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"अब सिर्फ़ मोदी सरकार और ख़ुद मोदी ही हमारे बेटे को बचा सकते हैं. मदद के बाकी सभी रास्ते बंद हो चुके हैं. हमने सभी अदालतों का दरवाज़ा खटखटाया, यहां तक कि सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट का भी, लेकिन उसकी सज़ा बरक़रार है."
ये शब्द पठानकोट के सुजानपुर इलाके के फ़िरोज़पुर कलां गांव के रहने वाले बलजिंदर सिंह के बुज़ुर्ग माता-पिता के हैं.
बलजिंदर सिंह को सऊदी अरब में कथित तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई है. अब उनका परिवार भारत सरकार और पंजाब सरकार से मदद की अपील कर रहा है.
बलजिंदर सिंह सऊदी अरब में ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम करते थे.
पंजाब में बलजिंदर सिंह के घर पर लगातार रिश्तेदारों, पत्रकारों और दूसरे लोगों का आना-जाना लगा हुआ है. घर में उनके बुज़ुर्ग माता-पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं. परिवार के लोगों के चेहरों पर चिंता और बेबसी साफ़ दिखाई देती है.
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परिवार के मुताबिक़, बलजिंदर सिंह 2024 से सऊदी अरब की जेल में बंद हैं. इससे पहले वह 2017 से रोज़गार के सिलसिले में दुबई में रह रहे थे और ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम करते थे.
परिवार का कहना है कि 2023 में छुट्टी बिताने के बाद वह फिर विदेश चले गए थे.
परिवार के मुताबिक़, 6 फ़रवरी 2024 को बलजिंदर सिंह ट्रक से दुबई से सऊदी अरब जा रहे थे. सऊदी सीमा से पहले वह एक जगह कुछ देर के लिए रुके थे. वहां एक व्यक्ति ने उन्हें सऊदी अरब में रहने वाले अपने बुज़ुर्ग पिता का वीडियो दिखाया और उनसे दवा का एक पैकेट वहां पहुंचाने की गुज़ारिश की.
परिवार का कहना है कि बलजिंदर बीमार बुज़ुर्ग के लिए दवा पहुंचाने के मक़सद से वह पैकेट ले गए थे.
हालांकि, दुबई-सऊदी सीमा पर ट्रक की तलाशी के दौरान उस पैकेट से कथित तौर पर नशीले पदार्थ बरामद हुए. इसके बाद बलजिंदर सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया.
परिवार के मुताबिक़, पैकेट लेने के लिए सऊदी अरब आने वाले व्यक्ति को भी इस मामले में गिरफ़्तार किया गया था. परिवार का कहना है कि मुक़दमे की सुनवाई के दौरान उसे भी मौत की सज़ा सुनाई गई.
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बलजिंदर के पिता जसविंदर सिंह का कहना है कि उनका परिवार पहले सामान्य और ख़ुशहाल ज़िंदगी जी रहा था. उनके दो बेटे हैं और दोनों विदेश में काम करते हैं. परिवार ख़ुद को अमृतधारी गुरसिख परिवार बताता है.
लेकिन अब बलजिंदर की गिरफ़्तारी के बाद पूरे परिवार की ज़िंदगी बदल गई है. जसविंदर सिंह कहते हैं, "हमने अलग-अलग अदालतों में मुक़दमा लड़ने की कोशिश की. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मौत की सज़ा बरक़रार रखी है."
इसके बाद अब परिवार की उम्मीद भारत सरकार पर टिकी है.
बलजिंदर की पत्नी सुनील लता कहती हैं कि जिस दिन से उनके पति को गिरफ़्तार किया गया है, उसी दिन से घर के हालात बदल गए हैं.
हालांकि, बलजिंदर की जेल से हफ़्ते में एक या दो बार फ़ोन पर बात हो जाती है, लेकिन परिवार हर दिन इस उम्मीद में दुआ करता है कि कोई अच्छी ख़बर आएगी.
सुनील लता के मुताबिक, "हम पंजाब में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं से मिल चुके हैं. इसके अलावा, मदद के लिए भारत के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ईमेल भेजे हैं."
दुबई में रहने वाले बलजिंदर के छोटे भाई ने भी भारत सरकार को ईमेल और भारतीय दूतावास को चिट्ठी भेजकर मदद की अपील की है.
लेकिन परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.
सुनील लता कहती हैं, "मेरे पति ने कभी नशा नहीं किया और भारत में उनके ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज नहीं है. बलजिंदर अमृतधारी गुरसिख हैं और वह सिर्फ़ एक बीमार बुज़ुर्ग के लिए दवा का पैकेट ले जा रहे थे."
सुनील लता बताती हैं कि उनकी 12 साल की एक बेटी है. उनका एक छोटा बेटा भी है जो बार-बार अपने पिता के बारे में पूछता है.
उनका कहना है कि बच्चों के कई सवालों के जवाब उनके पास नहीं हैं. दूसरी ओर, इस सदमे के कारण बुज़ुर्ग माता-पिता की तबीयत भी ख़राब रहने लगी है.
अब परिवार का कहना है कि सऊदी अरब में बलजिंदर सिंह की मौत की सज़ा बरक़रार रहने के बाद अब उनकी आख़िरी उम्मीद केंद्र सरकार से है.
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बलजिंदर सिंह को दोषी ठहराए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट में कैसेशन याचिका (निचली या अपील अदालतों के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका) दायर करने वाले वकील अकबर अल-मुतैरी ने ईमेल के ज़रिए इस मामले की जानकारी दी है.
उन्होंने बताया कि इस मामले में उनकी भूमिका सुप्रीम कोर्ट में कैसेशन की कार्यवाही तक सीमित थी. यह मुक़दमे की क़ानूनी प्रक्रिया का आख़िरी चरण था.
उनके मुताबिक़, उन्होंने ट्रायल कोर्ट या अपील कोर्ट में बलजिंदर सिंह का प्रतिनिधित्व नहीं किया था. उन्हें मिली जानकारी के अनुसार, इन दोनों चरणों में बलजिंदर की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं था.
वकील ने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने बलजिंदर सिंह को दोषी ठहराए जाने के फ़ैसले को चुनौती देते हुए कैसेशन याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने बलजिंदर के पक्ष में सभी क़ानूनी आधार और दलीलें पेश की थीं.
हालांकि, उनके मुताबिक़, सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने ताज़ीर (इस्लामी क़ानून में न्यायाधीश) की सुनाई गई मौत की सज़ा को बरक़रार रखा. इसके साथ ही कैसेशन की कार्यवाही समाप्त हो गई.
अब बलजिंदर सिंह का परिवार भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है.
परिवार की अपील है कि केंद्र सरकार इस मामले को सऊदी अरब के अधिकारियों के सामने उठाए और बलजिंदर को मौत की सज़ा से राहत दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करे.
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