवार के रूप में पार्टी किसी प्रमुख मुस्लिम चेहरे को दांव पर लगाएगी।
यदि सपा सलीम शेरवानी या किसी अन्य मुस्लिम नेता को मैदान में उतारेगी, तो यह पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करेगा। तीनों उम्मीदवारों का समीकरण तब साफ हो जाएगा: एक पिछड़ा (रामगोपाल यादव), एक सवर्ण (धनराज नथवानी) और एक मुस्लिम प्रत्याशी।
सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि मजबूत मुस्लिम चेहरे को प्रत्याशी बनाने से विरोधी और बीजेपी के सहयोगी दलों में मौजूद मुस्लिम विधायक से समर्थन जुटाना आसान होगा। जयंत चौधरी की आरएलडी में दो मुस्लिम विधायक, ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा में अब्बास अंसारी, और अनुप्रिया पटेल की पार्टी में रामपुर की स्वार सीट से एक मुस्लिम विधायक हैं।
इस प्रकार सपा मुस्लिम कार्ड के सहारे विपक्षी व सहयोगी दलों के मुस्लिम विधायक को लामबंद कर सकती है, जिससे क्रॉस‑वोटिंग या नैतिक समर्थन मिल सके।
धनराज नथवानी को प्रत्याशी बनाए जाने के तुरंत बाद, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने सपा पर हमलावर हो गई। AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि सपा मुसलमानों से वोट लेकर राज्यसभा में बीजेपी से जुड़े परिवारों को भेज रही है।
इसी बीच, पूर्व राज्यसभा सांसद व आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा ने भी अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग सवा घंटे चली और यूपी में राज्यसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच हुई।
यदि अखिलेश यादव सलीम शेरवानी को मैदान में उतारेंगे, तो वे AIMIM और अन्य विरोधी दलों द्वारा लगाए जा रहे ‘बी‑टीम’ के आरोपों को भी खारिज कर सकते हैं।
सभी की निगाहें अब तीसरे उम्मीदवार पर टिकी हैं और सलीम शेरवानी का नाम सबसे भारी दिख रहा है। देखना होगा कि 3 अक्टूबर को अखिलेश यादव इसी नाम पर मुहर लगाते हैं या फिर अपनी पुरानी रणनीति के तहत किसी नए चेहरे को सामने लाकर सियासी गणित को फिर उलझा देते हैं।
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