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बागेश्वर बाबा के नाम से लोकप्रिय धीरेंद्र कृष्ण गर्ग (जिन्हें धीरेंद्र शास्त्री के नाम से भी जाना जाता है) ने रविवार को हावड़ा ज़िले के लिलुआ में दुर्गा पूजा के दौरान हिन्दुओं से शाकाहारी भोजन करने की अपील की थी.
धीरेंद्र शास्त्री की इस अपील को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद हो गया है. विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि प्रदेश की बीजेपी सरकार बंगाल की संस्कृति को अपमानित कर रही है.
पश्चिम बंगाल बीजेपी की स्टेट यूनिट के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने धीरेंद्र शास्त्री का नाम लिए बिना उस अपील को ख़ारिज कर दिया.
भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा, "बंगाली मछली और मांस कैसे नहीं खा सकते? स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि मां काली को मटन चढ़ाया जाएगा. अगर कोई विवेकानंद से ऊपर उठने की कोशिश करता है तो यह ख़तरनाक है. यह उनकी निजी राय है."
सामिक ने 30 वर्षीय धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का नाम नहीं लिया. धीरेंद्र बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी हैं.
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले के लिलुआ में तीन दिवसीय हनुमंत कथा में शामिल होने आए थे.
शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के एक ऑडिटोरियम सौजन्य में उनके लिए डिनर आयोजित किया था.
इस डिनर में कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री शामिल हुए थे. मुख्यमंत्री कार्यालय ने रविवार को एक्स पर इस कार्यक्रम की तस्वीरें पोस्ट कीं और धार्मिक नेता को बागेश्वर महाराज बताया.
रविवार को लिलुआ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था, "कृपया बुरा मत मानिए, लेकिन पश्चिम बंगाल की एक बात मुझे पसंद नहीं है. नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान पूजा पंडालों के पास नॉन-वेज खाना खाया जाता है. तरह-तरह का गंदा खाना बनाया जाता है."
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूँ कि आने वाली नवरात्रि में हर हिंदू जागे और ऐसे लोगों को बाहर निकाले. वे पवित्र नहीं हैं. वे धर्म का अपमान कर रहे हैं."
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इस वीडियो के वायरल होने के बाद बंगाली हिंदुओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. यह घटनाक्रम विश्व हिंदू परिषद के 26 अगस्त को दिए उस बयान के कुछ दिनों बाद हुआ, जिसमें कहा गया था कि दुर्गा पूजा पंडालों से नॉन-वेज खाना दूर रखा जाना चाहिए.
पश्चिम बंगाल बीजेपी एक बार फिर से बंगालियों के खाने को लेकर विवाद में घिर गई है.
इससे पहले मई में विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के नेताओं को या तो मछली के साथ प्रचार करना पड़ा था या सार्वजनिक रूप से मछली खानी पड़ी थी, ताकि उस समय सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के इस प्रचार का मुक़ाबला किया जा सके कि बीजेपी के सत्ता में आने पर बंगालियों को शाकाहारी बनने के लिए मजबूर किया जाएगा. भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी कभी कोई फरमान जारी नहीं करेगी.
भट्टाचार्य ने कहा, "पश्चिम बंगाल में लोग क्या खाएंगे और क्या पहनेंगे, इस पर हमें कुछ नहीं कहना है. बंगाली वही करेंगे जिसके वे आदी हैं. जो लोग धोती पहनना चाहते हैं, वे धोती पहनेंगे. जो लोग लुंगी पहनना पसंद करते हैं, वे लुंगी पहनेंगे. बंगाली मछली कैसे नहीं खा सकते? यह बात लगातार चलती जा रही है. कोई बाहर से आकर यहाँ क्या कहता है, इसकी चिंता क्यों करें?"
उन्होंने कहा, "किसी का लोगों से शाकाहारी बनने की अपील करना ग़लत नहीं है. शाकाहार को लेकर एक अभियान चल रहा है. कई लोग और यहाँ तक कि कुछ डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं. लेकिन कोई साधु या राजनीतिक पार्टी आपको यह कैसे बता सकती है कि आप घर में क्या खाएंगे? वह पूरे देश में सम्मानित और लोकप्रिय हैं. उन्होंने सिर्फ़ एक अपील की है."
एक्स और फ़ेसबुक पर ऐसी पोस्ट सामने आई हैं, जिनमें बंगाली हिंदुओं के लिए निर्देश देने की कोशिश करने को लेकर धीरेंद्र कृष्ण गर्ग की आलोचना की गई है.
पत्रकार और लेखक अभिजीत मजूमदार ने एक्स पर लिखा, "पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व का अपना बहुत मुखर स्वरूप है. यह हिंदू राष्ट्रवाद की जन्मस्थली है. यह शक्ति उपासना का भी केंद्र है. इसलिए दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास नॉन-वेज खाने के ख़िलाफ़ बागेश्वर धाम की अपील जानकारी की कमी पर आधारित है, ग़ैर-ज़रूरी है और इसका कोई असर नहीं होगा."
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धीरेंद्र की अपील पर बंगालियों को सत्यजीत रे की फ़िल्म महापुरुष और उसमें दिखाए गए पूरे आत्मविश्वास से भरे धर्मगुरु बिरिंची बाबा की याद आ गई.
एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, "बिरिंची बाबा वापस आ गए."
दूसरे ने पूछा, "सत्यजीत रे की कपुरुष ओ महापुरुष की याद आ रही है. बिरिंची बाबा याद हैं?" वहीं कुछ लोगों ने कहा, "नए ज़माने के बिरिंची बाबा!" और "बिरिंची बाबा... वाक़ई मौजूद हैं."
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ मंच साझा किया था और उन्हें राज्य में एक केंद्र स्थापित करने का न्योता दिया था.
अधिकारी ने कहा था, "दुर्गा पूजा के दौरान सरकार पश्चिम बंगाल और भारत की संस्कृति की रक्षा के लिए काम करेगी. बाबा महाराज जी, कृपया यहां एक केंद्र खोलिए. यहां बागेश्वर धाम का एक केंद्र भी होना चाहिए. यह संतों की धरती है. यह आध्यात्मिक जागरण की धरती है."
इसके बाद एक पोस्ट में इसका अपना टाइमलाइन दिया गया, ''बिरिंची बाबा को राजशेखर बसु ने 1920 के दशक में लिखा था, रे ने 1965 में महापुरुष बनाई थी और 2026 में बंगाल सरकार ने बागेश्वर बाबा का स्वागत किया.''
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शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार शाम दुर्गा पूजा आयोजकों के साथ बैठक में इस साल दुर्गा पूजा के लिए नियमों की घोषणा की है.
बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार 16 अक्तूबर से 21 अक्तूबर के बीच मनाया जाएगा. हालांकि, इस साल रेड रोड पर होने वाला पारंपरिक कार्निवल नहीं होगा. इसके बजाय कोलकाता और बंगाल के छह अन्य स्थानों पर रोड शो आयोजित किए जाएंगे. सभी मूर्ति विसर्जन 24 अक्तूबर तक पूरे करने होंगे.
कम बजट वाले दुर्गा पूजा आयोजक एक वैकल्पिक योजना के तहत एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता के पात्र होंगे. इसके लिए आवेदन स्थानीय पुलिस थानों में जांच के लिए जमा करने होंगे, जिसके बाद उन्हें मुख्य सचिव के कार्यालय भेजा जाएगा.
अधिकारी ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री के पद की शक्ति का दुरुपयोग नहीं करना चाहता. मैंने पहले ही कहा था कि छोटे पूजा आयोजकों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. जिनका बजट बड़ा है, मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि वे सरकारी फंड न लें. जो लोग आर्थिक सहायता के बिना पूजा आयोजित नहीं कर सकते, सरकार उनकी मदद करेगी."
मुख्यमंत्री की अहम बातें
पश्चिम बंगाल में हिंदू दुर्गा पूजा में नवरात्रि के दौरान नॉन वेज भी खाते हैं, जबकि उत्तर भारत के हिंदू व्रत रखते हैं. एक सर्वे के अनुसार पश्चिम बंगाल में 99 प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी पहली बार सत्ता में आई है. बीजेपी की पहचान हिन्दी भाषी राज्यों की सियासी पार्टी के रूप में रही है. ऐसे में बंगाल में बीजेपी की राजनीति को लेकर विपक्षी पार्टियां सवाल उठाती रही हैं.
बीजेपी नेता और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री सपन दासगुप्ता ने बीबीसी हिन्दी से 2021 में कहा था, ''बंगाल का हिन्दुत्व नॉन वेजिटेरियन है. यह उत्तर भारत से मेल नहीं खाता है. बंगाल में नवरात्रि में भी लोग मांसाहार करते हैं. हमने जय श्रीराम के नारे को यहाँ विरोध का नारा बना दिया. यहां जय श्रीराम कोई सांप्रदायिक नारा नहीं है. ममता बनर्जी को इस नारे से चिढ़ होती थी इसलिए हमने इसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया. उत्तर प्रदेश में जय श्रीराम का नारा अलग है. वहाँ हिन्दू गर्व से जुड़ा हो सकता है लेकिन बंगाल में विरोध का स्लोगन है.''
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