नागपंचमी और श्रावण मास के तीसरे सोमवार के अवसर पर रामनगरी अयोध्या में सोमवार को आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्रीराम ने अपने तीनों भाइयों और अर्द्धांगिनी माता सीता के साथ रजत हिंडोले पर झूला विहार किया। रामलला के इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। विशेष दर्शन कर भक्त भावविभोर हो उठे और पूरा मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा। रामलला के झूलनोत्सव का आयोजन विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक उल्लास के बीच हुआ। श्रद्धालु प्रभु श्रीराम और उनके अनुजों को झूला झुलाते हुए भक्ति में लीन नजर आए। रामभक्तों ने भगवान के विशेष श्रृंगार के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना के साथ आस्था निवेदित की।
रामनगरी में नागपंचमी के अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य मंदिर और परकोटे की दक्षिणी भुजा के मध्य स्थित शेषावतार मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। यहां लक्ष्मण जी के शेषावतार स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शेषावतार की आराधना हुई। नागपंचमी और श्रावण के तीसरे सोमवार के एक साथ पड़ने से सुबह से ही रामनगरी के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
झूलनोत्सव का सबसे खास पहलू यह रहा कि राम मंदिर के करीब पांच सौ साल के इतिहास में पहली बार विराजमान रामलला अपने महल से निकलकर कुबेर टीला पर झूला विहार के लिए पहुंचे। इस ऐतिहासिक अवसर पर संतों और श्रद्धालुओं ने अनुजों संग झूले पर विराजित रामलला को झूला झुलाया। भावुक संतों और भक्तों की आंखें नम हो गईं। झूलनोत्सव के दौरान शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों और मधुर अलाप ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संगीतज्ञों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु भी भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।
उत्सव में मधुर उपासना परंपरा के आचार्यों द्वारा रचित पदों का गायन किया गया। इनमें अधिकांश पद युगल सरकार भगवान श्रीसीताराम को केंद्र में रखकर रचे गए थे। रामलला के तीनों अनुजों के साथ झूलन में विराजित स्वरूप के मुखोल्लास के लिए विशेष पदों का चयन किया गया। हनुमत निवास के महंत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण के संशोधन के बाद इन पदों का गायन हुआ। संगीतज्ञ सुमधुर शास्त्री के निर्देशन में आचार्य राधेश्याम दास, पंडित राम विनोद शरण व्यास और विवेकानंद पाण्डेय ने प्रस्तुति दी। मृदंग पर पंडित अभयराम दास और वैभव राम दास तथा तबले पर राम प्रिया शरण ने संगत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।
इस ऐतिहासिक झूलनोत्सव के साक्षी राम मंदिर ट्रस्टी एवं निर्मोही अखाड़ा महंत दिनेंद्र, अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन, मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास, राम कथा कुंज के महंत सत्यनारायण दास, श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास और व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्र समेत अन्य संत-महंत और श्रद्धालु बने।
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