विपक्ष ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग तेज कर दी। यह मांग उस रिपोर्ट के बाद उठी, जिसमें बताया गया कि चुनाव आयोग के कुछ निर्णयों के बारे में आयुक्तों को समय पर जानकारी नहीं दी गई थी।
चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियाँ होना सामान्य प्रक्रिया है, और एसआईआर सहित पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं।
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल विवादों से भरा रहा। 2025 में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला, परंतु उनके कई निर्णयों को विपक्ष ने निशाना बनाया।
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। 31 जनवरी 2024 को वे यूनियन कोऑपरेशन सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए, और उसी वर्ष के मार्च में उन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया।
15 मार्च को उन्होंने चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला और अगले दिन चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।
लगभग एक वर्ष बाद उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया, और उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक चलेगा। इस अवधि में 20 विधानसभा चुनाव, 2027 के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव तथा 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी शामिल है।
उन्होंने गृह मंत्रालय में पाँच साल काम किया, जहाँ 2016 से 2018 तक संयुक्त सचिव और 2018 से 2021 तक अतिरिक्त सचिव के पद पर रहे।
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के रद्दीकरण की घोषणा में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और 2020 में जम्मू‑कश्मीर के मामलों की देखरेख की।
मोदी सरकार ने उन्हें नौकरशाह के रूप में भरोसा किया, और उन्हें जम्मू‑कश्मीर पुनर्गठन विधेयक तथा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में शामिल किया।
कोऑपरेशन सेक्रेटरी के रूप में उन्होंने मल्टी‑स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ (एमएससीएस) (संशोधन) विधेयक 2023 पारित किया, जिसका उद्देश्य कोऑपरेटिव सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था।
चुनाव आयुक्त रहते हुए 2024 में लोकसभा चुनाव और जम्मू‑कश्मीर में पहली विधानसभा चुनाव हुए, साथ ही हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और दिल्ली में विधानसभा चुनाव भी हुए।
ज्ञानेश कुमार ने IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया और चार्टर्ड फ़ाइनैंशियल एनालिस्ट्स ऑफ़ इंडिया से बिज़नेस फ़ाइनैंस में अध्ययन किया।
कांग्रेस ने उनकी नियुक्ति पर विरोध जताया। वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि मोदी सरकार द्वारा 2023 में लाया गया ‘द चीफ़ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर एक्ट’ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को चुनने वाले पैनल में प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं, साथ ही गृह मंत्री और विपक्षी नेता भी शामिल होते हैं। सरकार ने कांग्रेस की आपत्ति को नज़रअंदाज़ करते हुए बैठक की और ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया।
यह पहली बार था जब नया कानून लागू हुआ। 2024 में ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को इसी कानून के तहत चुनाव आयुक्त चुना गया। नया कानून सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के निर्णय के बाद आया, जिसमें चयन पैनल में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को रखने का आदेश था।
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