श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावे की नकदी गिनती को पूरी तरह से स्वचालित करने का निर्णय लिया है।
बुधवार को हुई बैठक में इस पहल को पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बनाने के लिए चर्चा की गई। ट्रस्ट का मानना है कि मानवीय हस्तक्षेप जितना कम होगा, पारदर्शिता उतनी ही बढ़ेगी।
इस उद्देश्य से दो प्रमुख बैंकों और IIT के विशेषज्ञों से प्रस्ताव माँगे गए हैं, जिनका तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन अब चल रहा है।
चढ़ावे चोरी के मामले के बाद ट्रस्ट ने गणना व्यवस्था में किसी भी तरह की गुंजाइश नहीं छोड़ने का निर्णय लिया है।
वर्तमान में ट्रस्ट और बैंक के कर्मचारी मैनुअल तरीके से नकदी और सिक्कों की गिनती करते हैं, जिससे समय अधिक लगता है और मानवीय भूल का खतरा बना रहता है।
नई व्यवस्था में हाई‑स्पीड नोट काउंटिंग मशीन, सिक्का गिनने वाली ऑटोमेटिक मशीन और डिजिटल मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग प्रस्तावित है।
मशीनों से गिनती के साथ-साथ चढ़ावे का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, और दान जमा होने से लेकर गणना कक्ष तक की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी की निगरानी में रहेगी।
इससे गिनती में लगने वाला समय घटेगा और ऑडिट तथा निगरानी भी आसान होगी। ट्रस्ट हर महीने चढ़ावे का ऑडिट कराता है।
दो बैंकों और IIT के प्रस्तावों का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन जारी है, और सबसे उपयुक्त व्यवस्था को लागू किया जाएगा। अगले एक-दो महीने में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
नई प्रणाली के बाद कर्मचारियों की संख्या और मानवीय हस्तक्षेप दोनों को कम करने की योजना है, जिससे कार्यभार घटेगा और गिनती का समय भी कम होगा।
राम मंदिर की व्यवस्थाएँ पहले से ही संस्थागत रूप से विकसित की गई थीं, परंतु समन्वय और अनुशासन की कमी के कारण कार्यप्रणाली में एकरूपता नहीं बनी।
विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से उपलब्ध मानव संसाधन को जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं, परंतु एकरूपता और व्यवस्थित कार्यप्रणाली स्थापित नहीं हो सकी।
सीईओ नियुक्ति के साथ प्रशासनिक नियंत्रण केंद्रीकृत होगा और कर्मचारियों में अनुशासन बढ़ने की उम्मीद है।
रामलला दर्शन के लिए निर्धारित अवधि और नि:शुल्क पास की व्यवस्था के बावजूद, काशी विश्वनाथ की तरह रामधामवासियों के लिए विशेष दर्शन सुविधा नहीं है।
संत‑महंतों और कुछ विशिष्ट जनों को दैनिक पास जारी होते हैं, परंतु उन्हें भी सामान्य पास लाइन से गुजरना पड़ता है। अलग लेन की मांग लंबे समय से की जा रही है, जिसे नई व्यवस्था में सुधारा जा सकता है।
नए पूर्णकालिक महासचिव महंत गोविंद देव गिरि की नियुक्ति और सीईओ के प्रति जवाबदेही की शर्तें भी तय की गई हैं।
1992 की घटना के बाद से राम मंदिर पर आतंकवादी निशाने रहे हैं, और 2005 में भी हमला हुआ। बढ़ते खतरे को देखते हुए SSF और NSG की तैनाती पर विचार हो रहा है।
सीईओ के रूप में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति से उनकी सुरक्षा अनुभव का लाभ उठाकर सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता किया जा सकता है। स्थायी सुरक्षा समिति के मानकों और मिश्र के अनुभव को आधार बनाकर नए सुरक्षा मानक तय किए जा सकते हैं।
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