क्या आने वाले समय में बड़े एआई मॉडल और कंप्यूटिंग सिस्टम अंतरिक्ष में चलेंगे? स्पेसएक्स और टेस्ला के बॉस एलन मस्क की नई भविष्यवाणी ने इस चर्चा को तेज कर दिया है। मस्क का यह भविष्यवादी बयान ऐसे समय आया है, जब गूगल अपने प्रोजेक्ट सनकैचर के जरिए अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग की संभावनाओं को टेस्ट करने जा रहा है। क्या अंतरिक्ष ही भविष्य के एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का नया ठिकाना बन सकता है? आइए जानते हैं, गूगल और स्पेसएक्स की इस नई पहल के बारे में...
स्पेसएक्स और टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने कंप्यूटिंग पावर के भविष्य को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है। गूगल के सीनियर डायरेक्टर (पैराडाइम्स ऑफ इंटेलिजेंस) ट्रैविस बील्स के एक वीडियो को शेयर करते हुए मस्क ने कहा कि स्पेस में कंप्यूट की मात्रा जाहिर तौर पर कुल कंप्यूट के 100 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। इससे पहले 13 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मस्क ने संकेत दिया था कि स्पेस एक्स अगले साल एनवीडिया वीआर NLV72 एआई कंप्यूटर्स को अंतरिक्ष में लॉन्च करने की योजना बना रहा है।
गूगल ने इस कॉन्सेप्ट के लिए अलग-अलग तरह की ऑर्बिट पर विचार किया। इसमें जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट भी शामिल थी, लेकिन कंपनी के अनुसार, डॉन-डस्क ऑर्बिट इसके उद्देश्य के लिए ज्यादा उपयुक्त है। इस ऑर्बिट में सोलर पैनल्स को लगभग 24/7 सूरज की रोशनी मिलने की संभावना रहती है। इससे सैटेलाइट्स को लगातार सोलर एनर्जी मिल सकती है और लंबे समय तक कंप्यूटिंग सिस्टम चलाने में मदद मिल सकती है।
गूगल के सीनियम डायरेक्टर ट्रैविस बील्स के अनुसार, सबसे छोटे स्तर पर एक व्यक्तिगत सैटेलाइट में दर्जनों टीपीयू चिप्स लगाए जा सकते हैं। अगर ज्यादा बड़े और जटिल एआई वर्कलोड को संभालना हो, तो कई ऐसे सैटेलाइट्स को एक साथ जोड़कर क्लस्टर्स में उड़ाया जा सकता है। इस तरह कंप्यूटिंग क्षमता को जरूरत के हिसाब से बढ़ाने की संभावना तलाश की जा रही है।
गूगल का कहना है कि अंतरिक्ष को बड़े पैमाने पर एआई कंप्यूट के लिए इस्तेमाल करना एक ही मिशन में संभव नहीं होगा। पहले मिशन का फोकस यह पता लगाना है कि क्या काम करता है, कहां फेल्योर पॉइंट्स आते हैं और किन तकनीकी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है। इन शुरुआती मिशनों से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल भविष्य के मिशनों में किया जाएगा।
मस्क की ओर से शेयर किए गए वीडियो में गूगल के सीनियर डायरेक्टर ट्रैविस बील्स ने इस प्रोजेक्ट के पीछे की सोच को विस्तार से साझा किया। उन्होंने कहा कि यह आइडिया इतना पागलपन भरा लगता है कि जरूर कोई वजह होगी जिससे यह काम न करे। इसलिए हमने सबसे पहले वही वजह खोजने की कोशिश की। पता चला कि यह संभव है। असल में प्रोजेक्ट संकैचर एक सरल आइडिया है। हम सूरज से मिलने वाली प्रचुर ऊर्जा का इस्तेमाल करके ऑर्बिटल डेटा सेंटर्स के जरिए एआई
इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे कुशलता से स्केल कर सकते हैं?
गूगल ने स्पष्ट किया है कि स्पेस को स्केलेबल एआई कंप्यूट का जरिया बनाना एक दिन में संभव नहीं होगा। एक अक्तूबर को होने वाला पहला परीक्षण मिशन यह समझने के लिए है कि वहां क्या सही से काम करता है और कहां विफलताएं आती हैं। इन प्राथमिक निष्कर्षों और अनुभवों का उपयोग भविष्य के बड़े अंतरिक्ष मिशनों को डिजाइन करने में किया जाएगा
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