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पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के प्रति भारत के सैन्य दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव दिखाया। उनके मुताबिक, इस कार्रवाई में सिर्फ सीमा के पास मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि पाकिस्तान के भीतर गहराई में मौजूद उन लोगों और ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई, जिन्हें आतंकवादियों का समर्थन करने वाला माना गया।
जनरल नरवणे ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर जरूरी कार्रवाई थी। उन्होंने बताया कि इससे पहले उरी और पुलवामा जैसे आतंकी हमलों के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई मुख्य रूप से सीमा के नजदीक स्थित आतंकी ठिकानों तक सीमित रही थी।
पूर्व सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें आतंकवादियों के खिलाफ उनके इलाके में जाकर कार्रवाई करने की बात कही गई थी। नरवणे के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर भारत के सैन्य तौर-तरीकों में एक बहुत महत्वपूर्ण बदलाव था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं होने का संदेश दिया गया।
पाकिस्तान के सिर क्रीक क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियों और कथित 'ऑपरेशन अबाबील' को लेकर पूछे गए सवाल पर नरवणे ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां होती रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्त होने के कारण उनके पास इस कथित अभियान की पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल हर गतिविधि पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर उचित समय पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात भी कही। पाकिस्तान की भारत से मुकाबला करने की क्षमता पर सवाल पूछे जाने पर पूर्व सेना प्रमुख ने सीधा जवाब दिया "मेरी राय में, नहीं।"
भारत-चीन संबंधों पर जनरल नरवणे ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के व्यापक संदर्भ में होने वाली विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता का 25वां दौर था। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा का वास्तविक निर्धारण अब तक नक्शे और जमीन दोनों स्तरों पर स्पष्ट रूप से नहीं हुआ है। इसी कारण दोनों देशों के बीच समय-समय पर विवाद की स्थिति बनती है।
भारतीय सशस्त्र बलों में थिएटर कमांड के गठन को लेकर नरवणे ने कहा कि इस पर चर्चा कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुई थी। उनके मुताबिक, थिएटराइजेशन कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह लगातार विकसित होने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है और फैसले लेने का समय लगातार कम हो रहा है। ऐसे में भारत में थिएटर कमांड की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना जरूरी है।
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