चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित परंदूर परियोजना को सीएम विजय ने रद्द कर दिया। लंबे समय से किसान और ग्रामीण इसका विरोध कर रहे थे। अब सरकार दूसरी जगह पर एयरपोर्ट बनाने के लिए विकल्प तलाशेगी। लेकिन सवाल है, परंदूर एयरपोर्ट का पूरा प्लान क्या था और अब चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट का भविष्य क्या होगा?
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चेन्नई के पास परंदूर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को तमिलनाडु सरकार ने रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की घोषणा के बाद डीएमके समेत विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया और विधानसभा से वॉकआउट किया। वहीं, लंबे समय से परियोजना का विरोध कर रहे स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने फैसले का स्वागत किया है।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने विधानसभा में घोषणा की कि उनकी सरकार परंदूर में एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों को छोड़ देगी। उन्होंने कहा कि चेन्नई की बढ़ती यात्री और कार्गो जरूरतों को देखते हुए नया एयरपोर्ट जरूरी है, लेकिन इसके लिए दूसरी जगह तलाश की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2025 में एगनापुरम और आसपास के गांवों का दौरा किया था और एयरपोर्ट का विरोध कर रहे लोगों की समस्याएं सुनी थीं। उन्होंने कहा कि वह परंदूर और आसपास के 12 गांवों के प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं।
परियोजना को रद्द करने की घोषणा तमिलनाडु विधानसभा में नियम 110 के तहत की गई। नियम 110 के तहत मुख्यमंत्री या कोई मंत्री किसी ऐसे विषय पर सदन में बयान दे सकता है जो तत्काल सार्वजनिक महत्व का हो। इस प्रक्रिया में सामान्य प्रस्ताव या विधेयक की तरह विस्तृत बहस जरूरी नहीं होती। परंदूर एयरपोर्ट को छोड़ने की घोषणा इसी प्रक्रिया के तहत की गई, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। डीएमके का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण और बड़े आर्थिक प्रभाव वाले फैसले पर सदस्यों को चर्चा या अपनी राय रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
चेन्नई में बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए परंदूर में दूसरा अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की योजना बनाई गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अगस्त 2022 में इसकी घोषणा की थी। प्रस्तावित एयरपोर्ट चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट से करीब 57 किलोमीटर दूर था। दरअसल, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट वह नया हवाई अड्डा होता है जिसे किसी नई जगह पर पूरी तरह शुरुआत से बनाया जाता है। इसमें जमीन तैयार करने से लेकर रनवे, टर्मिनल, टैक्सीवे, एप्रन और दूसरी जरूरी सुविधाएं नए सिरे से विकसित की जाती हैं।
परियोजना के लिए करीब 5,369 एकड़ यानी 2,172.73 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई थी। इसमें दो रनवे बनाने का प्रस्ताव था। प्रत्येक रनवे की लंबाई 4,040 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर रखी गई थी। इसके अलावा टैक्सीवे, एप्रन, आइसोलेशन बे, टर्मिनल भवन और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 27,000 करोड़ रुपये थी। इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना थी। अंतिम चरण में एयरपोर्ट की क्षमता सालाना 10 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था।
परियोजना को चेन्नई की तत्काल जरूरत के बजाय लंबे समय की विमानन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। शुरुआती चरण में सीमित क्षमता से संचालन शुरू करने और यात्री संख्या बढ़ने के साथ एयरपोर्ट का विस्तार करने की योजना थी। अंतिम चरण में 10 करोड़ यात्रियों की सालाना क्षमता का लक्ष्य इसलिए रखा गया था ताकि चेन्नई आने वाले कई दशकों के बढ़ते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को संभाला जा सके।
पूर्व तमिलनाडु सरकार के मुताबिक, चेन्नई में यात्रियों और कार्गो की आवाजाही लगातार बढ़ रही थी। मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट की क्षमता करीब तीन करोड़ यात्री सालाना बताई गई थी। द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम सरकार का कहना था कि औद्योगिक विकास, कारोबार, पर्यटन और माल ढुलाई बढ़ने के साथ चेन्नई में अतिरिक्त विमानन क्षमता जरूरी है। परियोजना दस्तावेज में नए एयरपोर्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों के लिए आवश्यक बताया गया था।
परियोजना के दस्तावेज में एयरपोर्ट से पर्यटन, व्यापार, वाणिज्य और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई थी। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को फायदा, राज्य के राजस्व में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की बात कही गई थी। निर्माण चरण में करीब 8,000 लोगों को अस्थायी रोजगार मिलने का अनुमान था। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद टर्मिनल और उससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर बनने थे।
थेन्नारसु के मुताबिक, एयरपोर्ट के लिए अलग-अलग स्थानों का अध्ययन किया गया था। दो रनवे बनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया और इसके बाद परंदूर को चुना गया। सरकार के लिए एक अहम बात यह भी थी कि नए एयरपोर्ट के लिए भविष्य में विस्तार की पर्याप्त गुंजाइश हो।
नहीं। परंदूर एयरपोर्ट को मीनांबक्कम एयरपोर्ट के स्थान पर बनाने की योजना नहीं थी। दोनों एयरपोर्ट के जरिए चेन्नई की विमानन जरूरतों को पूरा करने की योजना थी। यानी परंदूर का उद्देश्य मौजूदा एयरपोर्ट को हटाना नहीं, बल्कि चेन्नई की कुल यात्री और कार्गो क्षमता बढ़ाना था।
परंदूर परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण शुरुआती मंजूरियां मिली थीं। अगस्त 2024 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तमिलनाडु सरकार की कंपनी टीआईडीसीओ को परंदूर में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विकास के लिए स्थल मंजूरी दी थी। इसके बाद 7 अप्रैल 2025 को टीआईडीसीओ को अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति, 2008 के तहत जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, वित्तीय व्यवस्था और पर्यावरण संबंधी मंजूरियों सहित परियोजना को लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित विकासकर्ता या राज्य सरकार की होती है।
परियोजना केवल प्रस्ताव के स्तर पर नहीं थी। जमीन अधिग्रहण और जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। डीएमके नेता थंगम थेन्नारसु के अनुसार, परियोजना के लिए जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, उन्हें मुआवजा भी दिया जा चुका था। अब परियोजना रद्द होने के बाद अधिग्रहित जमीन के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। इस जमीन का आगे किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा, यह राज्य सरकार को तय करना होगा।
परंदूर और आसपास के गांवों के किसान और ग्रामीण परियोजना की घोषणा के बाद से लगातार विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि एयरपोर्ट के लिए जमीन जाने से खेती और उनकी आजीविका प्रभावित होगी। चिन्हित 5,369 एकड़ क्षेत्र में करीब 47.6 प्रतिशत जमीन उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि बताई गई थी, जहां साल में तीन फसलें होती थीं। इसके अलावा परियोजना क्षेत्र का करीब एक चौथाई हिस्सा झीलों, नहरों और अन्य जल निकायों से जुड़ा था। इसलिए विरोध सिर्फ जमीन अधिग्रहण का मामला नहीं था। किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जल निकायों, खेती और स्थानीय पर्यावरण पर असर को भी बड़ा मुद्दा बनाया। एगनापुरम और आसपास के गांवों के लोग 1,000 दिनों से ज्यादा समय तक परियोजना के खिलाफ आंदोलन करते रहे।
जोसेफ विजय सत्ता में आने से पहले भी परंदूर परियोजना का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने जनवरी 2025 में प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से मुलाकात की थी और कहा था कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए कृषि भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और लोगों की आजीविका की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए। उन्होंने अक्तूबर 2024 में भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह औद्योगिक विकास और एयरपोर्ट के महत्व के विरोधी नहीं हैं, लेकिन परंदूर को एयरपोर्ट के लिए उपयुक्त जगह नहीं मानते।
डीएमके का कहना है कि परंदूर को चुनने से पहले कई विकल्पों का अध्ययन किया गया था और परियोजना पर काफी काम हो चुका था। पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने फैसले को तमिलनाडु के विकास के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण लगभग पूरा हो चुका था और कई तैयारियां तथा मंजूरियां मिल चुकी थीं। उनका तर्क है कि अब नई जगह तलाशने और जमीन अधिग्रहण से लेकर मंजूरियों तक की प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी, जिससे एयरपोर्ट परियोजना में देरी हो सकती है और निवेश व रोजगार पर असर पड़ सकता है। पूर्व मंत्री थंगम थेन्नारसु ने भी कहा कि परियोजना छोड़ने से आर्थिक नुकसान हो सकता है और उद्योग पड़ोसी आंध्र प्रदेश की ओर जा सकते हैं।
परंदूर परियोजना रद्द होने के बाद चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की योजना खत्म नहीं हुई है। तमिलनाडु सरकार अब नई जगह की तलाश करेगी। राज्य की उद्योग नीति के मुताबिक, नए एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक स्थान विशेषज्ञों से सलाह लेकर चिन्हित किए जाएंगे। इसके बाद इन स्थानों की व्यवहार्यता का अध्ययन एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया करेगी। व्यवहार्यता रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की प्रक्रिया तय करेगी। इसके साथ ही मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने पर भी काम होगा। एएआई ने मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट के उत्तर-पश्चिम हिस्से में नया यात्री प्रबंधन तंत्र विकसित करने की योजना बनाई है। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण की अनुमति भी मांगी गई है।
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