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दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर यौन हमले का आरोप लगाया.
महिला पत्रकार के मुताबिक़, आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा और उन्हें धक्का देकर वहां से चले गए.
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें महिला पत्रकार अपनी बात कह रही हैं.
वीडियो में महिला पत्रकार ने दावा किया कि वह शिकायत दर्ज कराने के लिए दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने पहुंचीं, लेकिन क़रीब साढ़े तीन घंटे इंतज़ार करने के बाद भी उनकी शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई.
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर वहां मौजूद बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा को बताया कि इस संबंध में शिकायतें ले ली गई हैं. सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
महिला पत्रकार ने कहा कि उनके समर्थन में कई पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थाने के बाहर बैठे हैं, लेकिन पुलिस की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
इस मामले में सीजेपी ने पत्रकारों से रविवार सुबह 11 बजे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने पहुंचने का आह्वान किया है.
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सीजेपी की लीगल अफ़ेयर्स हेड रत्ना सिंह ने पूछा है कि क्या दिल्ली पुलिस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय एसीपी को बचा रही है?.
रत्ना सिंह सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न के मामले में एफ़आईआर दर्ज करने से मना कर दिया है."
"इसके बजाय, पुलिस का कहना है कि वे एफ़आईआर दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच करना चाहते हैं और सीसीटीवी फ़ुटेज देखना चाहते हैं. इससे ललिता कुमारी के फ़ैसले में दिए गए नियमों का पालन करने को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं."
उन्होंने कहा, "कल, सभी (स्वतंत्र) पत्रकार और जवाबदेही में विश्वास रखने वाले लोग सुबह 11 बजे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा हों. यौन उत्पीड़न की शिकायत को पुलिस के इस फ़ैसले का इंतज़ार नहीं करना चाहिए कि एफ़आईआर दर्ज करनी है या नहीं."
रत्ना सिंह ने कहा कि जब तक हर महिला सुरक्षित नहीं है, तब तक कोई भी महिला सुरक्षित नहीं है.
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सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने भी कहा कि कई पत्रकार और अन्य प्रदर्शनकारी 5 अक्तूबर को मामले में समर्थन के लिए सामने आएंगे और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि संबंधित पुलिसकर्मी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हो.
सौरव दास ने एक्स पर लिखा, "पुलिस ने हमसे लिखित शिकायत और वीडियो की जांच करने के लिए कुछ समय मांगा है. हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे."
सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि इस मामले पर तुरंत एफ़आईआर होनी चाहिए.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "क़ानून के अनुसार तुरंत एफ़आईआर होनी चाहिए! इन अफ़सरों पर दिल्ली की महिलाएं भरोसा करेंगी अपनी सुरक्षा के लिए?"
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देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.
राहुल गांधी ने दिल्ली महिला पत्रकार के आरोपों के बाद इस मामले में पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाया है.
राहुल गांधी ने शनिवार देर रात एक्स पर लिखा, "जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है. घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ़ इतनी माँग लेकर बैठे हैं कि एफ़आईआर दर्ज कर ली जाए. ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया."
उन्होंने कहा, "आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए. महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं. कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए. और ये पहली बार नहीं है. इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफ़सर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं."
राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है.
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