रैट माइनर्स की टीम ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों को बचाने की पेशकश की है. ये वही माइनर्स हैं जिन्होंने नवंबर 2023 में उत्तराखंड के सिलक्यारा-बेंड-बरकोट टनल में फंसे 41 मजदूरों को बचाया था.
मैकेनिकल ड्रिलिंग बार-बार फेल होने के बाद उन्होंने संकरी पाइप में घुसकर हाथों से मलबा हटाया. 17 दिनों बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला. अब नेपाल की आपदा में भी वे अपनी तरफ से मदद करना चाहते हैं.
26 अगस्त 2026 के अंत में नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर खिसकने से भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में भयंकर फ्लैश फ्लड आई. रसुवा और नुवाकोट जिलों में कम से कम 12 हाइड्रोपावर परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं. इनमें 5 निर्माणाधीन और सात चालू थीं.
कीचड़, बड़े पत्थर और मलबे ने सुरंगों के कई हिस्से बंद कर दिए या गिरा दिए. करीब 900 मजदूर लापता बताए जा रहे हैं जिनमें से लगभग 500 सुरंगों के अंदर फंसे हो सकते हैं. नेपाली सेना 19 हाइड्रोपावर सुरंगों में खोज और बचाव को प्राथमिकता दे रही है.
टीम की पेशकश और अनुभव
पुणे स्थित वॉलंटियर कोऑर्डिनेटर आनंद कंसल ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर माइनर्स की मदद लेने की अपील की है. उन्होंने कहा कि बाढ़ की खबरें और वीडियो देखकर टीम बहुत प्रभावित हुई. यह हाल के समय की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है.फरवरी 2025 में तेलंगाना के श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल टनल में भी 12 लोगों की टीम ने काम किया था जहां आठ मजदूर फंसे थे. वहां भी वे विशेष बचाव एजेंसियों के साथ मलबे भरी मुश्किल परिस्थितियों में काम कर चुके हैं.
क्यों जरूरी हैं रैट माइनर्स?
फिरोज कुरैशी ने कहा कि टीम तुरंत निकलने को तैयार है. वे जानते हैं कि परिवार वाले किस इंतजार में हैं. अगर नेपाल मदद मांगे तो आज ही जा सकते हैं, कल नहीं. सबसे युवा सदस्य मोनू कुमार ने बताया कि जहां भारी मशीनें नहीं पहुंच पातीं वहां उनके हाथ और औजार काम आ सकते हैं.
सिलक्यारा में भी मशीनें फेल हुई थीं तब इन्होंने आखिरी हिस्से को हाथ से खोदा था. नेपाल की सुरंगों में भी मलबा और पानी की वजह से मशीनों की सीमा साफ दिख रही है. इसलिए मैनुअल विशेषज्ञता बहुत उपयोगी साबित हो सकती है.
नेपाल में कई सुरंगों के मुहाने ही मलबे में दब गए हैं. बचावकर्मियों को पहले सुरंग का पता लगाना पड़ रहा है फिर अंदर पहुंचना. कुछ जगहों पर पानी निकालने, ऑक्सीजन पंप करने और नियंत्रित ब्लास्टिंग का काम चल रहा है. भारतीय और चीनी टीमें भी मदद कर रही हैं.
सिल्क्यारा के अनुभव वाले विशेषज्ञ आर्नोल्ड डिक्स भी सलाह दे रहे हैं. रैट माइनर्स की पेशकश भारत-नेपाल सहयोग का अच्छा उदाहरण है. अगर अनुमति मिलती है तो ये माइनर्स वहां जाकर उन जगहों पर काम कर सकते हैं जहां मशीनें नाकाम साबित हो रही हैं.
ये माइनर्स सामान्य मजदूर नहीं बल्कि खतरनाक और संकरी जगहों में काम करने के मास्टर हैं. सिलक्यारा ने उन्हें राष्ट्रीय हीरो बना दिया था. अब नेपाल की आपदा में वे फिर मानवता की सेवा के लिए आगे आए हैं. उनका कहना है कि अनुमति मिलते ही काम शुरू कर देंगे. नेपाल सरकार और भारतीय दूतावास के फैसले पर निर्भर है कि यह विशेषज्ञता कब मैदान में उतरती है. फिलहाल सुरंगों में फंसे मजदूरों के परिवार इंतजार कर रहे हैं. रैट माइनर्स मदद के लिए तैयार खड़े हैं.
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