लोजपा (रा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण में जिन वर्गों को जो अधिकार और हक प्राप्त हैं, वे सुरक्षित रहने चाहिए। किसी दूसरे वर्ग की मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा अधिकारों में कटौती स्वीकार नहीं की जा सकती। सोमवार को पत्रकारों से चिराग ने कहा कि किसी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा। कुछ लोग एक ही वर्ग से आने वाले लोगों के बीच मतभेद पैदा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा जाति नहीं, जमात की बात की है। सभी समाज को एक साथ लेकर चलना है। ऊंची जातियों और सामान्य वर्ग के लोगों की भी अपनी समस्याएं और शिकायतें हो सकती हैं। सरकार को उनकी बात भी सुननी चाहिए। उनकी समस्याओं पर संवाद होना चाहिए। समाधान निकालने की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी का अधिकार छीनकर दूसरे को देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी, दोनों सही हैं। आरक्षण में कटौती की बात नहीं, पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। जिस जाति को जितना आरक्षण है, उसमें समीक्षा की आवश्यकता नहीं है। अगर एससी-एसटी में कौन पिछड़े हैं, उनको आरक्षण दिया जाए। जो आगे बढ़ गए हैं, उनको इस काम में मदद करना चाहिए।
आरक्षण पर छिड़ी जुबानी जंग के बीच सोमवार को राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है। समय-समय पर इसकी समीक्षा होनी चाहिए। समीक्षा की बात होती है तो इसमें क्या दिक्कत है। एक सवाल पर कहा कि आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा। यह कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा। पिछड़े वर्गों के लिए 1990-91 में जनता दल की सरकार में पीएम बीपी सिंह ने आरक्षण लागू किया तो पूरे देश में हंगामा हुआ था। दिल्ली में एक व्यक्ति ने आरक्षण के विरोध में शरीर में आग लगा ली थी।
इधऱ बिहार सरकार के एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान, दोनों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र में दोनों मंत्री हैं। दोनों को पता है कि जब तक इस देश में पीएम नरेन्द्र मोदी हैं, तब तक कोई आरक्षण को छू नहीं सकता। आरक्षण का नाम लेकर दलित का नेता बनने की होड़ मची हुई है। इनको लगता है कि आरक्षण का मुद्दा उठा लेंगे तो दलित का नेता बन जाएंगे।
लेकिन ईमानदारी से दलित का नेता बनना चाहिए। एक अंगुली उठाते हैं तो चार अंगुली उनकी ओर रहती है। मांझी व चिराग ने केवल अपने परिवार का विकास किया। दोनों को बताना चाहिए कि क्या वे परिवार का मोह त्यागने के लिए तैयार हैं। मांझी जी कहते हैं कि दलित समाज के 18 जातियों का विकास नहीं हुआ। वे बताएं क्या चार-पांच मुसहर समुदाय के लोगों को भी वे मुख्यधारा की राजनीति में ला सकते हैं।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!