‘पंचायत आजतक अयोध्या’ के मंच पर आयोजित ‘अयोध्या कितनी बदली?’ विशेष सत्र में महंत राजू दास, स्वामी करपात्री महाराज, जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य और कई अन्य धर्माचार्य ने भाग लिया। उन्होंने अयोध्या के सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक बदलावों पर विस्तृत चर्चा की।
संतों ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था और बुनियादी ढाँचे में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। सड़क, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सुविधाओं और पर्यटन सुविधाओं में तेज़ी से विकास हुआ है, जिससे शहर की छवि में नाटकीय बदलाव आया है।
राम मंदिर में कथित चोरी के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया। संतों का कहना है कि चोरी की खबर बैंक लेन‑देन से जुड़ी गड़बड़ी के कारण आई थी, न कि मंदिर परिसर या पुजारियों की लापरवाही से। इस विषय में FIR दर्ज कर उचित कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन‑मॉडल की संतों ने सराहना की। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने शांति, सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और अयोध्या को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली शहर के रूप में स्थापित किया है।
‘लाठी‑गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ के संकल्प को महंत राजू दास ने स्मरण कर कहा कि यह दृढ़ता आज भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में साकार हो चुकी है। उन्होंने 1990 की घटनाओं में शहीद हुए रामभक्तों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका बलिदान कभी नहीं भुलाया जाएगा।
जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने अयोध्या के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि प्राचीन काल में महाराजा विक्रमादित्य ने इस नगर के 196 पवित्र स्थलों का पुनरुद्धार कराया था। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद आधुनिक अयोध्या का विकास उसी पुनरुद्धार की नई लहर है।
श्रीराम मंदिर के निर्माण और दीपोत्सव जैसे आयोजनों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दी है। देश‑विदेश से लाखों श्रद्धालु आने से होटल, परिवहन, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिससे अयोध्या के लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।
संतों ने कहा कि अयोध्या केवल एक भू‑खंड नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। यह नगरी विश्व को धर्म, शांति और मानवता का संदेश देती है।
राजनीतिक टिप्पणी में संतों ने कहा कि अयोध्या में चुनावी परिणाम स्थानीय उम्मीदवारों की वजह से हुए, न कि जनता की रामभक्ति में कमी के कारण। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे राम के अस्तित्व को नकारते हुए अब मंदिर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
अंत में, संतों ने विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि यदि उन्हें सनातन धर्म और मंदिरों की वाकई चिंता है तो वे मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि के भव्य मंदिर निर्माण का समर्थन करने आएँ। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक मॉडल है, जिसे सभी को मिलकर दोहराना चाहिए।
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