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क्या वोटर लिस्ट सुधारने की प्रक्रिया अब नागरिकता की जांच बन गई है?- द लेंस

Ajay Tiwari
13 September 2026 0 47
क्या वोटर लिस्ट सुधारने की प्रक्रिया अब नागरिकता की जांच बन गई है?- द लेंस

इमेज स्रोत, Sanchit Khanna/Hindustan Times via Getty Images

भारत में पिछले 70 वर्षों में कुल 53 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है और देश के जाने-माने वैज्ञानिक चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव यानी कि सीएनआर राव उनमें से एक हैं.

हम उनकी चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इस हफ्ते की शुरुआत में 92 साल के राव को कर्नाटक में स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के तहत नाम में गड़बड़ी (सेल्फ़ नेम मिसमैच) को लेकर नोटिस दिया गया है.

इसके कारण एक बार फिर देश में जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. बता दें कि देश भर में तकरीबन 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं.

ऐसा क्यों हो रहा है कि स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर ने बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंका पैदा कर दी है और नागरिकता के कानूनी अर्थ को लेकर भी बहस छेड़ दी है. यह इसलिए भी है क्योंकि मतदाता सूची में वैसे तो हर साल संशोधन होता है.

बूथ लेवल ऑफ़िसर यानी बीएलओ होते हैं, राजनीतिक दलों के एजेंट होते हैं. नाम जोड़ने, हटाने और सुधार करने के लिए पूरी प्रक्रिया होती है. अगर यह पूरी व्यवस्था इतने सालों से काम कर रही थी तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि दिल्ली के तकरीबन एक तिहाई मतदाता ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट से बाहर हो गए या फिर महाराष्ट्र में एक ही बार में दो करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ़्ट सूची में नहीं रह गए.

सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि कितने नाम हटाए जा रहे हैं. सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या एसआईआर सिर्फ मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया है या फिर यह तय करने की प्रक्रिया बन रही है कि चुनाव में हिस्सा लेने का अधिकार किन लोगों के पास रहेगा.

अगर किसी नागरिक का नाम गलती से अंतिम मतदाता सूची से बाहर रह जाता है तो उसके पास क्या कानूनी और प्रशासनिक रास्ते होंगे. क्या इस पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही है

इन सवालों के जवाब के लिए बीबीसी हिन्दी के ख़ास कार्यक्रम 'द लेंस' में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़्म मुकेश शर्मा ने बात की एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली अंजलि भारद्वाज और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा से. अंजलि पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दों पर काम करती हैं और वह पीपुल्स राइट टू इन्फ़ॉर्मेशन के राष्ट्रीय अभियान की सह-संयोजक हैं.

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इस संदर्भ में पहला सवाल एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर है. क्या दिक्कत मतदाता सूची या निर्वाचक नामावली के संशोधन में है, या फिर मौजूदा चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर समस्या है?

इस सवाल के जवाब में अंजलि कहती हैं कि स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन का प्रावधान संविधान में है लेकिन यह किसी किसी ख़ास निर्वाचन क्षेत्र या उनके किसी ख़ास हिस्से में ही किया जाना चाहिए. अब चुनाव आयोग ने अचानक तय कर लिया कि हम पूरे देश में एसआईआर करेंगे.

वह कहती हैं, "जब 100 करोड़ लोगों को शामिल कर कोई काम किया जा रहा है तो ज़रूरी था कि पहले लोगों और राजनीतिक दलों से बात की जाती. लेकिन चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया. पहले के चुनाव आयोग खुद ऐसा करते रहे हैं. हमारे देश में इतने सारे पूर्व चुनाव आयुक्त हैं, जो इस पूरी प्रक्रिया को समझते हैं. चुनाव आयोग को उनसे भी बात करनी चाहिए थी."

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पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा भी इतने बड़े पैमाने पर एसआईआर के औचित्य पर सवाल उठाते हैं और इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नाम कटने पर भी.

वह कहते हैं कि किसी के शिफ़्ट करने पर, या किसी का नाम दो जगह होने पर, या किसी की मृत्यु होने पर मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया तो सामान्य बात है और हर साल की जाती है. स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन के ज़रिए करोड़ों लोगों की पहचान परेड करवाई जा रही है.

लवासा कहते हैं, "2024 के चुनाव में मतदाता संख्या करीब 98 करोड़ की थी. अब तक जो आंकड़े सामने आए हैं कि 14 करोड़ के करीब लोगों को निकाल दिया गया है या निकाले जाएंगे. एक तरफ तो आबादी बढ़ रही है और दूसरी तरफ हमारे मतदाताओं की संख्या घट रही है."

"जो ईपी रेशो (मतदाता, जनसंख्या का अनुपात) हिंदुस्तान में आज तक 98-99% होता था करीब 8-10% घट जाएगा. आखिर वो लोग कहां जाएंगे जिनका नाम इससे हटाया जाएगा. तो क्या जनगणना त्रुटिपूर्ण है? यह सब बहुत गहन सवाल हैं."

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जो लोग इस प्रक्रिया की आलोचना कर रहे हैं, उनका यह कहना है कि ऐसा लग रहा है कि इससे लोगों पर नागरिकता साबित करने का दबाव बनाया जा रहा है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है तो उसका नाम मतदाता सूची में क्यों हो?

इस सवाल के जवाब में अशोक लवासा कहते हैं कि ऐसे किसी भी व्यक्ति का नाम भारत की मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए जो भारत का नागरिक नहीं है. लेकिन मतदाता सूची में किसी वजह से शामिल हो गए ऐसे लोगों को निकालने की प्रक्रिया कानून में पहले से दी गई है.

वह कहते हैं, "कोई भी व्यक्ति यह विरोध कर सकता है, याचिका कर सकता है कि फलाना व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है और यह सबूत है जिससे उसकी नागरिकता पर शक किया जाए. उसके बाद एक नोटिस दिया जाता है और पूछताछ करके ईआरओ (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) उसका नाम हटा सकता है और विदेशी न्यायाधिकरण (फॉरनर्स ट्रिब्यूनल) को भेज सकता है."

"27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दो बातें कही गई हैं. एक तो यह कि चुनाव आयोग संवैधानिक दृष्टि से यह शक्तियां रखता है कि वो इस किस्म का गहन संशोधन कराए और दूसरी कि जिन-जिन के ऊपर नागरिकता की वजह से संदेह है, ऐसे सभी मामलों को चार सप्ताह के अंदर चुनाव आयोग विदेशी न्यायाधिकरण को रेफ़र करे."

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लवासा आगे कहते हैं, "उस आदेश को तो अब दो महीने से तीन महीने करीब हो गए, लेकिन अभी तक यह नहीं पता कि कितने लोगों का नाम उस ट्रिब्यूनल को रेफ़र किया गया है. इसका अर्थ यह हुआ कि गैर नागरिक को निकालने की मुहिम या जो उद्देश्य चुनाव आयोग ने रखा था, वो पूरा हुआ या नहीं हुआ या किस हद तक पूरा हुआ, इसके बारे में कोई आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं."

अंजलि भारद्वाज एसआईआर के उद्देश्य और चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल खड़े करती हैं. वह कहती हैं कि इस प्रक्रिया की ज़रूरत पर सवाल पूछे गए तो मौखिक रूप से चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ घुसपैठियों की समस्या है, सूची में गलत लोगों के नाम चढ़ गए हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में कहा कि हमने एक स्वतंत्र आकलन के आधार पर यह एसआईआर करवाने का फ़ैसला किया.

वह कहती हैं, "हमने आरटीआई के तहत उस स्वतंत्र आकलन की कॉपी मांगी तो चुनाव आयोग ने कह दिया कि हमारे पास तो ऐसी कोई सूचना भौतिक रूप में मौजूद नहीं है. फिर आरटीआई एप्लीकेशन में हमने कहा कि हमें उन फाइलों की कॉपी दिखा दीजिए जिनमें एसआईआर कराने का फ़ैसला है तो चुनाव आयोग ने कहा कि ऐसी फाइलें हमारे पास नहीं हैं. चुनाव आयोग के प्रिंसिपल सेकेट्री ने लिखित में कह दिया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर करने का कोई निर्णय लिया ही नहीं."

दिल्ली में करीब 60 लाख लोगों के नाम कटने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. इतनी बड़ी तादाद में फर्जी वोटिंग हो सकती है क्या? क्या यह आंकड़ा इतना बड़ा हो सकता है?

अंजलि भारद्वाज कहती हैं कि चुनाव आयोग आज के आंकड़े कह रहे हैं कि लगभग 58 लाख को पहले ही नाम कटने वाली सूची में डाला जा चुका है, 33 लाख लोगों को और नोटिस जारी कर दिए गए हैं. यानी कि एक करोड़ 56 लाख लोगों में से मतलब लगभग 60% लोगों के नाम गड़बड़ हैं, काटे जाने चाहिए.

वह पूछती हैं, "इसी सूची से चुनाव आयोग ने दिल्ली में फरवरी 2025 में चुनाव कराए हैं... अगर इतने ज़्यादा गलत मतदाता थे तो यह किसकी जिम्मेदारी है? चुनाव आयोग अभी तक क्या कर रहा था? देश में इतनी बड़ी धोखाधड़ी होने देने के लिए चुनाव आयोग में किसके ऊपर कार्रवाई की जा रही है?"

वह बंगाल चुनाव का उदाहरण देती हैं, "बंगाल चुनाव में एक लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी या तार्किक विसंगतियां की कैटेगरी बनाकर चुनाव आयोग ने लाखों लोगों के नाम हटा दिए. करीब 27 लाख लोगों की अपील ट्रिब्यूनलों के पास पहुंची. वह अपना काम कर पाते उससे पहले चुनाव हो गए और उनमें ये लोग मतदान नहीं कर पाए."

"अब जब ट्रिब्यूनल सुनवाई कर रहे हैं तो मालूम पड़ रहा है कि 90% से ज्यादा लोग गलत तरीके से काट दिए गए थे. उनको वापस मतदाता सूची पर डाला जा रहा है. कई निर्वाचन क्षेत्रों में जितने मतदाताओं के नाम काटे गए हैं वह जीत के अंतर से ज़्यादा हैं."

अशोक लवासा तार्किक विसंगतियां श्रेणी को अतार्किक बताते हैं.

वह कहते हैं, "अगर आपकी उम्र इस वक्त 60 साल है और किसी वजह से 2002 या 2003 के चुनावों में गलती से वह 42 की जगह 24 लिखी गई, उससे क्या फर्क पड़ता है? आपका मताधिकार एक क्लैरिकल ग़लती की वजह से छीना नहीं जा सकता."

"मैपिंग की प्रक्रिया को भी देखें. अगर मैं 2025-26 में निर्वाचक नामावली में हूं, और किसी वजह से मेरा नाम 2002 की सूची में नहीं है तो यह भी हो सकता है कि मैं वाकई उस वक्त रजिस्टर्ड नहीं था, उसके बाद हुआ था, तो क्या मेरा मतदान का संवैधानिक अधिकार छीन लिया जाएगा? यह तो कोई तर्कसंगत, न्यायसंगत बात नहीं है."

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क्या चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर इस समय प्रश्नचिह्न लगा है? अगर हां तो वह कैसे ठीक किया जा सकता है?

अशोक लवासा कहते हैं, "प्रश्न चिन्ह तो लगा है क्योंकि अखबार देखें, मीडिया देखें, कहीं न कहीं खबरें आती हैं, एडिटोरियल आते हैं कि एसआईआर से लोगों को कितनी परेशानियां हैं. यह अपने आप में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है और इस वजह से भी सवाल खड़े होते हैं कि इन्हें लेकर चुनाव आयोग का पक्ष क्या है? या चुनाव आयोग इन तकलीफों को दूर करने के लिए क्या प्रक्रिया अपना रहा है?"

"ये सब बातें सामने नहीं आ रही. मैंने पहले भी कहा, चुनाव आयोग को सामने आना चाहिए, अपना पक्ष रखना चाहिए कि क्या वो इतनी ज्यादा संख्या में लोगों को हटाने से संतुष्ट है या चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का जो पैमाना बना रखा है कि क्या-क्या देखेंगे जिससे माना जाएगा कि हमारी मतदाता सूची समावेशी, सटीक और संपूर्ण है. चुनाव आयोग का इसमें क्या पक्ष है, यह इनको सामने रखना चाहिए."

अंजलि भारद्वाज कहती हैं, "सबसे पहले तो चुनाव आयोग को पारदर्शिता से काम करना चाहिए. चुनाव आयोग ने कौन सा आंकड़ा दिया है लोगों को कि कितने घुसपैठिए पाए उन्होंने? कोई आंकड़ा अभी तक नहीं दिया चुनाव आयोग ने. पूरी तरह से गैर पारदर्शी तरीके से काम हो रहा है."

"दूसरा मनमानी नहीं हो सकती. आप पूरे देश में एसआईआर करा रहे हैं लेकिन बंगाल में अचानक आप कहते हैं कि जिनके नाम का मिलान नहीं हो रहा पुरानी सूची से क्योंकि नाम की स्पेलिंग में गलती है, हम उनको नोटिस भेजेंगे और तार्किक विसंगति के नाम पर उन्हें वोट नहीं देने देंगे. यह मनमानी नहीं होनी चाहिए."

वह कहती हैं, "इस बार जिस तरीके की प्रक्रिया अपनाई गई कि भले ही आपका ताज़ा मतदाता सूची में नाम है लेकिन अगर आप 2002 या 2003 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं दिखा सकते और अपने माता-पिता या अपना संबंध साबित नहीं कर सकते तो आपका नाम काट दिया जाएगा."

"यह तो एनआरसी की प्रक्रिया अपना रहा है चुनाव आयोग. यह एसआईआर की प्रक्रिया नहीं रही. चुनाव आयोग ने यह जो तरीका अपनाया है, जिस तरीके से किया है, जिस भगदड़ में किया है और इससे आज जो नतीजे सामने आ रहे हैं, इससे बहुत गंभीर सवाल उठ रहे हैं. चुनाव आयोग को समझना चाहिए कि इससे देश के चुनावी लोकतंत्र का बहुत दीर्घकालिक नुक़सान होगा."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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Senior Editorial writer covering tech innovations, space exploration, and emerging digital trends. Delivering deep analytical insights for premium global readers.

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क्रिकेट के मैदान पर वंदे मातरम: कांग्रेस बोली- आखिर इससे क्या हासिल होगा? नकवी से ट्रॉफी न लेने को बताया नाटक राजस्थान नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 7 निगमों में बढ़त, कांग्रेस दो में आगे, एक में निर्दलीयों को बढ़त भारत ने महिला एशिया कप जीता, पर नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार सऊदी अरब पर हूतियों का हमला, क्या मक्का समझौता तुर्की को इस युद्ध में घसीट सकता है? आओ मनाएं उत्सव, अंग्रेजी-उर्दू व फारसी... सब हैं हिंदी के माथे की बिंदी भारत ने एशिया कप फाइनल जीत, ट्रॉफी लेने से इनकार; पाकिस्तान के अधिकारी पर फैंस ने कहा ‘शाबाश सर लखनऊ‑कानपुर एक्सप्रेसवे पर एलीवेटेड रोड से मलबा गिरने की घटना सीमा रेलवे फाटक बंद करने के विरोध में कांग्रेस नेता हिरासत में, पुलिस बल तैनात नेकी करने निकला था, मिली फांसी की सजा: दवा पहुंचाने की मदद बनी सुजानपुर के युवक की सबसे बड़ी ‘गलती बिहार में UCC किसी कीमत पर नहीं होगा, अमित शाह के भाजपा शासित राज्यों में लागू करने वाली बात पर बोले जदयू MLA हिंदी किसी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं': अमित शाह बोले- दुनिया की भाषाएं सीखें, लेकिन मातृभाषा को कभी न छोड़ें भोजपुर के बिहिया फोरलेन पर मालवाहक ट्रक की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत, रिश्तों में हुआ कोहराम AGM के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयर ₹54 तक पहुंच सकते हैं, संभावित तेजी का संकेत पत्थर से कूंचकर हत्या, मुठभेड़ में 'ढाबा' का हाफ एनकाउंटर, पिस्टल सप्लाई-सट्टे का नेटवर्क पांच साल पहले जिस महिला का किया अंतिम संस्कार, वह जिंदा घर लौटी तीन महीने बंद रहेगा जाजमऊ का पुराना गंगापुल; डायवर्जन का ट्रायल शुरू, तीन जगह लगाए बैरियर AI के भविष्य में इंसानों का खतरा: मैट्रिक्स की भविष्यवाणी पर नया प्रकाश 429 रुपये का शेयर 6 दिन में 1700 रुपये के पार, 300% की तूफानी तेजी, अब इस कंपनी ने लगाया बड़ा दांव गुरुग्राम में हिट एंड रन: महिला बाइकर पर कार ने टक्कर मारकर फरार बंगाल में बदले जाएंगे सड़कों के नाम?: लेनिन, मार्क्स और हो ची मिन्ह सरणी को लेकर प्रस्ताव; कमेटी कर रही जांच हाथरस का ये दलित परिवार क्यों छोड़ना चाहता है गांव, 6 साल बाद कितना मिला न्याय? पत्नी का सिर काटकर फ्रिज में छिपाया, अब पुलिस से भागते वक्त आरोपी की हुई मौत, एक साल पहले हुई थी शादी बेगूसराय के सिमरिया सिक्सलेन पुल को ‘राणाभामा सेतु’ नाम देने की मांग, धरना पर चेतावनी क्या गोविंदा को दिल दे बैठी थीं अभिनेत्री? इश्क की चर्चा पर तोड़ी चुप्पी; कहा- मेरे माता-पिता... इंसानियत को फायदा नहीं, तो आगे बढ़ना बेकार: एआई की रफ्तार पर बोले सत्य नडेला, कहा- इंसानी नियंत्रण बेहद जरूरी कॉलेजों में अब नहीं चलेगी मनमानी! सरकार ने शुरू की नई मॉनिटरिंग व्यवस्था, हर महीने देनी होगी रिपोर्ट FATF की प्लेनरी से पहले पाकिस्तान ने मसूद अजहर को 70 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया सिगोड़ी में फंदे से मिला श्रमिक अजय मांझी का शव, ईंट-भट्टा मालिक पर हत्या का आरोप नवाज़ शरीफ़ की नातिन महनूर सफ़दर ने अजान जाब्बार से की शादी, दुल्हन का शाही लुक चर्चित बिहार में 15 जिलों पर बाढ़, केंद्रीय टीम 16 सितंबर को पहुंचेगी कई BJP‑JDS नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताई बखरी (बगुसराय) में गन्ने के खेत से 296 बोतल विदेशी शराब बरामद, पुलिस ने FIR दर्ज की साल में 4 बार बढ़े DA, 25% पर बेसिक पे में मर्जर की मांग, 16-18 सितंबर को पे कमीशन की मीटिंग शंकराचार्य का 102वां प्राकट्योत्सव: संत-भक्तों ने पादुका पूजन किया सहारा के नकली सिक्कों के सिंडिकेट में 6 रुपये के खर्च से 20 रुपये का नकली सिक्का, 12 रुपये में बेचा अक़्ल दाढ़ का क्या काम है और इसे निकलवाना कब ज़रूरी हो जाता है न धूम्रपान, स्ट्रोक ने छीन ली फिटनेस कोच के शरीर की ताकत; पता ही नहीं चल पाया कारण राहुल को उप‑कप्तान, पंत‑सिराज के बीच विकेटकीपर का फैसला: वेस्टइंडीज ODI सीरीज में बड़े बदलाव क्यों नहीं बेच सकता अपने शेयर एक्सचेंज पर? Tata Sons IPO से इन 6 कंपनियों की हो सकती है चांदी, आपका है किसी पर दांव? क्रिकेट के मैदान पर वंदे मातरम: कांग्रेस बोली- आखिर इससे क्या हासिल होगा? नकवी से ट्रॉफी न लेने को बताया नाटक राजस्थान नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 7 निगमों में बढ़त, कांग्रेस दो में आगे, एक में निर्दलीयों को बढ़त भारत ने महिला एशिया कप जीता, पर नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार सऊदी अरब पर हूतियों का हमला, क्या मक्का समझौता तुर्की को इस युद्ध में घसीट सकता है? आओ मनाएं उत्सव, अंग्रेजी-उर्दू व फारसी... सब हैं हिंदी के माथे की बिंदी भारत ने एशिया कप फाइनल जीत, ट्रॉफी लेने से इनकार; पाकिस्तान के अधिकारी पर फैंस ने कहा ‘शाबाश सर लखनऊ‑कानपुर एक्सप्रेसवे पर एलीवेटेड रोड से मलबा गिरने की घटना सीमा रेलवे फाटक बंद करने के विरोध में कांग्रेस नेता हिरासत में, पुलिस बल तैनात नेकी करने निकला था, मिली फांसी की सजा: दवा पहुंचाने की मदद बनी सुजानपुर के युवक की सबसे बड़ी ‘गलती बिहार में UCC किसी कीमत पर नहीं होगा, अमित शाह के भाजपा शासित राज्यों में लागू करने वाली बात पर बोले जदयू MLA हिंदी किसी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं': अमित शाह बोले- दुनिया की भाषाएं सीखें, लेकिन मातृभाषा को कभी न छोड़ें भोजपुर के बिहिया फोरलेन पर मालवाहक ट्रक की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत, रिश्तों में हुआ कोहराम AGM के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयर ₹54 तक पहुंच सकते हैं, संभावित तेजी का संकेत पत्थर से कूंचकर हत्या, मुठभेड़ में 'ढाबा' का हाफ एनकाउंटर, पिस्टल सप्लाई-सट्टे का नेटवर्क पांच साल पहले जिस महिला का किया अंतिम संस्कार, वह जिंदा घर लौटी तीन महीने बंद रहेगा जाजमऊ का पुराना गंगापुल; डायवर्जन का ट्रायल शुरू, तीन जगह लगाए बैरियर AI के भविष्य में इंसानों का खतरा: मैट्रिक्स की भविष्यवाणी पर नया प्रकाश 429 रुपये का शेयर 6 दिन में 1700 रुपये के पार, 300% की तूफानी तेजी, अब इस कंपनी ने लगाया बड़ा दांव गुरुग्राम में हिट एंड रन: महिला बाइकर पर कार ने टक्कर मारकर फरार बंगाल में बदले जाएंगे सड़कों के नाम?: लेनिन, मार्क्स और हो ची मिन्ह सरणी को लेकर प्रस्ताव; कमेटी कर रही जांच हाथरस का ये दलित परिवार क्यों छोड़ना चाहता है गांव, 6 साल बाद कितना मिला न्याय? पत्नी का सिर काटकर फ्रिज में छिपाया, अब पुलिस से भागते वक्त आरोपी की हुई मौत, एक साल पहले हुई थी शादी बेगूसराय के सिमरिया सिक्सलेन पुल को ‘राणाभामा सेतु’ नाम देने की मांग, धरना पर चेतावनी क्या गोविंदा को दिल दे बैठी थीं अभिनेत्री? इश्क की चर्चा पर तोड़ी चुप्पी; कहा- मेरे माता-पिता... इंसानियत को फायदा नहीं, तो आगे बढ़ना बेकार: एआई की रफ्तार पर बोले सत्य नडेला, कहा- इंसानी नियंत्रण बेहद जरूरी कॉलेजों में अब नहीं चलेगी मनमानी! सरकार ने शुरू की नई मॉनिटरिंग व्यवस्था, हर महीने देनी होगी रिपोर्ट FATF की प्लेनरी से पहले पाकिस्तान ने मसूद अजहर को 70 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया सिगोड़ी में फंदे से मिला श्रमिक अजय मांझी का शव, ईंट-भट्टा मालिक पर हत्या का आरोप नवाज़ शरीफ़ की नातिन महनूर सफ़दर ने अजान जाब्बार से की शादी, दुल्हन का शाही लुक चर्चित बिहार में 15 जिलों पर बाढ़, केंद्रीय टीम 16 सितंबर को पहुंचेगी कई BJP‑JDS नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताई बखरी (बगुसराय) में गन्ने के खेत से 296 बोतल विदेशी शराब बरामद, पुलिस ने FIR दर्ज की साल में 4 बार बढ़े DA, 25% पर बेसिक पे में मर्जर की मांग, 16-18 सितंबर को पे कमीशन की मीटिंग शंकराचार्य का 102वां प्राकट्योत्सव: संत-भक्तों ने पादुका पूजन किया सहारा के नकली सिक्कों के सिंडिकेट में 6 रुपये के खर्च से 20 रुपये का नकली सिक्का, 12 रुपये में बेचा अक़्ल दाढ़ का क्या काम है और इसे निकलवाना कब ज़रूरी हो जाता है न धूम्रपान, स्ट्रोक ने छीन ली फिटनेस कोच के शरीर की ताकत; पता ही नहीं चल पाया कारण राहुल को उप‑कप्तान, पंत‑सिराज के बीच विकेटकीपर का फैसला: वेस्टइंडीज ODI सीरीज में बड़े बदलाव क्यों नहीं बेच सकता अपने शेयर एक्सचेंज पर? 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