मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) की नवीनतम प्रेशियस मेटल्स रिपोर्ट ने सोना‑चांदी के दीर्घकालिक रुझान को सकारात्मक बताया है। गिरावट के दौरान खरीदारी के अवसरों को उजागर किया गया है और दोनों धातुओं के लिए वैश्विक व घरेलू लक्ष्य स्तर प्रस्तुत किए गए हैं।
2026 में सोने की कीमत जनवरी में लगभग $5,600 प्रति औंस के रिकॉर्ड शिखर तक पहुंची, फिर तेज गिरावट के बाद $4,000 से नीचे आ गई। इसके बाद दोबारा सुधार देखी गई। चांदी ने भी $100 प्रति औंस के पार पहुंचने के बाद समान गिरावट का अनुभव किया। डॉलर‑रुपया दर में बदलाव ने भारतीय बाजार पर असर डाला।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में दिवाली‑धनतेरस के दौरान सोने की कीमत लगभग पाँच गुना बढ़ी है—2016 में ₹30,000 से 2026 में लगभग ₹1.5 लाख तक। त्योहारी माह में कीमतों का रिटर्न अक्सर त्यौहार‑के‑बाद के महीने से बेहतर रहा।
उच्च कीमतों के बावजूद वैश्विक गोल्ड ETF की होल्डिंग बढ़ी। अगस्त‑सितंबर 2026 में गोल्ड ETF की कुल होल्डिंग 4,256 टन तक पहुंची, जिसमें भारत में निवेश 71 % बढ़कर ₹4,450 करोड़ हो गया। सिल्वर ETF में भी ₹1,970 करोड़ का निवेश दर्ज हुआ। आयात में कमी के साथ भारत का सोना आयात अगस्त में $2.3 अर्ब से घटकर सितंबर में $1.8 अर्ब रहा।
MOFSL के रिसर्च हेड‑कमोडिटीज नवनीत दामानी ने बताया कि सोना वैश्विक आर्थिक व भू‑राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच एक डिफेंसिव एसेट बना हुआ है। निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीति, महंगाई, डॉलर और बॉन्ड यील्ड का प्रभाव रहेगा। हाल ही में फेड ने ब्याज दरें 3.75‑4 % के दायरे में बढ़ाई, जिससे सोने पर दबाव पड़ सकता है, जबकि निरंतर महंगाई और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी दीर्घकाल में समर्थन दे सकती है।
वैश्विक स्तर पर MOFSL के एनालिस्ट मानव मोदी और नवनीत दामानी ने सोने के लिए 3,800‑3,900 डॉलर प्रति औंस के दायरे को खरीदारी‑अनुकूल माना है। शॉर्ट‑टर्म लक्ष्य $4,200, मीडियम‑टर्म $4,500‑$4,700 तय किए गए हैं। कीमतों में गिरावट पर निवेशक क्रमिक रूप से खरीदारी बढ़ा सकते हैं, पर ये अनुमान बाजार स्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।
घरेलू बाजार में डॉलर‑रुपया दर 96 मानते हुए, 10 ग्राम सोने के लिए ₹1,35,000 को अनुकूल जोन बताया गया है। शॉर्ट‑टर्म लक्ष्य ₹1,48,000 और मीडियम‑टर्म ₹1,60,000‑₹1,68,000 के बीच रखा गया है। निवेशकों को तेज़ी के पीछे नहीं, बल्कि गिरावट के दौरान धीरे‑धीरे खरीदारी पर ध्यान देना चाहिए।
चांदी में सोने की तुलना में अधिक तेज़ी की संभावना है, पर अस्थिरता भी अधिक है। इसलिए निवेशकों को जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए पोर्टफोलियो में सोना‑चांदी की भूमिका को संतुलित रखना चाहिए।
रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि बताए गए लक्ष्य केवल बाजार‑अनुमान हैं, कोई गारंटी नहीं। निवेश से पहले अपनी जोखिम सहनशीलता, निवेश अवधि और वित्तीय जरूरतों को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
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