भारतीय वायुसेना प्रमुख अमरजीत सिंह गुरुवार को गोरखपुर पहुंचे तो जेन जी और जेन अल्फा के साथ विशेष संवाद सत्र पूरे दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। संवाद के दौरान बच्चों ने वायु सेना प्रमुख से कुछ गंभीर तो कुछ चुलबुले प्रश्न किए। इसी क्रम में नर्सरी कक्षा में अध्ययनरत ओम ने पूछा कि ‘सर! हवाई जहाज को नींद आ जाए तो वो कहां सोता है... इस पर सेना प्रमुख हंस पड़े और उसकी जिज्ञासा को बहुत रोचक अंदाज में शांत किया।
छात्र ‘प्रांशु आईएएस’ ने सहजता के साथ हवाई जहाज की डिजाइन को लेकर प्रश्न किया। पूछा कि प्लेन का डिजाइन चिड़ियों की तरह क्यों बनाया गया सर...। वायुसेना प्रमुख ने मुस्कुराते हुए प्रांशु की जिज्ञासा शांत की। वहीं, आरोही ‘डॉक्टर’ ने पूछा कि फाइटर जेट में उड़ते समय कभी आपने अपना घर देखा है...। इसपर वायु सेना प्रमुख ने वसुधैव कुटुंबकम् की व्याख्या करते हुए अपना उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि पूरी धरती उनका घर है, ऊपर से मिट्टी का कोई भी हिस्सा दिख जाता है तो उसे हम अपना घर मान लेते हैं।
शुभम ‘आईएएस’ के प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी के साथ आपको खुद अपडेट करना पड़ेगा, वरना दुश्मन आगे निकल जाएगा। नेहा ‘इंसान आईएएस’ ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा प्रश्न किया। पूछा कि जब जवान दुश्मन के घर में घुस गए तो एक मुखिया के तौर पर आपके मन में कैसे विचार आ रहे थे.... इस पर सेना प्रमुख ने बताया कि ‘बहुत सारे साथी लड़ाई व अभ्यास के दौरान पीछे छूट गए। उन्होंने बताया कि खतरा हमेशा रहता है, लेकिन आत्मविश्वास के साथ सब सहज हो जाता है।
श्रेया जायसवाल के प्रश्न पर कहा कि ‘हां मैं परिवार से सेना में पहली पीढ़ी हूं’। घर वालों को मुझसे कोई अपेक्षा ही नहीं थी। मैं शारीरिक गतिविधियों में पीछे था। लेकिन यदि ठान लिया हो कि आपको पास होना ही है तो सब हो जाता है। एक जेन जी के सवाल पर उन्होंने कहा कि सेना ही नहीं, किसी भी जगह अनुशासन और नियम को फॉलो करना जरूरी है।
अंशुमान के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से बहुत से लोग एयरफोर्स में सेवा दे रहे हैं। इसके लिए रिसोर्स मायने नहीं रखते। वहीं, रुचि ‘इंसान आईएएस’ के प्रश्न के जवाब में कहा कि जो आप अपने लोगों से चाहते हो पहले खुद कर के दिखाओ। यानी लीड फ्रॉम फ्रंट। हर ऑर्डर को पहले अपने ऊपर लागू करो।
संवाद के क्रम में एक बच्चे की जिज्ञासा पर वायुसेना प्रमुख ने बताया कि जब वे सेलेक्शन के लिए गए, तो काफी नर्वस थे। एनडीए के दौरान पहली बार अंग्रेजी की परीक्षा में फेल हुए, जिसके लिए घर पर चिट्ठी भेजी गई। चिठ्ठी पढ़कर घर वालों को आश्चर्य हुआ। क्यूंकि वह पढ़ाई में ठीक थे। उन्होंने बताया कि वहां से निकलते समय उनके हाथ में अकादमी द्वारा दिया जाने वाला विशेष पदक भी था, जो गिने-चुने लोगों को ही दिया जाता है।
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