पिछले 24 घंटे में गंगा‑यमुना के जलस्तर में गिरावट से तटवर्ती इलाकों के लोगों को थोड़ी राहत मिली, परंतु टोंस और मंदाकिनी के उफान ने फिर से चिंता बढ़ा दी। टोंस के खतरे के निशान से ऊपर बहने और तेज प्रवाह के कारण गंगा‑यमुना के जलस्तर पर भी असर पड़ रहा है। चित्रकूट में कहर मचाने वाली मंदाकिनी का पानी पहुँचने से प्रयागराज के नैनी में यमुना का जलस्तर भी बढ़ने लगा।
गंगा‑यमुना के जलस्तर बढ़ने से कछारी इलाके के 17 परिवारों ने राहत शिविर की ओर रुख किया। गंगा का जलस्तर बढ़ता रहेगा, तो कछारी के और भी परिवारों को अपने घर छोड़ने की सम्भावना है। गंगा और यमुना के किनारे हजारों मकानों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। टोंस और बेलन के जलस्तर के सामान्य से अधिक बढ़ने से कोरांव और मेजा के एक दर्जन से अधिक गांवों में पानी घुस गया है। रात आठ बजे तक फाफामऊ में गंगा आधा सेमी/प्रति घंटा और नैनी में यमुना दो सेमी/प्रति घंटा की गति से बढ़ रही थीं; इससे पहले यमुना की बढ़ने की गति 1.25 सेमी/प्रति घंटा थी।
हालाँकि गंगा‑यमुना अभी भी खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। बुधवार सुबह 24 घंटे के दौरान (मंगलवार सुबह 8 बजे से बुधवार सुबह 8 बजे तक) नैनी में यमुना 82.20 मीटर, फाफामऊ में गंगा 82.86 मीटर और छतनाग में गंगा 81.87 मीटर दर्ज किए गए। उसी अवधि में नैनी में 19 सेंटीमीटर, फाफामऊ में 2 सेंटीमीटर और छतनाग में 10 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर 12 बजे से पहले यमुना और शाम 4 बजे से गंगा में वृद्धि शुरू हुई।
सिंचाई विभाग के अनुसार, टोंस का जलस्तर 24 घंटे में 1.10 मीटर बढ़ा। शाम तक टोंस का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। विभाग के बाढ़ प्रखंड अभियंताओं का मानना है कि यदि टोंस का पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो गंगा‑यमुना के घटते जलस्तर का क्रम लंबा नहीं चल पाएगा। इस बार गंगा‑यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अधिक सतर्क हो गया है।
गंगा के जलस्तर बढ़ने के साथ राजापुर के तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सोमवार से घरों में पानी घुसने के बाद कई परिवारों ने ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में शरण ली है। बुधवार रात 8 बजे तक शिविर में 17 परिवारों के 64 लोग मौजूद थे। शिविर में रहने वाले लोगों को सुबह नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। घर छोड़कर शिविर में रहने के बावजूद पीड़ितों की चिंता कम नहीं हुई है; उन्हें अपने घर में छोड़े सामान और चोरी की आशंका सताती है।
पवन नगर की रहने वाली आशा देवी ने बताया कि उनके घर में तीन दिनों से पानी भरा है। घर का सामान छत पर रखकर वह बच्चों के साथ राहत शिविर में रह रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके दो बच्चे हैं और दोनों काम पर चले जाते हैं। इस कारण हर समय घर में रखे सामान की चिंता रहती है। बाढ़ के दौरान चोरी की घटनाओं का डर भी बना रहता है।
गंगा‑यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए बाघंबरी पीठाधीश्वर महंत बलवीर गिरि की ओर से राहत कार्य किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में जरूरतमंदों को भोजन प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित है; राहत सामग्री और भोजन की जरूरत को देखते हुए लोगों तक भोजन प्रसाद पहुंचाया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया।
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