हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया और जेद्दा में भी मिसाइल अलर्ट जारी किया, जहाँ हाल ही में पहली THAAD यूनिट तैनात की गई थी।
रियाद से हूती‑नियंत्रित क्षेत्रों की दूरी लगभग 910 किमी और जेद्दा से 715 किमी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संघर्ष अब सीमा‑पार झड़प नहीं, बल्कि सऊदी के भीतर तक फैल चुका है। इस हमले में कम से कम 18 लोगों की मौत और 300 से अधिक घायल हुए; हवाई अड्डा 17 अक्टूबर तक बंद रहेगा।
OSINT टीम ने उन संभावित लक्ष्य स्थानों की पहचान की जहाँ हमले की संभावना थी और फिर हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला को ईरान तक ट्रेस किया। सऊदी ने अमेरिका से दो प्रमुख एअर डिफेंस सिस्टम – Patriot और THAAD – खरीदे हैं, फिर भी हूती ने इन सिस्टम को बायपास करके रियाद के हवाई अड्डे पर सफल प्रहार किए।
10 अक्टूबर का हमला पिछले एक दशक में सऊदी पर हुए सबसे गंभीर हमलों में से एक माना जाता है। पहले यह संघर्ष यमन की सीमा तक सीमित था, लेकिन अब राजधानी तक पहुँच गया है।
सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, हूती ने आबा, खमीस मुशैत, जिजान और नजरान जैसे नागरिक और आर्थिक महत्व के क्षेत्रों को निशाना बनाया है। CSIS की एक पुरानी स्टडी (जनवरी 2016‑अक्टूबर 2021) के अनुसार, सऊदी के भीतर 4,103 में से 80 % से अधिक हमले असीर, जिजान और नजरान में हुए, जहाँ एअर डिफेंस को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम होता है।
24 सितंबर को गठबंधन ने ताइफ और यानबू की ओर दागी गई छह बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोकने का दावा किया, जबकि 11 अक्टूबर को किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (दम्माम) पर भी हमला हुआ। इस तरह रियाद, ताइफ, यानबू और दम्माम जैसे विभिन्न शहरों में खतरा फैल चुका है।
हूती के हथियार भंडार में जुल्फिकार बैलिस्टिक मिसाइल, आसिफ (खलीज‑ए‑फार्स) और फालिक एंटी‑शिप बैलिस्टिक मिसाइलें, अल‑मंदब‑2 क्रूज मिसाइल, साथ ही समद‑3 और शिहाब ड्रोन शामिल हैं। ईरान की समर्थन से इन क्षमताओं में वृद्धि हुई है, पर अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि रियाद के हवाई अड्डे के हमले में कौन‑सा हथियार इस्तेमाल हुआ।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज ने चेतावनी दी है कि बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ कम‑ऊँचाई वाले ड्रोन का एक साथ उपयोग कई‑स्तरीय एअर डिफेंस प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। कम ऊँचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को पहचानने और प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम होता है।
खर्च का अंतर भी समस्या को बढ़ाता है। CSIS के आंकड़ों के अनुसार, Patriot सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला एक इंटरसेप्टर मिसाइल 10 लाख डॉलर से अधिक कीमत का हो सकता है, जबकि हूती के कुछ ड्रोन की कीमत केवल कुछ सौ डॉलर है। सऊदी को महंगे इंटरसेप्टर का उपयोग करके हर हमले को रोकना पड़ता है, जबकि हमलावर सस्ते ड्रोन से लगातार प्रहार करते रहते हैं।
भले ही सऊदी एअर डिफेंस अधिकांश हमलों को रोक ले, एक भी हथियार सुरक्षा घेरे को पार कर जाए तो हवाई अड्डे या तेल टर्मिनलों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे जनहानि और आवश्यक सेवाओं में व्यवधान हो सकता है। इस परिदृश्य से स्पष्ट होता है कि सऊदी की महँगी एअर डिफेंस व्यवस्था को कम‑कीमत वाले हथियारों से लगातार सामना करना पड़ रहा है, जिससे लागत‑प्रभावशीलता की नई चुनौती उत्पन्न हुई है।
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